Sangya in Hindi

Sangya in Hindi

संज्ञा(Noun)

संज्ञा की परिभाषा(Defination of Noun )

” संज्ञा” और “नाम”  पर्याय शब्द है। जो शब्द संज्ञा के नाम का बोध कराते है। वह संज्ञा कहलाता है। निम्नलिखित उदहारणों के द्वारा संज्ञा को समझते है।

1).महेश कल आगरा जाएगाा
2).इस दीवार की उॅचाई कितनी है?
उपर्युक्त वाक्य में ‘महेश; किसी व्यक्ति का नाम है।
-‘आगरा’ स्थान का नाम है।
-‘दीवार’ किसी वस्तु का नाम है।
-‘ऊंचाई‘ से ऊंचे होने का बोध प्रकट होता है।

ये सभी पद संज्ञा है। संज्ञा पद का अर्थ ही —नाम ।

अर्थात हम कह सकते है। कि–संज्ञा को ‘नाम’ भी कहा जाता है। किसी प्राणी, वस्तु ,स्थान ,भाव आदि का ‘नाम’ ही उसकी संज्ञा कही जाती है ।

दूसरों शब्दों में– किसी का नाम ही उसकी संज्ञा है तथा इस नाम से ही उसे पहचाना जाता है। संज्ञा नहीं हो तो पहचान अधूरी है। और भाषा का प्रयोग भी बिना संज्ञा के सम्भव नहीं है।

सरल शब्दों में –संज्ञा  वे शब्द हैं जो किसी व्यक्ति प्राणी वस्तु स्थान भाव आदि के नाम के रूप में प्रयुक्त होते है।उन्हें संज्ञा कहते है। जैसे :-राकेश, घोडा, गंगा , हैदराबाद, सेब ,मेज, चौडाई ,बुढापा आदि ।

संज्ञा का अर्थ (Meaning of Noun)

जिन विकारी शब्दों से किसी व्यक्ति स्थान प्राणी गुण काम भाव  आदि का बोध होता है,उसे संज्ञा कहते है

अर्थात हम कह सकते है:-ऐसे शब्द जो हमें किसी व्यक्ति/ प्राणी (पशु पक्षियों) के नाम का, स्थान (Place-जगह) के नाम का, वस्तु(Things) के नाम, या किसी सजीव के भाव(Emotion) का ज्ञान या बोध कराए उसे संज्ञा कहते है। जैसेः

  •  व्यक्तियों/प्राणियों के नाम :- दीवान ,महिला, महात्मा गॉधी ,कर्मचंद गांधी ,पुतलीबाई ,मोर,घोड़ा, अनिल, किरण, जवाहरलाल, नेहरू आदि।
  •  स्थानों के नाम :- पोरबंदर, रियासत, देश, काठियावाड , कुतुबमीनार, नगर, भारत, मेरठ आदि
  • स्वतंत्रता  आंदोलन :- वीरता, बुढ़ापा, मिठास आदि
  • वस्तु (जाति) के नाम:- कार मिठाई गंगा गोमती

यहाँ ‘वस्तु’ शब्द का प्रयोग व्यापक अर्थ में हुआ है, जो केवल वाणी और पदार्थ का वाचक नहीं, वरन उनके धर्मो का भी सूचक है।

साधारण अर्थ में ‘वस्तु का प्रयोग इस अर्थ में नहीं होता। अतः वस्तु के अन्तर्गत प्राणी, पदार्थ और धर्म आते हैं। इन्हीं के आधार पर संज्ञा के भेद किये गये हैं।

संज्ञा पदों की  पहचान

निम्नलिखित लक्षणों आधार पर  संज्ञा पदों को  पहचाना जा सकता है। 

–कुछ शब्द प्राणिवाचक होते है। और कुछ शब्द अप्राणिवाचक होते है। जिनके द्वारा हम संज्ञा की पहचान कर सकते है।  उदहारण के लिए :

  •  प्राणिवाचक हैः–  बच्चा, भैंस ,चिडिया, राकेश ,आदमी, पिता, पुत्र आदि
  •  अप्राणिवाचक है:-किताब, मकान, रेलगाडी ,रोटी, पर्वत ,नदी, देश, गिलास  आदि 

