काल की परिभाषा (Definition of Tense) – Kaal in Hindi

काल की परिभाषा(Definition of Tense)

 

प्राय: काल और समय को एक समझाा जाता है। वास्तव ऐसा नहीं है। समय का संबंध भौतिक जगत  से है, तथा काल भाषा की इकाई है। दूसरे शब्दों में कह सकते है कि समय की भाषिक स्थिति ही काल है।
अत: यह जरूरी नहीं काल और समय एक समान हों  उदहारण के लिए— ​”कालिदास ने शांकुतलम लिखा है।”‘
वाक्य में शांकुतलम नाटक लिखे जाने की घटना बीते हुए समय की है।  जबकि है’ क्रिया के कारण यह वाक्य वर्तमान काल का है। अत: काल और समय सदा समान नहीं होते है।
क्रिया के घटित होने के आधार पर समय को तीन भागों में विभाजित किया गया है।
  • वर्तमान समय,
  • भूत समय,
  • भविष्य समय

काल का अर्थ(Meaning of Tense)

काल का अर्थ होता है – “समय” । अर्थात क्रिया के होने या घटने के समय को काल कहते है।
दूसरे शब्दों में —-काल क्रिया के उस रूप को कहते है जिससे उसके  कार्य करने या होने के समय तथा पूर्णता का ज्ञान होता है। उसे काल कहते है।
सरल शब्दों में :—क्रिया के जिस रूप से कार्य के व्यापार समय तथा उसकी पूर्णता अथवा अपूर्णता का बोध होता है। उसे काल कहते है।
क्रिया के होने के समय की सूचना हमें काल से मिलती है। जैसे —
  • नीलम बीमार है।
  • नीलम बीमार थी ।
  • नीलम अस्पताल जाएगी।
उपर्युक्त वाक्य में–” है”  ,”थी ” ,”जाएगी” क्रिया के समय का बोध हो रहा है। है से वर्तमान समय का बोध होता है।”
“-थी” ये बीते समय का और जाएगी से आने वाले समय का।
काल के अन्य उदहारण
  • मैं  फुटबालॅ खेल चुका हूँ।
  • मैं फुटबालॅ खेल रहा हूँ।
  • मैं फुटबालॅ खेलुगॉं।
इन तीनों ही वाक्यों में कर्ता एवं क्रिया एक ही है ,लेकिन किए जाने का समय अलग अलग है| वह समय “चुका, रहा एवं खेलुगॉं”  के कारण पता चल रहा है| जिस प्रकार यहां पर क्रिया को तीन कालों में किया गया है उसी प्रकार काल के तीन भेद होते हैं|
समय के इन तीनों भेदों के आधार पर ही काल के  भी तीन  भेद किए गए है। जैसे

काल के भेद-(Kind of Tense)

काल के तीन भेद होते है-
  1. वर्तमान काल (present Tense) – जो समय चल रहा है।
  2. भूतकाल(Past Tense) – जो समय बीत चुका है।
  3. भविष्यत काल (Future Tense)- जो समय आने वाला है।

(1) वर्तमान काल(present Tense)

कोई क्रिया जिस समय घटित होती है, भाषा में वह समय वर्तमान काल कहलाता है।  हिंदी में वर्तमान काल की सूचना देने वाले चिह्न हैं— “है,हैं,हो तथा हूॅं “आदि है।
दूसरे शब्दों में — क्रिया पदबंध में लगे जिन चिह्नों प्रत्ययों से यह पता चलें कि क्रिया वर्तमान समय में घटित” हो रही है,” ” हुई है,या होती है,”वे चिह्न वर्तमान काल के चिह्न कहे जाते हैं तथा वह वाक्य वर्तमान का वाक्य होता है।
सरल शब्दों में——क्रिया के जिस रूप से वर्तमान में  क्रिया का होना पाया जाए,उसे वर्तमान काल कहते है। अर्थात
इसे हम ऐसे कह सकते है कि—क्रिया के जिस रूप से वर्तमान में चल रहे समय का बोध होता है, उसे वर्तमान काल कहते हैं।
उदहारण के तौर पर
  • मेरी बहन डॉक्टर है।
  • वह रोज अस्पताल जाती है।
  • पिताजी सुबह मंदिर जाते है।
  • मॉ इस समय नाश्ता बना रही है।
  • बच्चे स्कूल गए है।
  • उन लोगों ने खानाा खा लिया है।
  • तुलसीदास जी ने रामचरित लिखा है।
  • सभी छात्र अपना काम समाप्त कर चुके है।
उपर्युक्त वाक्यों में क्रिया के वर्तमान समय में होने का पता चल रहा है। अतः ये सभी क्रियाएँ वर्तमान काल की क्रियाएँ हैं।

