क्रिया(Verb) की परिभाषा

क्रिया की परिभाषा( Definition of Verb)

जो शब्द या पद विभिन्न कार्यकलापों के किए जाने घटित होने या किसी व्यक्ति/वस्तु की स्थिति, अवस्था ,दशा आदि की सूचना देते है वे शब्द या पद क्रिया कहलाते है।

जैसे

  • रसोइया खना बना रहा है।
  • बच्चे क्रिकेट खेल रहे है।
  • सुहानी मैदान में दौड रही है।
  • मेरे सिर में दर्द है।

उपर दिए गए वाक्य में सभी स्थूल अंश किसी न किसी कार्य कार्यकलाप के किए जाने या होने की सूचना दे रहे है

जैसे —वाक्य 1—2—3 में बना रहा है,रहे है।, दौड रही है।ऐसे क्रिया कलाप हैं जो अलग अलग कर्ताओं  द्वारा सम्पन्न किए जा रहें है। वाक्य — की है। क्रिया कर्ता के सिर में दर्द  होने की सूचना दे रही है।

 

  • हर भाषा में विभिन्न् कार्यकलापों को किए जाने की सूचना देने वाले शब्दों की संख्या असीमित होती है।
  • हिंदी में खाना,पीना,लेना,देना,करना,उठना,बैठना,लिखना,पढना,चलना देखना सोना आना, जाना,आदि शब्द विभिन्न क्रिया कलापों की सूचना देने वाले शब्द हैं।
  • हिंदी में होना क्रिया किसी वस्तु या व्यक्ति की स्थिति,अवस्था,दशा,आदि की सूचना देती है।

“होना” क्रिया का वाक्यों में प्रयोग इस प्रकार है—

  • मेरी बहन डॉक्टर है।
  • कपडे अलमारी में है।
  • मै इस घर में किराएदार हूॅ।
  • तुम बहुत होशियार हो।

 

उपर दिए गए उदहारणों में प्रयुक्त है, हैं,हूॅ, हो आदि होना क्रिया के रूप है। जो संज्ञा शब्दों/पदों की स्थिति, अवस्था,दशा आदि की सूचना दे रहे है।

 

अर्थात हम कह सकते है कि क्रिया वे शब्द हैं जो किसी घटना या कार्यकलाप के होने या किए जाने की सूचना देतें है, अथवा किसी वस्तु व्यक्ति की स्थिति, अवस्था या दशा का बोध कराते हैं। वे क्रिया कहलाते है

 

क्रिया का अर्थ(Meaning of Verb)

क्रिया’ का अर्थ होता है- करना|

वे शब्द जो किसी काम के करने या होने का बोध कराते है। वे क्रिया कहलाते है।

अर्थात जिन शब्दों से किसी कार्य का होना या करना समझा जाए, या व्यक्त हो ,उन्हें क्रिया कहते हैं। जैसे- खाना, पीना,  पढना, रोया, खा रहा, जायेगा आदि।

उदाहरणस्वरूप:—– अगर एक वाक्य ‘मैंने खाना खाया’ देखा जाये तो इसमें क्रिया ‘खाया’ शब्द है। ‘इसका नाम मोहन है’ में क्रिया ‘है’ शब्द है। ‘आपको वहाँ जाना था’ में दो क्रिया शब्द हैं – ‘जाना’ और ‘था’।

 

  • घोड़ा जाता है।
  • पुस्तक मेज पर पड़ी है।
  • मोहन खाना खाता है।
  • राम स्कूल जाता है।

जब क्रिया का प्रयोग वाक्य में किया जाता है। तब” ना “को हटा दिया जाता है। क्रिया के समान्य रूप से “ना” को हटाने के बाद जो अंश शेष बचता है वह मूल क्रिया अथवा धातु रूप कहलाता है। धातु रूप ही क्रिया के सभी रूपों में समान रूप से प्रयुक्त होता है।

उदहारण के लिए

  • सोना क्रिया की धातु है, सो।वाक्य में सो धातु का प्रयोग सोना क्रिया के समस्त रूपों में समान से किया जाएगाा।
  • मै रात को दस बजे सोता हूॅ।    वह गहरी नींद में सो रही है।
  • कल मैं पूरी रात न हो सका     मैं आज रात को नहीं सोउगॉ

 

जानें

  • क्रिया—पद में एक अथवा अधिक पद होते है। जैसे —है, था,जाता है,जा रहा था आदि।
  • प्राय: वाक्य में क्रिया पद अवश्य होता है। यह प्राय: अंत में होता है।
  • कहां कहीं क्रिया प्रत्यक्ष नहीं होती है। पर परोक्ष रूप में उपस्थ्ति रहती है।

धातु की परिभाषा(Definition of Root)

 

धातु रूप ही क्रिया के मुख्य अर्थ की सूचना देता है। यही मुख्य अर्थ उस क्रिया के समस्त रूपों में प्रमुख्त:रहता है। इसीलिए क्रिया के धातु रूप को मुख्य क्रिया भी कहते हैं उपर दिए गए वाक्यों की क्रिया का मुख्य अर्थ सोना ही हैं।

 

क्रिया के विभिन्न् रूपों में समान रूप से प्रयुक्त होने वाले तथा क्रिया के मुख्य अर्थ को— बताने वाले अंश को धातु कहा जाता है।जैसे —

  • चल, उठ, बैठ,भाग, दौड,धो पढ,लिख,कर आदि।

क्रिया के विभिन्न रूपों में समान रूप से प्रयुक्त होने वाले तथा क्रिया के मुख्य अर्थ को बताने वाले अंश को धातु कहा जाता है। जैसे— चल, बैठ,भाग, दौड, धो, पढ, लिख,कर आदि सभी धातुएॅ हैं। मुख्य अर्थ का बोध कराने के कारण धातु रूप को ही मुख्य क्रिया कहा जाता है।

धातु का अर्थ(Meaning of Root

धातु रूप- क्रिया के मूल रूप को  धातु या क्रियामूल  को धातु कहते है।

धातु से ही क्रिया पद का निर्माण होता है। इसलिए क्रिया के सभी रूपों में धातु उपस्थित रहती है।जैसे—

  • चलना क्रिया में चल धातु है।
  • पढना क्रिया में पढ धातु है।

प्रायमूल धातु में ‘ना’ प्रत्यय लगाने से क्रिया का निर्माण किया जाता है। 

जैसे-

धातु रूप                               सामान्य रूप

धातु रूप                               सामान्य रूप
बोल, पढ़, घूम, लिख, गा, हँस, देख आदि।बोलना, पढ़ना, घूमना, लिखना, गाना, हँसना, देखना आदि।

 