– कुछ संज्ञा शब्दों की पहचान दो गणनीय रूपों में की जा सकती है।-जैसे की जिन संज्ञा शब्दों की गणना या गिनती की जा सकती है। उन्हें गणनीय संज्ञा कहते है जिन संज्ञा शब्दों की गणना या गिनती  नहीं की जा सकती है। उन्हें अगणनीय संज्ञा कहते है

 उदहारण के लिए :

  •  गणनीय संज्ञा  :- आदमी ,कुत्ता, गेंद, पुस्तक, केला की गणना की जा सकती है। इसलिए यह गणनीय संज्ञाएं है।
  •  अगणनीय संज्ञा  :- दूध  मिठास तेल हरियाली  पानी  हवा प्रेम की गणना नहीं  की जा सकती है। इसलिए यह अगणनीय संज्ञाएं है।
– संज्ञा पद के बाद परसर्ग कारक चिह्न ने को से  के लिए में पर आदि आ सकते है। जैसे :-
  • राम ने मोहन को लडकी के लिए चाकू से दिल्ली में उचॅाई पर आदि।
– संज्ञा  पद से  पूर्व विशेषण का प्रयोग हो सकता है। जैसे
  • छोटी कुरसी काला घोडा अच्छा लडका आदि ।
– परसर्ग या विशेषण न होने पर भी संज्ञा पद किसी व्यक्ति वस्त स्थान या भाव के नाम के कारण पहचाना जा सकता है।
उदहारण के तौर परः-
  • मोहन जाता है।
  • गरिमा फल खातीहै।

संज्ञा के कार्य(Function of Noun)

वाक्य में संज्ञा पद कर्ता कर्म पूरक करण अपादान अधिकरण आदि कई प्रकार की भूमिकाएॅ निभाते है। इन सभी कारकों का अपना अपना अलग महत्व होता है। इनको कुछ उदहारण के द्वारा समझते है।
  •  चित्रिशा खेल रही है। —कर्ता के रूप में
  • वह पुस्तक पढ रहा है। –कर्म के रूप में
  • सुरेश विद्यार्थी है। —- पूरक के रूप में
  • मैने चाकू से सेब काटा —कारण के रूप में

संज्ञा के भेद(Kind of Noun)

अध्ययन  की दृष्टि से मुख्य रूप से संज्ञा के तीन भेद होते है

1. व्यक्तिवाचक (Proper Noun )
2. जातिवाचक (Common Noun)
3. भाववाचक(Abstract Noun)
संज्ञा पाश्चात्य प्रभाव के कारण संज्ञा के दो अन्य भेद भी माने जाते है। –
4. समूहवाचक (Collective Noun)
5. द्रव्यवाचक(Material Noun)

मुख्य रूप से इन दोनो भेदों को जातिवाचक संज्ञा के अंर्तगत समाहित किया गया है या किया जा सकता है।

1).व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun in Hindi )

-जिस शब्द से किसी विशेष व्यक्तिए वस्तु या स्थान के नाम का बोध हो उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।

 उदहारण के तौर परः-   अकबर

  • विशेष प्राणियों के नामः- ऐरावत  (हाथी का नाम) कामधेनु (गाय कस नाम )आदि।
  • विशेष स्थानों के नामः- मुबई ,शहर, विशेष,  यूरोपीयन
  • विशेष वस्तुओं के नामः– चंदन, चंदमामा, रामचरितमानस, लोटस, टैंपल, महाभारत आदि।
  • विशेष दिशाओं के नाम. पूर्व, पश्र्चिम,   उत्तर ,दक्षिण ।
  • विशेष देशों के नाम. भारत, जापान, अमेरिका, पाकिस्तान,बर्मा।
  • विशेष राष्ट्रीय जातियों के नाम. भारतीय, रूसी, ,अमेरिकी,  एयूरोपी, इटेलियन, फ्रांसीसी
  • विशेष समुद्रों के नाम.  हिन्द महासागर, प्रशान्त महासागर,  भूमध्य सागर , काला सागर, दक्षिणी महासागर
  • विशेष नदियों के नाम. गंगा,  कृष्णा, कावेरी,  गोदावरी ,ब्रह्मपुत्र, बोल्गा, सिन्धु।
  • विशेष पर्वतों के नाम. हिमालय, विन्ध्याचल, अलृ कनन्दा, कराकोरम।
  • विशेष नगरों, चौकों और सड़कों के नाम. वाराणसी, गया, चाँदनी, चौक, हरिसन रोड, अशोक मार्ग।
  • विशेष पुस्तकों तथा समाचारपत्रों के नाम. रामचरितमानस, ऋग्वेद ,धर्मयुगए,इण्डियन नेशन, आर्यावर्त।
  • विशेष ऐतिहासिक युद्धों और घटनाओं के नाम.   1857 की क्रांति पानीपत की पहली लड़ाई, सिपाही-विद्रोह, अक्तूबर-क्रान्ति।
  • विशेष दिनों. महीनों के नाम.   सोमवार, मंगलवार, बुधवार,  अप्रैल , मई  ,अक्टूबर, नवम्बर
  • विशेष त्योहारों, उत्सवों के नाम. होली, दीवाली, रक्षाबन्धन, विजयादशमी।