विशेष :—

  • वर्तमान काल की पहचान के लिए वाक्य के अन्त में ‘ता, ती, ते, है, हैं’ आदि आते है।
  • वर्तमान काल में क्रिया व्यापार की निरन्तरता रहती है।

वर्तमान काल के भेद

वर्तमान काल के पाँच भेद होते है-

  1. सामान्य वर्तमानकाल
  2. अपूर्ण वर्तमानकाल
  3. पूर्ण वर्तमानकाल
  4. संदिग्ध वर्तमानकाल
  5. तत्कालिक वर्तमानकाल
  6. संभाव्य वर्तमानकाल
1).सामान्य वर्तमानकाल —  जिस काल में सधारणयता वर्तमान में  क्रिया का होना पाया जाता है
उसे सामान्य वर्तमानकाल कहते है।
अन्य शब्दों में ——जिसके द्वारा हमें वर्तमान में  क्रिया के  समान्य रूप का पता चलता है। वह सामान्य वर्तमानकाल क्रिया  कहलाती है।
सरल शब्दों में —क्रिया के जिस रूप से वर्तमान समय में क्रिया का होना पाया जाए, उसे सामान्य वर्तमानकाल कहते है।
दूसरे शब्दों में——क्रिया का वह रूप जो यह दर्शाता है कि— कार्य की समय सीमा वर्तमान में है, कार्य अपूर्ण अधूरा होने के भी कोई सकेंत न मिलें और उस कार्य से सम्बधित कोई भी सदेंह प्रकट ना हों,उस क्रिया का वह समय सामान्य वर्तमानकाल होता है।
जैसे-
  • लडका पढ़ता है।
  • बच्चा खिलौनों से खेलता है’।
वाक्य में ‘खेलना’ प्रस्तुत समय में है, किन्तु न तो वह अपूर्ण है और न ही अनिश्चित, अतः यहाँ सामान्य वर्तमान काल है।
सामान्य वर्तमान काल के अन्य उदहारण
  • मैं लेख लिखता हूँ| वह खेल खेलता है|
  • राम घर जाता है।
  • वह गेंद से  खेलता है।
  • सीता  किताब पढती है।
  • मैं  गाता हूँ।
  • वह आता है।
  • माली पौधों को पानी देता है

विशेष :—

  • जिन वाक्यों के अंत में ता है , ती है , ते है , ता हूँ , ती हूँ आदि आते हैं उसे सामान्य वर्तमान काल कहते है।
  • जो क्रिया वर्तमान में सामान्य रूप में पायी जाती है उसे सामान्य वर्तमान काल कहते है।
  • जहाँ पर क्रिया का प्रारम्भ बोलने के समय होता है।
2).अपूर्ण वर्तमानकाल(Present Continuous):-  अपूर्ण का अर्थ होता है – अधुरा।
क्रिया के जिस रूप से  वर्तमान काल में क्रिया की अपूर्णता  का बोध हो,  अर्थात कार्य अभी चल रहा है, उसे अपूर्ण वर्तमान कहते हैं।

दूसरे शब्दों में—— जिसके द्वारा हमें वर्तमान में क्रिया को ना होने का बोध हो,उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते है। जैसे