पहचान —धातु पहचानने का अक सरल सुत्र है। कि दिये गए शब्दांश में—” ना “लगाकर देखें और यदि ना लगने पर क्रिया बने तो समझना चाहिए। कि वह शब्दांश धातु है।

धातु के भेद हैं—

 

1).मूल धातु— यह स्वत्ंत्र होती है तथा किसी अन्य शब्द पर निर्भर नहीं होती है। जैसे—जा,खा,पी ,रह आदि।

2).यौगिक धातु :— यौगिक धातु मूल धातु में प्रत्यय लगाकर कई धातुओं को संयुक्त करके अथवा संज्ञा और विशेषण में प्रत्यय लगाकर बनाई जाती है। यह तीन प्रकार की होती है।

3).प्ररेणार्थक क्रिया धातु — प्ररेणार्थक क्रियाएॅ अकर्मक एंव सकर्मक दोनों क्रियाओं से बनती है। आना/जाना जोडने से प्रथम प्ररेणार्थक एंव वाना जोडने से द्वितिय प्रेरणार्थक रूप बनते हैं।

मूल धातु प्रेरणार्थ धातु
उठ—ना
उठाना उठवाना
दे—नादिलाना, दिलवाना
कर—नाकराना, करवाना
सो—ना
सुलाना, सुलवाना
खा—ना
खिलाना ,खिलवाना
पी—ना पिलाना, पिलवाना

 

यौगिक क्रिया धातु — दो या दो से अधिक धातुओं के संयोग से यौगिक क्रिया बनती है। जैसे:-

  •  रोना– धोना,
  • उठना– बैठना
  • चलना –फिरना
  • खा —–लेना
  • उठ—- बैठना
  • उठ—- जाना

नाम धातु —संज्ञा या विशेषण से बनने वाली धातु को नाम धातु कहते है। जैसे

  • हट से हटियाना
  • हथ से हथियाना
  • समझा से समझााना
  • रोना से रूलाना

क्रिया के भेदों का दो आधारों पर  वर्गीकरण किया गया है।

  • कर्म के आधार पर क्रिया के भेद
  • संरचना या प्रयोग के आधार पर क्रिया के भेद —इन दोनों आधारों पर क्रिया के भेदों का वर्गीकरण किया जाता है।

 

रचना की  दृष्टि से हिंदी में दो तरह की क्रियाएॅ मिलती हैं।

  1. एक इकाई के रूप में बनी क्रियाएॅजैसे चलना,उठना, बैठना,खाना,पीना आदि। 
  2. एकाधिकार इकाइयों के मेल से बनी  क्रियाएॅजैसे आ जाना,भूख लगाना ,गपियाना ,सुलाना आदि। 

 

अत: क्रिया के दो भेद किए गए है।

  1. सरल क्रिया
  2. जटिल क्रिया

 

कर्म के आधार पर क्रिया के भेद:—

सरल क्रिया:— सरल क्रिया एक ईकाइ वाली क्रिया होती है। जैसे —आना,खाना,पीना,लेना आदि।

कर्म की अपेक्षा के आधार सरल क्रिया के भेद किए गए हैं —

  1. सकर्मक क्रिया तथा
  2. अकर्मक क्रिया।

 

सकर्मक क्रिया(Transitive Verb)

 

सकर्मक का अर्थ होता है,—— कर्म के साथ या कर्म सहित। ,जो क्रिया वाक्य में कर्म की अपेक्षा करती है। सकर्मक क्रिया कहलाती है। 

–अपेक्षा करने का अर्थ यह नहीं है कि-– वाक्य में कर्म उपस्थित होगा ही। वाक्य में कर्म आता है। तो भी और नहीं आता है तो भी,यदि क्रिया ‘कर्म ‘की अपेक्षा करती है तो वह सकर्मक क्रिया कहीं जाएगी।  तो वह सकर्मक क्रिया कही जाएगी वाक्य में ‘कर्म’ का प्रयोग होगा या नहीं यह वक्ता की इच्छा पर निर्भर करता है।

–निम्नलिखित वाक्यों के दूसरे उपवाक्य में कर्म का लोप कर दिया गया है फिर भी दोनों उपवाक्यों में कर्म की अपेक्षा करने के कारण सकर्मक क्रिया है, जैसे—

  • मैं खाना खा चुका हूॅ आप भी खाइए।
  • सब लोग फिल्म देख चुके हैं,कल मैं भी देखूगॉv
  • अभी,मीरा गीत सुना रही है उसके बाद तुम सुनाता।
  • सब बच्चे अपना गृहकार्य पूरा कर रहें हैं तुम क्यों नहीं कर रहे?
  • पुजारी जी सब को प्रसाद बॉट रहे हैं जाकर तुम भी ले लो ।

सकर्मक क्रिया की पहचान:—

सकर्मक क्रिया जिस ‘कर्म ‘ की अपेक्षा क्रिया करती है। उसकी पहचान का सबसे आसान तरीका है—क्रिया पर क्या तथा किसे/किसको शब्दों से प्रश्न करना। क्रिया पर क्या शब्द का उत्तर यदि निर्जीव संज्ञा हो तो वह संज्ञा मुख्य कर्म या प्रत्यक्ष कर्म कहलाती है तथा किसे/ किसको प्रशन का उत्तर यदि सजीव संज्ञा है तो उसे गौण या अप्रत्यक्ष कर्म कहते हैं

जैसे—

  • माला  खाना बना रही है। ——— क्या बना रही है?
  • नर्स ने मरीज को दवाई पिलाई। टेबल
  • पिताजी ने नौकर को डॉटा।
  • अध्यापक ने मदन को बहुत समझाया

 

सकर्मक क्रिया के दो भेद/उपभेद(kind of Transitive Verb)

सकर्मक क्रियाएॅ दो तरह हो सकती है। कुछ सकर्मक क्रियाएॅ केवल एक कर्म की ही अपेक्षा करती है तथा कुछ दो दो

कर्मों की। इस आधार पर भेद हैं

  • एककर्मक सकर्मक क्रिया तथा
  • द्विकर्मक सकर्मक क्रिया

 

क).  एककर्मक सकर्मक क्रिया:— जो सकर्मक क्रिया केवल एक ही कर्म’ की अपेक्षा करती है,एककर्मक सकर्मक क्रिया है, जैसे —

  • खाना,पीना ,लिखना, करना, बुलाना,पीटना,समझानाआदि।

ध्यान रखिए:— एककर्मक सकर्मक क्रिया वाले वाक्यों में क्रिया केवल एक ही कर्म की अपेक्षा करती है। जो” प्रत्यक्ष कर्म’ भी हो सकता है और अप्रत्यक्ष कर्म भी