2). जातिवाचक संज्ञा ((Common Noun in Hindi)):-

हम व्यक्ति किसी न किसी जाति या समुदाय का सदस्य होता है।  जैसे :

  • सूरदास राणा प्रताप प्रेमचंद आदि सभी शब्द व्यक्तियों के नाम है।
  • गांडीव तथा सुदर्शन वस्तुओं के नाम है
  • ऐरावत कामधेनु आदि प्राणियों के नाम हैं तथा
  • कानपुर तथा शिमला आदि स्थानों के नाम है।

अतः हम कह सकते हैः– वे शब्द जो किसी विशेष व्यक्ति ,वस्तु ,प्राणी ,स्थान आदि के वर्गों में आने वाली किसी न किसी जाति का बोध कराते है। जैसे :-

  • बच्चा, जानवर, नदी, अध्यापक, बाजार, गली, पहाड़, खिड़की, स्कूटर आदि शब्द एक ही प्रकार प्राणी, वस्तु और स्थान का बोध करा रहे हैं। इसलिए ये जातिवाचक संज्ञा है।

जो  संज्ञा शब्द किन्ही एक जैसे प्राणियों वस्तुओं या स्थानों का बोध कराते है। वे जाति वाचक संज्ञा शब्द कहे जाते हैं।

सरल शब्दों में – जिस  संज्ञा  शब्द या पद से किसी विशेष  एक जाति के सभी प्राणियों अथवा वस्तुओं का बोध हो,उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे :-आदमी, गाय, शेर, शहर, मेज, नदी, पहाड ,पुस्तक आदि

  • विशेष व्यक्तियों के नाम :- दुल्हन, पुरूष ,लडका, अध्यापक ,कवि आदि ।
  • विशेष स्थानों के नाम :- गॉव ,शहर, मोहल्ला ,पहाड ,बाजार, छत, देश, महाद्वीप ,मैदान, गली ,चौपाल  आदि ।
  • विशेष प्राण्यिां के नाम :-लंगूर, कौआ, हिरन, तोता ,मोर, मुरगा, चातक ,मछली, सॉप, आदमी, लडकी, महिला आदि।
  • विशेष वस्तओुं के नामः-कपडा ,खिलौना, पिज्जा, लैंप ,चौपड, चाट ,गोलगप्पा ,समोसा, चावल ,गेंहू ,तेल ,आटा ,कार साइकिल आदि ।
जाति वाचक संज्ञा के कुछ अन्य उदहारण ध्यान से समझते है।

उदहारण के लिए :- लड़का, पशु पक्षियों वस्तु, नदी, मनुष्य, पहाड़ आदि। जाति वाचक संज्ञा है।

  • लडका  :- राजेश, सतीश, दिनेश आदि सभी लडकों  का बोध होता है।
  • पशु पक्षियों :-  गाय, घोड़, कुत्ता आदि सभी जाति का बोध होता है।
  • वस्तु :-मकान, कुर्सी, पुस्तक, कलम आदि वस्तुओं का बोध होता है।
  • नदी:– गंगा ,यमुना, कावेरी आदि सभी नदियों का बोध होता है।
  • मनुष्य:-संसार की मनुष्य.जाति का बोध होता है।
  • पहाड़ :-कहने से संसार के सभी पहाड़ों का बोध होता हैं।
नोटः- अग्रंजी व्याकरण के प्रभाव से हिंदी के कुछ विद्ववानों  ने जतिवाचक संज्ञा के दो भेद मानते है। 
जतिवाचक संज्ञा :-शब्दों के अंर्तगत दो तरह के शब्द आते है।-
क.. वे  शब्द जो ‘समूह या समुदाय” का(Group) का बोध कराते है जैसे:-
  • -सेना, झुंड, भीड, सभा,  कक्षा, घोडा आदि तथा
ख… वे  शब्द जो  “द्रव्य पदार्थों”(Materials) का बोध कराते है जैसे :-
  • सोना, चॉदी, पीतल ,लोहा, गेहूॅ, चना, मक्का, लकडी, प्लास्टिक, सूट ,उन आदि ।