  • राम खानाा खा रहा है।
  • श्याम खेल रहा है।
सरल शब्दों में ——क्रिया का वह रूप  जिससे  उसके  कार्य के निरंतर/लगातार चलने का बोध  हो, उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते है। जिन वाक्यों के अंत में रहा है , रहे है , रही है , रहा हूँ आदि आते है उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते
उदाहरण के लिए- ‘मोहन विद्यालय जा रहा है’
  • वाक्य में जाने का कार्य अभी हो रहा है, मोहन विद्यालय पहुँचा नहीं है। अतः यहाँ अपूर्ण वर्तमान है।
कुछ अन्य उदाहरण देखिए-
  • वर्षा हो रही है।
  • अनुराग लिख रहा है।
  • राधा खा रही है।
  • सोहन पढ़ रहा है।
पूर्ण वर्तमानकाल(Present Perfect):-  क्रिया का वह रूप  जिससे उसके कार्य के पूर्ण रूप से  होने का बोध होता है। उसे पूर्ण वर्तमानकाल कहते है।
अर्थात इसमें हमें कार्य की पूर्ण सिद्धि का ज्ञान होता है। या उस कार्य के सम्पूर्ण होने पता चलता है।  हमें क्रिया के व्यापार के तत्काल पूरे होने के बारे में भी ज्ञात होता  है।
जैसे-
  • वह आया है।
  • सीता ने पुस्तक पढ़ी है।
  • उसने गेंद खेली है।
  • वह आया है।
  • नौकर आया है।
  • पत्र भेजा गया है।
संदिग्ध वर्तमानकाल(Present Doubtful):– क्रिया का वह रूप जिससे वर्तमान काल में क्रिया के होने का संदेह पाया जाए, उसे  संदिग्ध वर्तमानकाल कहते है। जैसे
  • राम पढता होगाा।
सरल शब्दों में——जिसके द्वारा वर्तमान में क्रिया के होने में सदेंह हो, उसे  संदिग्ध वर्तमानकाल कहते हैं।
जैसे-

लीला बच्चे को दूध पिला  रही होगी। वाक्य में ‘रही होगी’ से दूध पिलाने  के कार्य को निश्चित रूप से नहीं कहा गया, उसमें संदेह की स्थिति बनी हुई है, अतः यहाँ संदिग्ध वर्तमान है।

अन्य उदाहरण-
  • राम पढ़ता होगा।
  • हलवाई मिठाई बनाता होगा।
  • आज विद्यालय खुला होगा।
  • आज शायद बारिश होगी।
  • रमेश जाता होगा।
  • गाड़ी आती होगी ।
  • बच्चा रोता होगा।
तत्कालिक वर्तमानकाल:– क्रिया का वह रूप  जिससे यह पता चलता है कि कार्य वर्तमानकाल में हो रहा है उसे तात्कालिक वर्तमानकाल कहते हैं।जैसे-
  • मै खा रहा हूँ। वह हसॅ रहा है।
  • मै खेल रहा हूॅ। तुम नाच रहा हूॅ।
सम्भाव्य वर्तमानकाल :– इससे वर्तमानकाल में काम के पूरा होने की सम्भवना रहती है। उसे सम्भाव्य वर्तमानकाल कहते हैं।
  • संभाव्य का अर्थ होता है संभावित या जिसके होने की संभावना हो।
जैसे-
  • वह पढ़ता हो
  • उसने खाया हो।
  • मोहित सोया हो।
  • वह आया है।
  • वह लौटा हो।
  • वह चलता हो।