 

अन्य शब्दों में — ऐसी सकर्मक क्रियाएॅ जिनका एक ही कर्म होता है, उन्हें एककर्मक क्रिया कहते है।

जैसे:—

केवल प्रत्यक्ष कर्म वाले वाक्य

  • सभी विद्यार्थी निबंध लिख रहे हैं।
  • पिताजी अखबार पढ रहे हैं।
  • लडकियॉ  नृत्य सीख  रही हैं।
  • बच्चे टेलिविजन देख रहे है।

 

केवल अप्रत्यक्ष कर्म वाले

  • पुलिस ने चोर को पकडा ।
  • अध्यापिका ने मुकेश को बुलाया है।

दृविकर्मक(सकर्मक) क्रिया :—

जो सकर्मक क्रिया मुख्य क्रिया कर्म और गौण कर्म दोनों की अपेक्षा करती है। ‘द्विकर्मक क्रिया कहलाती है। जैसे

  • देना—लेना,
  • खरीदना—बेचना
  • लाना— भेजना
  • मॉंगना—बनाना आदि।

दृविकर्मक क्रिया का वाक्य में प्रयोग

  • मैने निताजी से एक किताब मॅंगवाई है।
  • मॉं ने बच्चों के लिए मिठाई बनाई।
  • पुजारी ने सब लोगों को प्रसाद दिया।
  • उसने अपनी बहन को राखी भेजी।

 

अन्य शब्दों में —ऐसे सकर्मक क्रियाएॅ जिनके दो कर्म होते है,उन्हें द्विकर्मक सकर्मक क्रिया कहते है। जैसे—

  • कमलेश ने सुरेश को गणित पढाया ———सुरेश और गणित — दो कर्म
  • विमला ने दुकानदार से चावल खरीदे ———  दुकानदार और चावल— दो कर्म
  • अनारो ने डाकिये से पत्र लिखवाया——— डाकिये और पत्र ——— दो कर्म
  • प्रेम ने कंचन से चित्र बनवाया—————— कंचन और चित्र——— दो कर्म

 

इन वाक्यों की क्रियाएॅ— पढाया, खरीदे, लिखवाया और बनवाया के दो दो कर्म हैं।—ये कर्म हैं,— सुरेश और गणित, दुकानदार और चावल,डाकिये और पत्र,कंचन और चित्र

 

द्विकर्मक क्रिया के अन्य उदहारण:

  • राकेश ने रवि को अपनी घडी दी।
  • मैंने सचिन से मकान खरीदा।
  • स्वाति ने चित्रिशा को गाना सुनाया।
  • उसने राम को पत्र लिखा।

उपर्युक्त वाक्यों में देना, खरीदना सुनना लिखना द्विकर्मक क्रियाएॅ है।क्योंकि इनके साथ दो दो कर्म हैं।

  • रवि को घडी,
  • सचिन से मकान
  • चित्रिशा -गाना, और
  • राम–पत्र आदि।

इनमें एक कर्म सर्जीव है दूसरा निर्जीव

 

ध्यान दें/विशेष:—

  • द्विकर्मक क्रियाओं का एक कर्म सर्जीव और निर्जीव होता है।
  • निर्जीव कर्म प्रमुख होता है,तथा सजीव गौण।

द्विकर्मक क्रिया में सर्जीव कर्म के साथ को परसर्ग लगता है। निर्जीव कर्म बिना परसर्ग के होता है।

हिंदी में कुछ सकर्मक क्रियाएॅ और अकर्मक क्रिया के रूप में बदला जा सकता है।  जैसे:—–

  • मारना, चलना—चलाना, उठना—बैठना

इसी प्रकर सकर्मक क्रिया को अकर्मक क्रिया बनाया जा सकता है। जैसे:—-

  • घेरना— घिरना, खोलना—खुलना, लूटना—लुटना

कुछ सकर्मक क्रियाएॅ अकर्मक क्रिया के रूप में भी प्रयुक्त हो सकती है। जैसे:—–

  • राम पुस्तक पढ रहा है।—————सकर्मक पढना
  • राधा आजकल पढ रही है।————— अकर्मक पढना

अकर्मक क्रिया(Intransitive Verb)

 

अकर्मक क्रिया का अर्थ — कर्म के बिना या कर्म रहित। अर्थात वाक्य में जिस क्रिया के प्रयोग में कर्म की आवश्यकता नहीं होती है।उसे अकर्मक क्रिया कहते है।

इस क्रिया पद से कार्य का होना या करना स्वत्: ही पता चल जाता है। तथा इसका सीधा प्रभाव कर्ता पर पडता है——उदहारण के लिए

  • रमेश आता है।
  • पक्षी उड रहे हैं।
  • बच्चा रो रहा है।
  • रानी हॅसेगी।

उपर्युक्त वाक्यों में आए  आना,उडना, हॅसना, आदि क्रियाओं को कर्म की आवश्यकता नहीं है।

  • इनका प्रभाव क्रमश: रमेश,पक्षी, रानी,और बच्चे पर पड रहा है।

विशेष(Important)

  • अकर्मक क्रिया के साथ कर्म नहीं होता है तथा उसका फल कर्ता पर पडता है।

अकर्मक क्रिया वाक्य में कर्म की अपेक्षा नहीं करती जैस:—-

  • चलना, फिरना,दौडना,भगना,उठना,बैठना,आना, जाना,हॅसना,रोना ,सोना मुस्कुराना आदि।

 

अकर्मक क्रिया की पहचान:—

किसी वाक्य की क्रिया के साथ क्या,किसे,अथवा किसको,लगाकर प्रश्न पूछने पर यदि कोई उत्तर नहीं मिलता तो वह अकर्मक क्रिया होती है।

  • बच्चा रोता है।——क्या रोता है। कोई उत्तर नहीं।
  • जहॅा पर कर्म की प्रधानता नहीं होती है। वहॉ पर अकर्मक क्रिया होती है।
सकर्मकअकर्मक और
वह अपना सिर खुजलाता है।उसका सिर खुजलाता है।
मैं घड़ा भरता हूँ।बूँद-बूँद से घड़ा भरता है।
ये चीजें तुम्हारा जी ललचाती हैं।तुम्हारा जी ललचाता है
विपदा मुझे घबराती है।जी घबराता है।
वह तुम्हें लजा रही है।वह लजा रही है।

 

अकर्मक क्रिया के भेद

अकर्मक क्रिया  दो प्रकार की होती है।

  • पूर्ण अकर्मक क्रिया
  • अपूर्ण अकर्मक क्रिया

 