अत: जातिवाचक संज्ञा शब्दों के दो उपभेद किए जाते है।

क). समूहवाचक/ समुदायवाचक संज्ञा(Collective Noun)

जो जाति वाचक संज्ञा शब्द किसी समूह या समुदाय का बोध कराते है। समूहवाचक संज्ञा शब्द कहलाते है।-जैसे

  • कक्षा, पुलिस ,सेना ,दरबार, समाज ,भीड, टोली, सम्मेलन, सभा, बैठक आदि ।
दूसरें शब्दों में:-  जो संज्ञा शब्द  किसी एक व्यक्ति का वाचक न होकर समूह/समुदाय के वाचक होते हैऔर  इनमें उनके समूह का ज्ञान होता है उन्हें समूहवाचक/ समुदायवाचक संज्ञा कहते है।
जैसे
  • समिति, परिवार, ताश, आयोग, वर्ग ,अधिकारी, टी-सेट, आर्केस्टा आदि।

विशेष 

समूहवाचक संज्ञा शब्द में  एक से अधिक  सदस्य होते है। किंतु इन शब्दों का प्रयोग हमेशा एकवचन में होता है। जैसे कीः-

  • कक्षा समाप्त हो चेकी है।
  • गलत काम करने की अनुमति कोई समाज पहीं देता है।
  • पुलिस पहॅुचने वाली है।
  • सम्मेलन तीन दिन चलेगा
  • मेले में बहुत भीड है।
  • मैं बैठक में भाग नहीं लूंगा।

नोट. ये शब्द सजातीय प्रणियों/वस्तुओं के समूह को ईकाई के रूप में प्रकट करतें है। 

द्रव्य वाचक संज्ञा (Material Noun in Hindi):-

इस वर्ग में द्रव्य /पदार्थ का बोध कराने वाले जाति वाचक संज्ञा शब्द आते है। इनकी सबसे बडी पहचान यह है कि इन पदार्थों से तरह तरह की वस्तुंए बनाई जाती है। जैसेः-
  • प्लास्टिक से खिलौने
  • स्टील से बर्तन
  • अनाज से आटा
  • सोने चॅादी से आभूषण
  • लकडी से फर्नीचर
  • कागज से किताबें आदि बनाए जाते है।
अतः  सरल शब्दों में कह सकते है किः– द्रव्य पदार्थों वस्तुओं आदि का बोध कराने वाले जातिवाचक संज्ञा शब्द द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते है।जैसेः-
  •  ठोस पदार्थ   :- लकडी कोयला रबर पत्थर आदि ।
  •  धातुओं के नाम: -सोना चादी तॉबा लोहा उन आदि।
  •  द्रव पदार्थ :- तेल घी दही  शरबत चाय  पेप्सी आदि
  •  गैसीय पदार्थः- धुऑ आक्सीजन आदि ।
दूसरे शब्दों मेंः- किसी पदार्थ सामग्री या द्रव्य का बोध कराने वाले शब्दों को द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। जैसेः-
  • सोना चॉदी लकडी  चावल अन्न तेल आदि ।

नोट :- द्रव्यवाचक संज्ञाओं की गणना नहीं की जा सकती है। इन्हें नापा या तोला जाता है। 

3. भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun in Hindi)

कुछ संज्ञा शब्द किसी वस्तु या व्यक्ति के शील स्वभाव गुण दोष भाव अवस्था आदि जैसी सूक्ष्म स्थितियों का बोध कराते हैं ऐसे संज्ञा  शब्दो को भाववाचक संज्ञा शब्द कहते है। जैसे