भूतकाल :-

जिसके द्वारा हमें क्रिया के बीते हुए समय में होने का बोध होता है। उसे भूतकाल कहा जाता है।
भूतकाल दो शब्दों के मेल से बना है – “भूत + काल। भूत का अर्थ होता है – ” जो  बीत गया और काल का अर्थ होता है – समय।”
अर्थात हम कह सकते है कि—क्रिया के जिस रूप से कार्य की समाप्ति का बोध हो, उसे भूतकाल की क्रिया कहते हैं।
सरल शब्दों में- भाषा में जिन चिह्ननों से यह पता चलता है। कि क्रिया बीते हुए समय में घटित हुई थी,भाषा में वे चिह्न भूतकाल सूचक चिह्न कहलाते है। तथा क्रिया भूतकाल कहीं जाती है।
दूसरें शब्दों में — क्रिया पदबंध में लगे जिन चिह्ननों से यह पता चलता है कि क्रिया बीते हुए समय में घटित हुई थी,वे चिह्न भूतकाल के चिह्न कहलाते है। तथा वह वाक्य भूतकाल का वाक्य होता है।
हिंदी में भूतकाल की सूचना देने वाले चिह्न  था, थी, थे, या आ, ए,इ,ई आदि है।
​जैसे-
  • आज हमारा स्कूल बंद था
  • हवा बहुत तेज चल रही थी
  • वह खा चुका था।
  • मैंने पुस्तक पढ़ ली थी।
  • वे दोनों मेरे पडोसियों के बच्चे थें।
उपर्युक्त सभी वाक्य बीते हुए समय में क्रिया के होने का बोध करा रहे हैं। अतः ये भूतकाल के वाक्य है।
भूतकाल को पहचानने के लिए वाक्य के अन्त में ‘था, थे, थी’ आदि आते हैं।

भूतकाल के भेद

भूतकाल के छह भेद होते है-
  •  सामान्य भूतकाल (Simple Past)
  • आसन भूतकाल (Recent Past)
  • पूर्ण भूतकाल (Complete Past)
  • अपूर्ण भूतकाल (Incomplete Past)
  • संदिग्ध भूतकाल (Doubtful Past)
  • हेतुहेतुमद् भूत (Conditional Past)
सामान्य भूतकाल (Simple Past)
क्रिया के जिस रूप  से बीते  हुए समय का निश्चित ज्ञान न हो] उसे सामान्य भूतकाल कहते है।
दूसरे शब्दों में —: जिस काल में  क्रिया के समान्य रूप का पता चलता है। वह सामान्य भूतकाल कहलाता है।
जैसे :—
  • मैने पानी पिया,
  • राम ने रोटी खाई।
  • श्याम गया।,
  • गीता आई।
  • राम ने खाना खाया
  • श्याम ने क्रिकेट खेला।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ बीते हुए समय में पूरी हो गई। अतः ये सामान्य भूतकाल की क्रियाएँ हैं।

विशेष:—

  • इसमें समय का पता न​हीं होता है।
  • सामान्य भूतकाल में वाक्य के पीछे है नहीं आता है।
  • इसमें किसी विशेष भूतकाल का बोध नहीं होता है।
  • इसमें  वाक्यों के अंत में आ, ई, ए, था, थी, थे आते हैं
आसन्न भूतकाल (Recent Past)
क्रिया के जिस रूप से क्रिया के व्यापार  का समय आसन्न निकट ही समाप्त समझा जाए, उसे आसन्नभूतकाल कहते है।
सरल शब्दों में:— जिसके द्वारा हमें यह पता चलें कि  भूतकाल में कोई क्रिया अभी— अभी समाप्त हुई है। वह आसन्नभूतकाल कहलाता है।
जैसे
  • राम नैनीताल से लौटा है।
  • मै खानाा खा चुका हूॅ
  • राम ने क्रिकेट खेला है।
  • सीता गयी है।
  • मेरा मित्र दिल्ली गया है।
  • उसने सेब खाया है|
  • वह पढ़कर आई है|
  • अध्यापिका पढ़कर आयीं हैं।
  • मैं अभी सोकर उठा हूँ।
  • उसने दवा खायी है।
  • सिपाही ने चोर को पकड़ लिया।
  • श्याम ने पत्र लिखा है।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ अभी-अभी पूर्ण हुई हैं। इसलिए ये आसन्न भूतकाल की क्रियाएँ हैं।