पूर्ण अकर्मक क्रिया :— जो अकर्मक क्रियाएं पूर्ण होती है अर्थात जिन्हें पूरकों की आवश्यकता नहीं पडती,उन्हें पूर्ण अकर्मक क्रिया कहते है।

इन क्रियाओं से कर्ता की स्थिति, गति,और अवस्था का पता चलता है। इन्हें  स्थित्यर्थक गत्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया भी कहते है। जैसे

  • राधा रो रही है।
  • खिलौना घूम रहा है।
  • बुधमल सो रहा है।
  • ललिता मुस्कुरा रही है।
  • नाना जी हैं।
  • इन वाक्यों में आई क्रियाएॅ हैं। रोना जाना होना घुमना, मुस्कुराना,और सोना।
  • ये स्वंय में पूर्ण है।

–पूर्ण अकर्मक क्रियाओं में स्थानसूचक शब्द आते है। जैसे—— वायुयान अमेरिका जा रहा है। यहॉ जाना से पहले स्थानसूचक शब्द अमेरिका आया है।

–पूर्ण अकर्मक क्रियाओं  के द्वारा अस्तित्व का बोध होता है। जैसे नाना जी, इसमें नाना जी के होने का पता चलता है।  इसी प्रकार अध्यापिका है, गुरू जी है।, नम्रता है्,

 

अपूर्ण अकर्मक क्रिया —-जो अकर्मक क्रियाएॅ स्वंय में पूर्ण नहीं होती उन्हें अपूर्ण अकर्मक क्रियाएॅ कहते है। इन क्रियाओं का कर्ता से संबंध बनाने के लिए किसी ना किसी संज्ञा या विशेषण का आवश्यकता पडती है।

जैसे—

  • रोहन डॉक्टर बनेगा।
  • साइकिल खराब है।
  • फिल्म पारिवारिक है।
  • राधा झगडालू है।

अकर्मक क्रिया और सकर्मक क्रियाओं में अंतर

 

–अकर्मक क्रियाओं को कर्म की आवश्यकता नहीं होती है। सकर्मक क्रियाओं को कर्म की आवश्यकता  होती है।
–वाक्य में क्या लगाकर प्रश्न करें यदि उत्तर में निर्जीव संज्ञा ​होती है।तो वह क्रिया सकर्मक होती है।
–वाक्य में क्या लगाकर प्रश्न करें ,यदि उत्तर में संज्ञा शब्द नहीं मिलता तो क्रिया अकर्मक होती है।
–अकर्मक क्रियाओं में कुछ  स्थितियों में प्रश्न ही नहीं बनता
–कुछ क्रियाएॅ सदा सकर्मक होती है कुछ  सदा अकर्मक होती है। वाक्य में कर्महोने पर भी क्रियाएॅअकर्मक हो सकती है
–वाक्य में आने वाले संज्ञा शब्द सदा कर्म का कार्य नहीं करते है।कई बार ये संज्ञा शब्द स्थानवाचक  क्रिया —विशेषण का रूप ले लेते है। इसलिए ऐसे वाक्यों की क्रियाएॅ अकर्मक होती है
  • राम ​हरियाणा चला गया
  • अध्यापक विद्यालय पहुचॅ गए
इन वाक्यों में अंबाला और विद्यालय संज्ञा होने पर भी  स्थानवाचक  क्रिया —विशेषण  का कार्य कर रहे है। अत: इन वाक्यों में अकर्मक क्रियाएॅ होती है।

अकर्मक क्रिया और सकर्मक क्रियाओं में परिवर्तन

प्रयोग के आधार पर अनेक बार अकर्मक क्रिया और सकर्मक क्रियाओं एक —दूसरे का रूप ले लेती है।
1).उडना — कबूतरबाज कबूतर उडा रहे है।
बगुले संग संग उडते है।
2).खेलना —विद्यार्थी क्रि​केट खेल रहे है।
रजनी शाम को खेलती है।
3).लिखना—— उमेश कहानी लिख रहा है।
माधव लेटकर लिखता है।

जटिल क्रिया

 

जिन क्रियाओं की रचना एक से अधिक इकाईयों के मेल से होती है। वे जटिल क्रिया के अंतर्गत आती है। इस वर्ग में आने वाली प्रमुख पॉच क्रियाए होती है। संयुक्त क्रिया,नामिक क्रिया,प्रेरणार्थक क्रिया,मिश्र क्रिया,समासिक क्रिया

संयुक्त क्रिया(Compoound Verb)

संयुक्त शब्द का अर्थ है——— “अच्छी तरह से युक्त या जुडा हुआ।” सयुक्त क्रियाओं में दो क्रियाओं का संयोग होता है। और दोनों मिलकर एक क्रिया की तरह कार्य करती है।  

उदहारण के लिए

  • उठ+ जाना —उठजाना म। सुबह चार बजे उठ जाता हूॅं
  • चलना + पडना—चल पडना— मैं सुबह आठ बजे चल पडूगॉ।
  • करना+ लेना— कर लेना— उसने अपना काम पूरा कर लिया
निम्नलिखित वाक्यों से समझिए
  •   (क ).                             (ख)
  • बच्चा चिल्लाया। ——————–बच्चा चिल्ला उठा
  • रामसिंह स्कूल जाता है।———–रामसिंह स्कूल जाने लगा।
  • उसे भूख लगी है।————— —उसे भूख लग गई
  • रीटा ने खाना  बनाया।———— रीटा ने खाना बना लिया
उपर्युक्त खण्ड क के वाक्यों में प्रयुक्त चिल्लाया,जाता है,लगी है,बनाया क्रियाओं की तुलना खण्ड ख में प्रयुक्त चिल्ला उठा, स्कूल जाने लगा,लग गई,बना लिया क्रियाओं से करें
संयुक्त क्रिया के अन्य उदहारण :
  • भाग जाना,
  • खा लेना
  • उठ बैठना
  • रख देना
  • रो पडना
  • कर डालना
  • छान मारना
  • जा मारना, आदि।
संयुक्त क्रिया में जाना, लेना,देना,पडना,कर डालना,मारना, मरना क्रियाएॅ रजंक क्रियाएॅ हैंं।

संयुक्त क्रिया के लक्षण/ विशेषता  :—

 