  • प्यार सुंदरता सत्य असत्य जन्म मृत्यु ईमानदारी बेईमानी जवानी बुढापा लंबाई अच्छाई  बुराई सुख दुख घृणा क्रोध भय दया आदि ।

दूसरे शब्दों मे ंकिसी व्यक्ति या वस्तु के गुण-दोष शील स्वभाव धर्म अवस्था आदि का बोध कराने वाले शब्द भाववाचक संज्ञा शब्द कहलाते है। जैसे :-

  • कौआ प्यास से व्याकुल था।
  • मि़त्रता अनमोल है।
  • मन से  शत्रुता का भाव निकाल दों।
  • गरीबी एक अभिशाप  है।
इन वाक्यों में प्यास मित्रता और गरीबी शब्दों से व्यक्ति अथवा प्राण्ी के गुण दोष भाव दशा अवस्था स्वभाव आदि का बोध हो रहा है। अतः ये शब्द भाववाचक संज्ञा है।
सरल शब्दों में कह सकते है:-कि जिन संज्ञा शब्दों से प्राणियों  मनुष्यों और वस्तुओं  के  गुंण दोष स्वभाव अवस्था स्थिति कार्य भाव और दशा आदि का ज्ञान होता है उन्हें भाव वाचक संज्ञा कहते है। जैसे:-
  • ईमानदारी, उत्साह, मानवता, राष्टीयता, बचपन, चोरी, ममता, सहायता, मुस्कान, जीवन आदि ।
  • इन उदाहरणों में  उत्साह से मन का भाव है।
  • ईनानदारी से गुण का बोध होता है।
  • बचपन  जीवन की एक अवस्था या दशा को बताता है।

 अतः उत्साह, ईमानदारी, बचपन आदि शब्द भाववाचक संज्ञाए हैं।

नोट (1) :- भाव वाचक संज्ञाओं को देखा अथवा स्पर्श नहीं किया जा सकता है। इन्हें केवल अनुभव किया जा सकता है। जैसे मित्रता, सरदी ,गरमी, खुशी आदि ।

नोट(2):-भाव वाचक संज्ञाओं को केवल अनुभव किया जा सकता है। उदहारण के लिए इसका संबंध “भूख -प्यास” हो जाता है। इसे हम न तो देख सकते है। और न ही स्पर्श कर सकते है। इन्हें केवल अनुभव कर सकते है।

भाव वाचक संज्ञा शब्दों का वाक्यों में प्रयोग –
  • जवानी  बीती और बुढापा आ गया ।
  • किसी की बुराई-भलाई से दूर रहता है।
  • सुख दुख  मानव जीवन के दो पहिए हैं।
  • ईमानदारी की जिंदगी बेईमानी की जिंदगी से लाख बेहतर होती है।
  • भय और क्रोध  मनुष्य के सबसे बडे शत्रु हैं।
  • सत्य और अंहिसा के बल पर ही यह देश आजाद हो गए ।
हर पदार्थ का धर्म होता है। जैसेः-
  •  पानी में शीतलता
  •  आग में गर्मी
मनुष्य में देवत्व और पशुत्व इत्यादि का होना आवश्यक है।
जिस प्रकार  पदार्थ का गुण या धर्म पदार्थ से अलग नहीं रह सकता। घोड़ा है, तो उसमे बल है, वेग है और आकार भी है। व्यक्तिवाचक संज्ञा की तरह भाववाचक संज्ञा से भी किसी एक ही भाव का बोध होता है। श्धर्म, गुण, अर्थ और भाव प्रायः पर्यायवाची शब्द हैं। इस संज्ञा का अनुभव हमारी इन्द्रियों को होता है और प्रायः इसका बहुवचन नहीं होता।

संज्ञा के भेदों का परिवर्तन/ संज्ञा के विशिष्ट प्रयोग

व्यक्ति वाचक  जातिवाचक और भाववाचक संज्ञाएं कई बार एक दूसरे पर प्रयुक्त हो जाती है।
1. व्यक्ति वाचक संज्ञा  का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग :-  कभी-कभी जातिवाचक संज्ञाओं का प्रयोग व्यक्तिवाचक संज्ञाओं में होता है।  जैसेः-
  • जयचंदो के कारण ही भारत पराधीन हुआ था।
  • आज देश में रावणों की कमी नहीं है।
  • हरिश चंदों की सत्यवादिता और ईमानदारी से ही भारत का सम्मान बना हुआ है। 2
  • इस  देश को नटवरलालों ने ही देश के नेताओं ने भी ठगा है।