विशेष

  • आसन्न का अर्थ होता है -निकट
  • इसमें क्रिया निकट भूतकाल में समाप्त होती है
  • इससे क्रिया की समाप्ति निकट भूत में या तत्काल ही सूचित होती है।
  • आसन्न भूतकाल में वाक्य के पीछे “है” आता है।
पूर्ण भूतकाल (Complete Past)
क्रिया के जिस रूप से बीते समय में कार्य की समाप्ति का पूर्ण बोध होता है। उसे पूर्णभूत कहा जाता है।
अथार्त क्रिया के जिस रूप से यह पता चले की –कार्य को समाप्त हुए बहुत समय बीत चूका है उसे पूर्ण भूतकाल कहते हैं।
सरल शब्दों में— जिसके द्वारा हमें यह पता चलें कि  कोई क्रिया भूतकाल से पहले ही हुई है वह पूर्ण भूतकाल  कहलाता है।
दूसरे शब्दों में :— क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, उसे पूर्ण भूतकाल कहते हैं।जैसे
  • मैं खाना खा चुका था
  • सीता गयी थी
  • राम ने क्रिकेट खेला था।
  • वह दिल्ली गया था।
  • राधा ने गीत गया था।
  • वह रोटी खा चूका था।
  • श्याम ने पत्र लिखा था।
उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाएँ अपने भूतकाल में पूर्ण हो चुकी थीं। अतः ये पूर्ण भूतकाल की क्रियाएँ हैं।

विशेष

  • पूर्ण भूतकाल में क्रिया के साथ ‘था, थी, थे, चूका था , चुकी थी , चुके थे आदि लगता है।
  • कार्य के पूर्ण होने के स्पष्ट बोध होता है।
  • कार्य निश्चित किये गये समय से पहले ही पूरा होने का पता चलता है।
  • इसमें क्रिया को पूर्ण हुए बहुत समय व्यतीत हुआ पाया जाता है। लैसे कृष्ण ने कंस को मारा था
अपूर्ण भूतकाल (Incomplete Past)
क्रिया के जिस रूप से यह जाना जाए कि क्रिया भूतकाल में हो रही थी,लेकिन उसकी समाप्ति का पता न चलें उसे अपूर्ण भूत कहते है।
दूसरे शब्दों में — जिसके द्वारा हमेंं भूतकाल में किसी कार्य के पूरा न होने का बोध होता है। वह अपूर्ण भूतकाल कहलाता हैै।
सरल शब्दों में—क्रिया के   जिस रूप से यह ज्ञात हो कि भूतकाल में कार्य सम्पन्न नहीं हुआ था – अभी चल रहा था, उसे अपूर्ण भूत कहते हैं।
जैसे-
  • वे दोनों  गीत गा रही थी।
  • लडकी सो रही थी।
  • बच्चे आपस में लड रहे थे
  • खाना खा रहा था।
  • माताजी पूजा कर रही थी
उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाएँ से कार्य के अतीत में आरंभ होकर, अभी पूरा न होने का पता चल रहा है। अतः ये अपूर्ण भूतकाल की क्रियाएँ हैं।

विशेष:—

  • इसमें क्रिया का भूतकाल में होना, परंतु समाप्त न होना पाया जाता है जैसे कल आकाश में वायुयान उड रहा था।
  • इसमें कार्य के भूतकाल में शुरू होने का पता चलता है, लेकिन खत्म होने का पता नहीं चलता है।
  • इन वाक्यों के अंत में रहा था, रही थी, रहे थे आदि आते हैं,
संदिग्ध भूतकाल(Doubtful Past):-  जिस क्रिया से  भूतकाल  में कार्य होने में अनिश्चितता अथवा संदेह प्रकट हो, उसे संदिग्ध भूतकाल कहते है।
सरल शब्दों में — जिसके द्वारा हमें भूतकाल में  क्रिया के काम या कार्य होने पर सदेंह पाया जाता है। वह संदिग्ध भूत कहलाता है।
दूसरे शब्दों में —  क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय में कार्य के पूर्ण होने या न होने में सन्देह होता है।
उसे संदिग्ध भूतकाल कहते है।
जैसे
  • राम ने खाना खाया होगा।
  • ललित  गाया होगा ।
  • सीता गयी होगी।
  • बस छूट गई होगी।
  • दुकानें बंद हो चुकी होगी।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ से भूतकाल में काम पूरा होने में संदेह का पता चलता है। अतः ये संदिग्ध भूतकाल की क्रियाएँ हैं।