कहीं कहीं संयुक्त क्रिया के दोनोंं पदों का क्रम तथा  स्वरूप बदलने पर अर्थ में पविर्तन आ जाता है। जैसे———
  • उसने उसे मार दिया।—————— जान से मार देना
  • उसने उसे दे मारा ।———————उठाकर नीचे पटक देना
निषेधात्मक वाक्यों में मुख्य क्रिया के साथ रंजक क्रिया नहीं लगती है।
  • उसे भूख लग आई——— उसे भूख नहीं लगी।
  • मोहन चिल्ला उठा———— मोहन नहीं चिल्लाया।
संयुक्त क्रिया में सकना और चुकना जैसी क्रियाएॅ रंजक क्रिया के रूप में प्रयुक्त होती है।वास्तव में ये रंजक क्रियाएॅ नहीं हैं, पर ये मुख्य क्रिया के साथ जुडकर क्रिया के सामथर्य्, पूर्णता का बोध कराती हैं,
  • रमेश यह काम कर सकता है,—————सामर्थ् का भाव
  • गीता मुबंई जा चुकी हैं।———————पूर्णता का भाव
  • संयुक्त क्रिया की रचना दो क्रियाओं के मेल से होती है,पर क्रिया का मुख्य अर्थ पहली क्रिया से ही निकलता है, दूसरी  क्रिया अपना अर्थ छोड देती है।
  • जैसे- माता जी बाजार से आ गई।
अत: किसी एक क्रिया से बनने वाली भिन्न—भिन्न्  संयुक्य क्रियाएॅ परस्पर समानार्थी  नहीं होती है।
  • देखते ही देखते गाडी चल दी।——— देखते ही देखते गाडी चल पडी।
  • देखते ही देखते गाडी चल निकली ————  देखते ही देखते गाडी चली गाडी।
उपर्यक्त वाक्यों को भी सभी संयुक्त क्रियाओं का अर्थ ‘चलना’ ही है पर वे सब शत प्रतिशत समानार्थी नहीं हैं। इन सब के अर्थ में अंतर है।

सयुक्त क्रिया में “सकना और चुकना “जैसी रंजक क्रिया के रूप में प्रयुक्त होती ​है। वास्तव में ये रंजक क्रिया नहीं है। पर ये मुख्य क्रिया के साथ जुडकर क्रिया के सामथर्य का बोध कराती है। जैसे

  • रमेश यह काम कर सकता है। सामथर्य भाव
  • गीता मुबंई जा चुकी है।———प्रर्णता का भाव

रंजक क्रिया मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर अर्थ में विशेषता लाती है;

  • जैसे: माता जी बाजार से आ गई।

समासिक कियाएॅ:—

समासिक शब्द का अर्थ है—समास से बनने वाली ।
समासिक किया की रचना दो क्रियाओं के द्वंद्व समास से होती है।
जैसे
  •  चलना+ फिरना =चल—फिर, ———————-अब वह स्वस्थ है चल फिर सकती है।
  • आना+ जाना =   आ—जा, —————————उसका यहॉ आना जाना लगा रहता है।
  • गाना+ बजाना=   गा—बजा,—————————काम चलाने के लिए मै गा बजा लेता हॅू।
  • करना +कराना= कर —करा,——————— —काम पूरा कर करा लो फिर फिलम देखना।
समासिक क्रिया में दोनों क्रियाएॅ अपना अपना अर्थ बनाए रखती है। जबकि सयुंक्त क्रिया की दूसरी क्रिया अपना अर्थ छोड देती है। 
उदहारण के लिए:—
  • वह लिख् —पढ सकती है।
वाक्य  में लिख् —पढ सकती है। क्रिया का अर्थ है। कि वह लिख् भी सकती है और पढ भी सकती है
समासिक क्रिया के अन्य  उदहारण
  • उठना—- बैठना,
  • लेना—— देना,
  • हॅसना —–रोना
  • देख्नना— भालना,,
  • लेना—— देना
  • पीना—— पिलाना
  • करना —-कराना,
  • सोचना ——​विचारना आदि

नामिक क्रिया(Nominative Verb)

मूल सरंचना में संज्ञा सर्वनाम तथा विशेषण तीनों एक है। इसलिए संस्कृत अरचार्यों ने संज्ञा सर्वनाम तथा विशेषण तीनों  को “एक ही नाम “कहा था।
संस्कृत में संज्ञा सर्वनाम तथा विशेषण अर्थात नाम प्रत्यय जोड कर क्रिया के नए शब्द  बनाए जाते है। इन क्रियाओं का पहला हिस्सा नाम संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण होता है। अत: इन क्रियाओं को नामिक क्रिया कहा जाता है। इसी तरह हिंदी में भी संज्ञा,सर्वनाम तथा विशेषण में प्रत्यय जोडकर क्रियाएॅ बनाई जाती ​है।  लेकिन हिंदी प्रत्यय प्रधान भाषा नहीं है। अत: हिंदी में नामिक क्रियाओं के गिने चुने उदहारण है।
नामिक क्रिया का अर्थ:— संज्ञा सर्वनाम तथा विशेषण अर्थात नाम में  प्रत्यय जोडकर जो  क्रियाएॅ
बनाई जाती है। वे नामिक क्रियाएॅ कहलाती है।
संज्ञा, सर्वनाम तथा  विशेषण आदि शब्दों के आगे क्रियाकर (Verbalizer) लगाने से बनी क्रिया को नामिक क्रिया कहते हैं।
 शब्दनामिक क्रियाशब्दनामिक क्रियाशब्दनामिक क्रिया
संज्ञा शब्दझूठझूठलानालालच ललचाना
हाथ हथियाना
शरमशरमानाटक्कर
टकरानालाज
लजाना
तड़प तड़पानाबात बतियानागपगपियाना
सर्वनाम शब्दअपनाअपनाना------------------------
विशेषण शब्दचिकना चिकनाना
साठसठियाना
लंगडालगडाना

गरमगरमाना-----------------------------

मिश्र क्रिया(Mixed Verb)

 