इन शब्दों/वाक्यों में जयचंद रावण हरिशचंद शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा है। यहॉ इनका प्रयोग जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग किया गया है। क्योंकि इन व्यक्तियों के नाम से उनके विशेष गुणों का बोध होता है।

जयचंद दशद्रोही के रूप में जाना जाता है   राजा  हरिशचंद अपनी सत्यवादिता या निष्ठा के लिए प्रसिद्ध है। रावण अपहरणकर्ता के रूप में कुख्यात है।  नटवर अपनी ठगी के लिए जाना जाता है। इन व्यक्तियों संज्ञाओं के बहुवचन रूप बना देने से जातिवाचक संज्ञा बन गए है।

 2).जातिवाचक संज्ञा का व्यक्ति वाचक संज्ञा के रूप में प्रयोगः

कुछ जाति वाचक संज्ञा शब्दों के अर्थ किसी  व्यक्ति विशेष के लिए रूढ हो जाते है। तब प्रयोग के स्तर पर उस सदंर्भ में वे व्यक्तिवाचक संज्ञा बन जाते है।

सरल शब्दों में:- कई बार जातिवाचक संज्ञा का प्रयोग व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग किया जाता है। 

वर्ग-1 जातिवाचक संज्ञावर्ग-2 व्यक्तिवाचक संज्ञा
1) पूजा के लिए पंडित जी को बुला लाओ1). पंडित जी देश के पहले प्रधानमंत्री बने।
2) सरदार के मरते ही सारी सेना भाग निकली।2). सरदार का नाम लौह पुरूष के रूप मे विख्यात है।
3)कल मंदिर मे महात्मा जी आए थे।3). महात्मा जी के कारण ही हमें आजादी मिली ।
इन वाक्यों में प्रयुक्त पंडित जी शब्द का प्रयोग ‘‘पंडित नेहरू‘‘ के लिए सरदार शब्द का प्रयोग सरदार‘‘ वल्लभ भाई पटेल‘‘ के लिए महात्मा जी शब्द का प्रयोग ‘‘ महात्मा गॉधी ‘‘ के लिए किया गया है। इस तरह इन वाक्यों के स्थूल शब्दों का प्रयोग यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग किया जाता है।

3). भाव वाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोगः

जब भाव वाचक संज्ञा  शब्दों का  बहुवचन के रूप में प्रयोग किया जाता है। तो वे जाति वाचक संज्ञा बन जाते है।
  • 1. जैसे-जैसे गरीबों  बढती जा रही है दिन-दहाडे चोरियॉ होने लगी है।
  • 2 बुराइयों से सदा दूर रहो।
  • 3 इस प्रकार की मूर्खताएॅ तुम्हें ले डूबेंगी।
  • 4. भाषा की विभिन्नताओे के बावजूद भारतवासी अभिन्न है।
  • 5. आजकल दूरिया बढती जा रही है। बादलों की गडगडाहटों से किसानों के हृदय झूम रहे है।
इन वाक्यों में आए शब्द चोरियॉ ,मूर्खताएॅ, भिन्नताओं ,दूरिया और गडगडाहटों जाति वाचक संज्ञा है।
ये भाववाचक संज्ञाओं चोरी बुराई मूर्खता भिन्नता दूरी और गडगडाहटों से बने हैं।

भाववाचक संज्ञाओं शब्दों की रचना

भाववाचक संज्ञाएं मुख्यतः दो प्रकार की होती है। कुछ भाववाचक संज्ञाएं मूल रूप में होती है। जैसे :-
  • सुख, दुख, प्रेम, घृणा, चिंता आदि ।
लेकिन कुछ भाववाचक संज्ञाए अन्य शब्दों से बनाई जाती है।
भाववाचक संज्ञाओं की रचना निम्न प्रकार से होती है।
1). जाति वाचक संज्ञाओं से
2) सर्वनाम से
3). विशेषण से
4). क्रिया से
5). अव्ययसे
1. जाति वाचक संज्ञाओं से भाववाचक संज्ञा बनाना
जातिवाचक संज्ञाभाववाचक संज्ञाजातिवाचक संज्ञाभाववाचक संज्ञा
शत्रु
शत्रुतामित्रमित्रता
मानवमानवताठगठग
सेवक सेवास्त्रीस्त्रीत्व
ईश्वरऐश्वर्यलडकालडकपन
आदमीआदयितामशिक्षकशिक्षा
देव
देवत्वसिंहसिंहत्व
पितापितृत्व बालबालपन
विद्वान विद्वताबच्चाबचपन
बूढाबूढापाजवानजवानी
पशुपशुताचोरचोरी