विशेष

  • भूतकाल में कार्य होने का में सन्देंह पाया जाता है।
  • इसमें यह सन्देह बना रहता है कि भूतकाल में कार्य पूरा हुआ/होगा या नही।
  • इन वाक्यों के अंत में गा , गे , गी आदि आते हैं
हेतुहेतुमद् भूतकाल(Conditional Past):– यदि भूतकाल में  किसी एक कार्य के पूरा न होने के कारण दूसरा कार्य भी पूरा न हो पाया हो, तो उसे हेतुहेतुमद् भूतकाल कहते है।
दूसरे शब्दों में :—   “हेतु’ का अर्थ है- कारण”।  क्रिया के जिस रूप से यह पता चलें कि क्रिया भूतकाल में होने वाली थी, पर किसी कारण वश न हो सकी, उसे हेतुहेतुमद् भूतकाल कहते है।
जैसे
  • यदि पौधों को पानी दिया होता तो पौधे विकसित हो जाते।”
  • यदि वह पढ़ता तो परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाता।
  • यदि तुमने परिश्रम किया होता, तो सफल हो जाते।
  • वर्षा होती, तो फसल अच्छी होती।
  • मैं आगरा जाती तो ताजमहल देखती।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पहली क्रिया के न होने पर दूसरी क्रिया भी पूरी नहीं होती है। अतः ये हेतुहेतुमद् भूतकाल की क्रियाएँ हैं।

विशेष

  • एक क्रिया का कार्य होना या ना होना दूसरी क्रिया के कार्य  पर निर्भर  करता है।
  • इसमें भूतकाल में किसी कार्य के पूरा न होने के कारण का वर्णन दो वाक्यों में दिया गया हो या दिया जाता है।
  • इससे यह पता चलता है कि क्रिया भूतकाल में होनेवाली थी, पर किसी कारण न हो सका।
  • क्रिया के होने में कोई शर्त पायी जाये उसे हेतुहेतुमद् भूतकाल कहते हैं।
  • इसमें  अधिकतर वाक्यों में तो , ती , ते का प्रयो
  • ग किया जाता है।

भविष्यत काल

क्रिया पदबंध में लगे जिन चिह्नों से यह पता चलता है कि क्रिया आने वाले समय में घटित होने वाली है, वे चिह्न भविष्यत काल के चिह्न कहलाते हैं तथा वह क्रिया भविष्यत काल की होती है।
दूसरे शब्दों में —जिसके द्वारा हमें क्रिया के आने वाले समय में कार्य होने का बोध हो उसे भविष्यत काल कहते है।
सरल शब्दों में — क्रिया के जिस रूप से आगे आने वाले समय का बोध हो, वह भविष्य काल कहलाता है।
अन्य शब्दों में कह सकते है कि——- क्रिया के जिस रूप से काम का आने वाले समय में करना या होना प्रकट हो, उसे भविष्यतकाल कहते है।
जैसे-
  • राम कल पढ़ेगा।
  • इस साल बारिश अच्छी होगी
  • वह मेरी बात नहीं मानेगी।
  • आज बाजार बंद रहेगा
  • कमला गाएगी
  • वह कल घर जाएगा।
  • हम सर्कस देखने जायेंगे।
  • किसान खेत में बीज बोयेगा।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ से पता चलता है कि ये सब कार्य आने वाले समय में पूरे होंगे। अतः ये भविष्यत काल की क्रियाएँ हैं।