नामिक क्रिया के अंतर्गत नाम संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण प्रत्यय जोड कर क्रिया  शब्द  बनाए जाते है।
—“प्रत्यय  प्रधान भाषा भाषा न होने के कारण हिंदी में प्रत्यय के स्थान पर नाम अर्थात संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण में क्रिया शब्द जोडकर क्रिया बनाना आरम्भ कर दिया जाता है। ऐसी क्रियाएॅ जो संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण में क्रिया शब्द जोडकर बनाई जाती हैं मिश्र क्रिया कहलाती है।”——-
मिश्र क्रिया का अर्थ :— जो क्रिया संज्ञा, सर्वनाम, ​विशेषणऔा क्रिया विशेषण  आदि के मिश्र रूप से बनती है। उन्हें मिश्र क्रिया कहते है।
उदहारण के लिए :—
  • मुझे तेज भूख लग रही है। इस वाक्य में केवल लगना ही क्रिया पर नहीं है। बल्कि पूरी रचना भूख लग रही है क्रिया है। इस तरह की क्रियाओं को मिश्र क्रिया कहा जाता है।
मिश्र क्रिया के अन्य उदहारण:
  • प्यार करना,
  • दान देना
  • नींद लगाना
  • प्यास लगना
  • गाली देना
  • दुआ देना
  • अच्छा लगना
  • अपना लगना
  • पराया लगना
  • दिखाई देना
  • दाखिल होना
  • सुनाई पड़ना आदि क्रिया-रूपों में देना, होना, पड़ना आदि क्रियाकर हैं। इन्हें  मिश्र क्रिया में  शमिल किया गया है।
मिश्र क्रिया  के अन्य प्रयोग
--------शब्द वाक्य
संज्ञा+ क्रियाप्यास लगना —बच्चे को पानी दो,उसे प्यास लगी है
----नींद लगना—मुझे नींद लगी है।, इसलिए सोने जा रहा हूॅ।
----प्यार करना— वह बच्चों से बहुत प्यार करती है।
----गाली देना—तुम उसे क्यों गाली दे रहे हो।
----तैयार करना—वह बच्चों को तैयार कर रही है।
सर्वनाम+ क्रियाअपना लगना—वह मुझे अपना लगता है।
विशेषण+ क्रिया
अच्छा लगना—
मुझे पढना बहुत अच्छा लगता है।
------बुरा लगना—उसे तुम्हारी बात बहुत बुरी लगी।
------खट्टा लगना —मुझे यह आम खट्टा लग रहा है।
-----भली लगना— वह लडकी देखने में भली लगती है।
मिश्र क्रिया के अंतर्गत पहला अंश संज्ञा, विशेषण या क्रियाविशेषण का होता है तथा दूसरा  भाग/अंश क्रिया का होता है।जैसे –
संज्ञा के रूप में  अंश वाली मिश्रक्रिया
  • मूलांश + क्रियाकर = मिश्रक्रिया
  • याद + आना = याद आना
  • भूख + लगना = भूख लगना
विशेषण के रूप में अंश वाली मिश्र क्रिया
  • मूलांश + क्रियाकर = मिश्रक्रिया
  • बुरा + लगना = बुरा लगना
  • सुंदर + दिखना = सुंदर दिखना
क्रियाविशेषण के रूप में अंश वाली मिश्र क्रिया
  • मूलांश + क्रियाकर = मिश्र क्रिया
  • बाहर + करना = बाहर करना
  • भीतर + करना = भीतर करना

समापिका तथा असमापिका क्रिया

समापिक क्रियाएॅ—— सरल वाक्य में जो क्रिया वाक्य को समाप्त करती है। और प्राय: वाक्य के अंत में लगती है। उसे समापिका क्रिया कहते है। उदहारण के लिए
  • सचिन खिलाडी है।
  • लडका पढता है।
  • मैं पत्र लिखूॅंगा

उपर्युक्त वाक्य में“पढता है,लिखूॅंगा” — क्रिया पद वाक्य के अंत में आए है इनका संबंध व्यााकरणिक कर्ता से है।

असमापिक क्रियाएॅ:—–-वाक्य में जो क्रिया के स्थान पर प्रयुक्त न होकर अन्य स्थान पर प्रयुक्त होती है। उसे असमापिक क्रिया कहते है। इन्हें कृंदती रूप भी कहा जाता है। यह क्रिया समापिक क्रिया के लिए निर्धारित स्थान पर पर प्रयुक्त नहीं हो सकती है। 
उदहारण
  • निशांत ने घर आकर भोजन किया।
  • बडों के कहने पर चलो।
  • म़ेज पर पडी किताब उठा लो।
  • पानी में बहते हुए बच्चा नदी में डूब रहा है।
  • कुरसी पर बैठे हुए मोहन ने बच्चे को उठा लिया।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि  इन सभी वाक्यों में आकर,बहते हुए, कहने पर,बैठे हुए,पडी ,क्रिया के साथ ते, ते हुए, कर, ए, ना आदि लगाकर असमापिका क्रिया कृंदत-रूप बनते हैं।
  • अपूर्ण कृंदत-रूप———— खिलता फूल,बहती नदी,चलती गाडी,आदि।
  • पूर्ण कृंदत-रूप———— बैठा आदमी, पका हुआ फल।
  • क्रियार्थक कृंदत-रूप————पढने के लिए।
  • पूर्वकालिक कृंदत-रूप———— बैठकर,खडे होकर आदि।
  • कृदंतीय संज्ञा क्रियार्थक संज्ञा —————टहलना उठना बैठना आदि।
  • कृदंतीय क्रिया विशेषण——————गिरते ही, बैठै बैठे ही आदि।
  • कर्तवाचक कृंदत-रूप————  भोगने वाला, बोलने वाला आदि।
  • तात्कालिक कृंदत-रूप———— आते ही, बैठते ही आदि।
इनका प्रयोग संज्ञा, विशेषण अथवा क्रिया-विशेषण रूप में होता है।
उदाहरण-
  • उसे खाना नहीं आता। …………………. संज्ञा
  • रोते बच्चे को मिठाई दो। ………………… विशेषण
  • वह समाचार सुनते ही चला आया। ………..क्रिया-विशेषण

प्रेरणार्थक क्रिया(Causitive Verb)

प्रेरणार्थक क्रिया का कर्ता कार्य को स्वंय न करके किसी अन्य  संज्ञा को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। उदहारण के लिए
  • मॉ ने बच्चे को सुलाया
—इस वाक्य में मॉ —बच्चा को सोने के लिए प्रेरित कर रही है।और उनकी प्रेरणा के फलस्वरूप ही बच्चा सोने का कार्य पूरा कर रहा है।
—-समान्यत: सभी क्रियाएॅ एक क्रिया कलाप वाली होती है।
जैसे——
  • चलना,फिरना, आना, जाना,लिखना आदि।

—लेकिन प्रेरणार्थक क्रिया के अंतर्गत एक से अधिक कार्यकलाप समाहित रहते है। 

उदहारण के लिए:—

सुलाना’  क्रिया के अर्तंगत दो कार्य  कलाप समाहित हैं—

  • एक बच्चे का सोना और दूसरा मॉ द्वारा बच्चे को सोने के लिए प्रेरित किया जाना।
इसी बात को  समझाने के लिए—— अन्य वाक्य
  • मॉ आया से बच्चे को दूध पिलवा रही है। इसमें पिलवाना क्रिया भी प्रेरणार्थक क्रिया है
इसमें तीन क्रिया कलाप समाहित है।
  • पहला— मॉ के द्वारा आया को प्रेरित किया जाना।
  • दूसरा—आया द्वारा बच्चे को प्रेरित किया जाना।
  • तीसरा— बच्चे के द्वारा दूध पिया एक जाना।
–अर्थत हम कह सकते है। कि ऐसी क्रिया जो एक संज्ञा को दूसरी संज्ञा  से कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। उन्हें प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।
प्रेरणार्थक क्रिया का अर्थ  :— वे क्रियाएॅ जिनकी क संज्ञा दूसरी संज्ञा को कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। तथा दूसरी संज्ञा प्रेरित संज्ञा मुख्य क्रियाकलाप को स्वंय पूरा करती है।वे प्रेरणार्थक क्रियाएॅ कहलाती है।
जैसे———,
  • पढवाना , लिखवाना , खिलवाना , सुनाना , पिलवाना , पिलवाता , पिलवाती आदि।