सर्वनाम से भाव वाचक संज्ञा

सर्वनामभाववाचक संज्ञासर्वनामभाववाचक संज्ञा
अपना.अपनापन//अपनावममममता/ ममत्व
निजनिजत्व, निजतापरायापरायापन
स्व
स्वत्वसर्वसर्वस्व
अहंअहंकारआप
आपा

विशेषण  से भाववाचक संज्ञा बनाना

विशेषण  भाववाचक संज्ञाविशेषण भाववाचक संज्ञा
मीठा
मिठासमधुरमधुरता
परतंत्रपरतंत्रताच्ंचल चंचलता
लोभी
लोभ सूक्ष्मसूक्ष्मता
डदासीन
उदासीनता सरल सरलता
कायरकायरताअमरअमरता
अच्छा
अच्छाईक्ंजूस क्ंजूसी
त्ीव्र
तीव्रता ल्ंबा लंबाई
अरूणअरूणिमाबुद्धिमानबुद्धिमता
काला
कालापन/ कालिमा कृतघ्नकृतघ्नता
स्पष्ट
स्पष्टताधवल धवलता
चलाकचालाकीस्वतंत्रस्वतंत्रता

क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाना

क्रियाभाववाचक संज्ञा क्रिया भाववाचक संज्ञा
ज्ीतना
जीतमरना मरण
देखना
दृष्टिजलना ज्लन
स्ुनना सुनाईहॅसनाहॅसी
थ्मलना
मेलउडनाउडान
मुस्कराना
मुस्कान लिखनालिखावट
सूझनास्ुझावथकनाथकावट
च्मकना

चमकघबरानाघबराहट
चिल्लानाचिल्लाहट गानागान
रहन सहन
रहन सहन चुननाचुनाव
फैलाना फैलावबुननाबुनाई
स्ींचना

सिंचाईखेलनाखेल
ब्हनाबहाव टिकनाटिकाव
बेलना
बोलढलनाढलान
गडगडाना
गडगडाहटरोनारूलाई
उभरना
उभारगुण गुणी
हारनाहारदौडनादौड

अव्यय से भाववाचक संज्ञा

अव्ययभाववाचक संज्ञाअव्ययभाववाचक संज्ञा
 खूबखूबीउपरउपरी
 समीप सामीप्यय भीतरभीतरी
निकटनैकट्यय   न्ीचे निचाई
बाहरबाहरी मनामनाही
शाबाशशाबाशीयपरस्पर पारस्पर्यय
दूरदूरी वाहवाह वाहवाही
ध्किधिक्कार
शीघ्र शीघ्रता

संज्ञा से विशेषण बनाना

संज्ञाविशेषणसंज्ञा विशेषण
अंत.अंतिम\ अंत्यअर्थआर्थिक
अवश्य आवश्यकअंशआंशिक
अभिमान.अभिमानीअनुभव.अनुभवी
इच्छा. ऐच्छिकइतिहास.ऐतिहासिक
ईश्र्वर.ईश्र्वरीयउपज.उपजाऊ
उन्नति.उन्नत कृपा.कृपालु
काम.कामी/ कामुककाल.कालीन
कुल.कुलीन
केंद्र. केंद्रीय
क्रम.क्रमिककागज.कागजी
किताब.किताबीकाँटा.
कँटीला
कंकड़.कंकड़ीला कमाई.कमाऊ
क्रोध.
क्रोधीआवास.
आवासीय
आसमान.आसमानीआयु.आयुष्मान
आदि.आदिमअज्ञान.अज्ञानी
अपराध.
अपराधी
चाचा. चचेरा
जवाब.जवाबीजहर.जहरीला
जाति.जातीय जंगल.जंगली
झगड़ा.
झगड़ालूतालु. तालव्य
तेल. तेलहा देश.देशी
दान.दानी
दिन.दैनिक
दया.दयालु

दर्द.दर्दनाक
दूध.दुधिया/ दुधार धन.धनी/ धनवान
धर्म.धार्मिक
नीति.नैतिक
खपड़ा.खपड़ैलखेल.खेलाड़ी
खर्च.