विशेष

  • भविष्य में होनेवाली क्रिया का बोध भविष्यतकाल  से होता है।
  • भविष्यत काल की पहचान के लिए वाक्य के अन्त में ‘गा, गी, गे’ आदि आते है।

भविष्यत काल के भेद

भविष्यतकाल के तीन भेद होते है-
  1. सामान्य भविष्यत काल
  2. सम्भाव्य भविष्यत काल
  3. हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल
(i)सामान्य भविष्यत काल :– क्रिया के जिस रूप से उसके भविष्य में होने वाले कार्य के संबंध में जानकारी हो अथवा यह व्यक्त हो कि क्रिया सामान्य भविष्य में होगी, उसे समान्य भविष्य  कहते है।
दूसरे शब्दों में — जिसके द्वारा हमें भविष्य में क्रिया के सामान्य रूप का पता चलें उसे समान्य भविष्यकाल  कहते है।
जैसे-
  • बालक टी वी देखेगा
  • राम कल जाएगा।
  • मोहन खाना खएगा।
  • वह घर जायेगा।
  • दीपक अख़बार बेचेगा।
  • हम घूमने जायेंगे।
उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाएँ भविष्य में सामान्य रूप से काम के होने की सूचना दे रही हैं। अतः ये सामान्य भविष्यत काल की क्रियाएँ हैं।

विशेष

  • इसमें क्रिया का साधारणयता आने वाले समय में होना पाया जाता है।
  • इससे यह प्रकट होता है कि क्रिया सामान्यतः भविष्य में होगी।
  • इन शब्दों के अंत में ए गा, ए गी, ए गे आदि आते हैं
  • इससे क्रिया के भविष्य में होने का पता चलता है
सम्भाव्य भविष्यत काल:-क्रिया का वह रूप जिससे कार्य होने की सम्भवना का बोध हों उसे सम्भाव्य भविष्यत काल कहते है।
सरल शब्दों में — क्रिया के जिस रूप से उसके भविष्य में होने की संभावना का पता चलता है, उसे सम्भाव्य भविष्यत काल कहते हैं। इसमें भविष्य काल में क्रिया के कार्य होने की सम्भावना होती है।
जैसे-
  • सम्भव है कि कल वह आ जाएगा
  • सम्भव है कि राम पढ़ै।
  • शायद चोर पकड़ा जाए।
  • शायद आज वर्षा हो।
  • परीक्षा में शायद मुझे अच्छे अंक प्राप्त हों।
  • हो सकता है कि मैं कल वहाँ जाऊँ।
उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाओं के भविष्य में होने की संभावना है। ये पूर्ण रूप से होंगी, ऐसा निश्चित नहीं होता। अतः ये सम्भाव्य भविष्यत काल की क्रियाएँ हैं।

विशेष

  • जिससे भविष्य में किसी कार्य के होने की सम्भावना हो।
  • जिसके द्वारा भविष्य की सम्भावना दिखाई दे रही हो।
  • इन वाक्यों में शायद ,हो सकता है।,सम्भव आदि शब्द वाक्य बनाने के लिए प्रयोग किए जाते है।
3).हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल:– क्रिया का वह रूप जिससे भविष्य में एक समय में एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर हो, हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल कहलाता है।
सरल शब्दों में——— क्रिया के जिस रूप से एक कार्य का पूरा होना दूसरी आने वाले समय की क्रिया पर निर्भर करता है वह  हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल कहते है।
जैसे-
  • राम गाए तो मैं बजाऊ।
  • वह आये तो मै जाऊ।
  • वह कमाये तो मैं खाऊँ।
  • जो कमाए सो खाए।
  • पैसे कमाओगे तो खर्च करोगे|
  • तुम मेहनत करोगे तो फल अवश्य मिलेगा।