जिस क्रिया से कर्ता के स्वंय काम करने का बोध न होकर किसी अन्य व्यक्ति से कराएजाने का बोध होता है। उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते है।

सभी प्ररेणार्थक क्रिया सकर्मक होती है।

  • मोहन सोहन से काम करवाता है।
  • मॉं नौकरानी से बच्चे को दुध पिलवाती है।
प्रेरणार्थक क्रिया के अन्य उदहारण:———
मूल क्रियाप्रेरणार्थक क्रियामूल क्रियाप्रेरणार्थक क्रिया
पढ़नापढ़ाना/पढवानाहॅसनाहॅसाना/हॅसवाना
खानाखिलाना/खिलवानादौडनादौड़ाना/दौडवाना

विशेष

हिंदी में दो तरह की क्रियाएॅ हैं। कुछ प्रेरणार्थक क्रियाओं की रचनामूल क्रिया के मध्य में आ’ प्रत्यय— जोड़कर की जाती है तथा कुछ की वा—प्रत्यय  जोड़कर।
प्रेरणार्थक क्रिया के रूप
प्रेरणार्थक क्रिया के दो रूप हैं :
  • प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया
  • द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया

प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया

यह क्रिया प्राय: मूल सकर्मक क्रिया का भी काम करती है। दसके धातु रूप में आ जुडता है। जैसे

  • कराना— कराना
  • भुलना भुलाना
  • खेलना—खिलाना
  • पीना— ​पिलाना आदि।

द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया
इन क्रियाओं में धातु के बाद वा जुडता है। जैसे 

  • करना — करवाना
  • खिलाना— ,​खि्लवाना
  • पिलाना— पिलवाना आदि।
प्रेरणार्थक क्रिया में दो कर्ता होते हैं :
प्रेरक कर्ता—-  ऐसे कर्ता जो कार्य करने की प्ररेणा देते हैं। उन्हें  प्रेरक कर्ता कहते है।
अर्थात— प्रेरणादेने वाला ।
जैसे – मालिक, अध्यापिका,  अध्यक्ष आदि।
प्रेरित कर्ता  ——ऐसे कर्ता जो प्ररेणा ग्रहण करके कार्य करते हैं।  उन्हें प्रेरित कर्ता कहते है।
अर्थात —प्रेरित होने वाला अर्थात जिसे प्रेरणा दी जा रही है;
  • जैसे- नौकर, छात्र , चौकीदार ,क्लर्क आदि।

ध्यान देने योग्य बातें

  • सभी मूल क्रियाओं के दोनों प्ररेणार्थक रूप नहीं बनते है।
  • अकारांत क्रियाओं के केवल द्वितीय प्रेरणार्थक रूप ही बनते है,।
  • प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक-दोनों में क्रियाएँ एक ही हो रही हैं, परन्तु उनको करने और करवाने वाले कर्ता अलग-अलग हैं।
  • प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया प्रत्यक्ष होती है तथा द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया अप्रत्यक्ष होती है।
—-दो अक्षर वाली धातुओं में जब ऐ या ओ जोड़ दिया जाता है। जब दीर्घ स्वर को हस्व स्वर बना दिया जाता है।
जैसे :-
  • जीत – जिताना – जितवाना।
  • लेट – लिटाना – लिटवाना
–कुछ धातुओं में आवश्यकतानुसार प्रत्यय लगाए जाते हैं।
जैसे :-
  • जी – जिलाना – जिलवाना।
हिन्दी में प्रेरणार्थक क्रियाओं के दो रूप चलते हैं। प्रथम में ‘ना’ का और द्वितीय में ‘वाना’ का प्रयोग होता है-
  • हँसाना- हँसवाना।
प्रेरणार्थक क्रियाएँ सकर्मक और अकर्मक दोनों क्रियाओं से बनती हैं। ऐसी क्रियाएँ हर स्थिति में सकर्मक ही रहती हैं

प्रेरणार्थक क्रियाओं के कुछ अन्य उदाहरण

मूल क्रियाप्रथम प्रेरणार्थकद्वितीय प्रेरणार्थक
देनादिलानादिलवाना
धोना
धुलानाधुलवाना
रोना
रुलानारुलवाना
घूमनाघुमानाघुमवाना
पढ़नापढ़ानापढ़वाना
देखनादिखानादिखवाना
खानाखिलाना


खिलवाना
उठनाउठानाउठवाना
उड़नाउड़ानाउड़वाना
चलनाचलानाचलवाना
देनादिलानादिलवाना
जीनाजिलानाजिलवाना
लिखनालिखानालिखवाना
जगनाजगानाजगवाना
सोनासुलानासुलवाना
पीनापिलानापिलवाना

क्रिया के अन्य भेद

मुख्य क्रिया:—

अंग्रेजी में क्रिया का सम्मान रूप जहॉ लगाकर बनाया जाता है, आदि वहीं हिंदी में क्रिया का समान्य रूप क्रिया का सम्मान रूप क्रिया के अंत में प्रत्यय लगाकर बनाया जाता है। जैसे— आना, जाना, करना, रोना, हॅसना, लिखना, पढना आदि। अर्थात

हम कह सकते है कि—कर्ता या कर्म के मुख्य क्रिया कलापों को व्यक्त करने वाली क्रिया मुख्य क्रिया कहलाती है। जैसे—मैं प्राय: आ जाया करती हूॅ।————इसमें मुख्य क्रिया आ है।

ध्यान दे :—

क्रिया पदबंध की रचना दो प्रकार से होती है।

एक अंश तो वह है जो उस क्रिया पदबंध को मुख्य अर्थ प्रदान करता है।इसी को मुख्य क्रिया क​हा जाता है।

मुख्य क्रिया के अलावा जो भी शेष रह जाता है। उसे सहायक क्रिया कहते है।

उदहारण

  • लडकियॉ गाना गा रही है।——गा मुख्य क्रिया है।
  • वह हॅस रहा है।—————हॅस हॅसना  मुख्य क्रिया
  • रहा है। ———————सहायक क्रिया
  • आप जा सकते है।
  • जा जाना ———–मुख्य क्रिया है।
  • सकते है।———– सहायक क्रिया

 

सहायक क्रिया:—

क्रिया दिए गए वाक्यों में सोना क्रिया के चारों रूपों——  “सोता हूॅ, —“-सो रही है”—-, “सो सका” तथ “सो उगॉ”  में से यदि सो को अलग कर दिया जाए तो बचे  रूप —-” ता हूॅ ”  “रही है”   , “सका तथा उगॉ  “वे रूप हैं जो धातु में लगाकर क्रिया पद या क्रिया  पदबंध की रचना करते हैं व्याकरण में इन् रूपों को सहायक क्रिया कहा जाता हैं।

 

—–क्रिया पदबंध या क्रिया पद में से धातु को अलग करने के बाद जो अंश शेष बच जाता है उसे सहायक क्रिया कहते हैं।

—–हम कह सकते है। वाक्य में  क्रिया को छोडकर  क्रिया का जो भी अंश शेष रह जाता है। वह सहायक क्रिया का होता है।जैसे

  • चोर भाग गया है।
  • वह स्त्री रोने लगी ।
  • हम ये पुस्तक पढ चुकें है।

—-इन वाक्यों में मुख्य क्रियाऐं भाग पढ रोने के साथ गया चुके हैं लगी सहायक क्रियाएं जुडी है।  सहायक क्रियाएं वाक्य में दो प्रकार से होती है।

क्रिया के अर्थ की वशेषता बताती है।—जैसे वह चल पडा

  • इन वाक्यों में पडा सहायक क्रिया क्रिया के अर्थ में आकस्मिता की विशेषता बता रही है।
  • क्रिया के अर्थ में क्रिया का काल बताती है। इन वाक्यों में था सहायक क्रिया का काल बता रही है।

 

पूर्वकालिक क्रिया (Absolutive Verb)

जब कर्ता एक क्रिया को समाप्त करके दूसरी क्रिया करना प्रारम्भ करता है। तब पहली क्रिया को पूर्वकालिक क्रिया कहा जाता है। जैसे
राम भोजन करके सोया
यहॉं भोजन करके पूर्वकालिक क्रिया है,जिसे करने के बाद दूसरी क्रिया सो जाना सम्पन्न की है।
जैसे:
  • राम भोजन करके स्कूल जाता है।
  • राखी ने घर पहुँचकर फोन किया।
  • व्यक्ति ने भागकर बस पकड़ी।
  • छात्र ने पुस्तक से देखकर उत्तर दिया।
  • मैंने घर पहुँचकर चैन की साँस ली
नामधातु या बोधक क्रिया (Nominal Verb)- संज्ञा अथवा विशेषण के साथ क्रिया जोड़ने से
नाम बोधक क्रिया बनती ​है।
संज्ञा शब्द नामधातु क्रिया
संज्ञा शब्दनामधातु क्रिया
शर्म
शर्माना
झूठ
झुठलाना
लातलतियाना
दुखदुखाना
लोभलुभाना
बातबतियाना

सर्वनाम शब्द नामधातु क्रिया
सर्वनाम शब्दनामधातु क्रिया
अपनाअपनाना
विशेषण शब्द नामधातु क्रिया
विशेषण शब्दनामधातु क्रिया
साठसठियाना
तोतलातुतलाना
नरम
नरमाना
गरम
गरमाना
लज्जालजाना
लालचललचाना
फ़िल्मफिल्माना
अनुकरणवाची शब्द नामधातु क्रिया
अनुकरणवाची शब्दनामधातु क्रिया
थप-थपथपथपाना
थर-थर
थरथराना
कँप-कँप
कँपकँपाना
टन-टनटनटनाना
बड़-बड़बड़बड़ाना
खट-खटखटखटाना
घर-घरघरघराना

परसर्ग ने का क्रिया पर प्रभाव

 

अकर्मक क्रिया में संज्ञा का प्रत्यक्ष रूप सामने आता है। और सकर्मक क्रिया में कर्ता के साथ” ने “परसर्ग का प्रयोग होता है।— जैसे
  • मोहन गया————————  अकर्मक क्रिया
  • मोहन ने पत्र लिखा——— सकर्मक क्रिया
—-“ने” एक परसर्ग है। इसको वि​भन्न् विभक्ति चिह्न कहा जाता है। इसके प्रयोग से क्रिया में विकार आता है।
—-“ने” परसर्गका प्रयोग हिंदी,पंजाबी,गुजराती आदि भाषा की विशेषता है।  अन्य भाषा भाषी इसे छोड देते है। और क्रिया में अन्विति क्रिया से करते है।
जैसे——
  • हम खाना खाए—  हमने खाना खाया
  • राम खानाा खा चुका —राम ने खाना खा लिया।
  • मैं शेर से डर गया —शेर ने मुझे डरा दिया
  • वह हिम्मत नहीं हारा—— उसने हिम्मत नहीं हारी।

“ने “के संबंधी विशेषताएॅ

—“ने” का प्रयोग सदा क्रिया  के पूर्ण  पक्ष को दर्शाने के लिए किया जाता है।
जैसे——
  • सचिन ने गलती की। मोहन ने धमकी दी।
—समान्यत:पूर्ण वर्तमान काल के लिए चुका है सहायक क्रिया का प्रयोग होता है। परंतु ने परसर्ग लगने पर चुका है कि बजाय लिया है’ क्रिया रूप का प्रयोग होता है।
उदहारण
  • वह पुरस्कार ले चुका है। उसने पुरस्कार ले लिया है।
—“लाना  ,,,,भूलना” को छोडकर अन्य सकर्मक क्रियाओं के पूर्णपक्ष क्रिया रूप में जाने पर कर्ता में ने लगाया जाता है।
  • राम ने ​ही यह काम किया । किया है,किया था, किया होगा।
—“ने” वाले वाक्य में को जुड जाए तो क्रिया हमेशा पुल्ल्ंिग एकवचन में होगी। जैसे
  • मैने एक लडके को देखा ——— मैने एक लडकी को देखा
  • मैने कुछ लडकों को देखा ———मैने कुछ लडकियों को देखा
—खॉसना,, छीकना आदि क्रियाओं के साथ ने परसर्ग का प्रयोग होता है। जैसे
  • उसने जोर से छींका पिताजी ने खांसा
—भूल जाना समझ जाना आदि क्रियाओं में रंजक क्रिया — जाना के करण अकर्मक है।
इनके साथ ने नहीं लगता है। जैसे
  • हॅस देना ,रो देना