खर्चीला खूनखूनी
चुनाव.चुनिंदा/ चुनावीचारचौथा
गाँव.गँवारू/ गँवारगठनगठीला
गुणगुणी/ गुणवान
घरघरेलू
घमंड.घमंडीघाव.घायल
पेट
. पेटूप्यार.प्यारा
पुस्तक.पुस्तकीयपुराण.पौराणिक
पश्र्चिम. पश्र्चिमीपूर्व.पूर्वी
चुनाव.चुनिंदा/ चुनावीचार. चौथा
प्यास. प्यासापशु.पाशविक
प्रमाण.प्रमाणिक प्रकृति.
प्राकृतिक
पिता.

पैतृक प्रांत.प्रांतीय
बालक.बालकीयबर्फ. बर्फीला
भ्रम.भ्रामक/ भ्रांतभोजन. भोज्य
भूगोल.

भौगोलिकभारत.भारतीय
मन. मानसिकमास.मासिक
माह.माहवारीमाता.मातृक
मुख.
मौखिक नगर.नागरिक
नियम.

नियमितनाम.नामी/ नामक
निश्र्चय.निश्र्चितन्याय. न्यायी
नौ. नाविकनमक.नमकीन
पाठ.पाठ्य
पूजा.पूज्य/ पूजित
पीड़ा.

पीड़ितपत्थर.पथरीला
पहाड़.पहाड़ीरोग. रोगी
राष्ट्र. राष्ट्रीय रस.रसिक
लोक.लौकिक
लोभ. लोभी
वेद.


वैदिकवर्ष. वार्षिक
व्यापर.व्यापारिक विष.विषैला
विस्तार. विस्तृतविवाह.वैवाहिक
विज्ञान.वैज्ञानिकविलास.विलासी
समय.

सामयिकस्वभाव. स्वाभाविक
शास्त्र.शास्त्रीय साहित्य.साहित्यिक
विष्णु.वैष्णव शरीर. शारीरिक
सिद्धांत.सैद्धांतिकस्वार्थ.स्वार्थी
स्वास्थ्य. स्वस्थस्वर्ण.स्वर्णिम
रंग

रंगीन/ रँगीलारोजरोजाना
मैल. मैलामधु.मधुर
मामा. ममेरा मर्द.मर्दाना
साल.सालानासुख.सुखी
समाज.सामाजिक संसार.सांसारिक
स्वर्ग.स्वर्गीय/ स्वर्गिक
सप्ताह.
सप्ताहिक
समुद्र.सामुद्रिक/ समुद्रीसंक्षेप. संक्षिप्त
क्षण.क्षणिकहवा.हवाई
सुर.सुरीलासोना सुनहरा

क्रिया से विशेषण बनाना

क्रियाविशेषणक्रियाविशेषण
लड़ना.
लड़ाकू
भागना.भगोड़ा
लूटना.
लुटेरा भूलना. भुलक्कड़
पीना. पियक्कड़तैरना. तैराक
अड़ना.अड़ियलदेखना.दिखाऊ
जड़ना.जड़ाऊ
गाना.गवैया
पालना. पालतू
झगड़ना.झगड़ालू
टिकना.टिकाऊ
चाटना. चटोर
बिकना. बिकाऊ पकना.पका

संज्ञा के विकार/संज्ञा के व्याकरणिक कोटियॉ

संज्ञा एक विकारी पद है। इसका प्रयोग करते समय इसके रूपों में लिंग वचन और कारक के कारण विकार या परिवर्तन आ जाता है।

  •  लिंग
  • वचन
  • कारक

संज्ञा के व्याकरणिक कोटियॉ

संज्ञा का वह रूप जिससे इस बात का पता चलता है कि वह पुरूष वर्ग का है अथवा स्त्री वर्ग का व्याकरण में लिंग कहलाता है।

लिंग :- लिंग शब्द का समान्य अर्थ है- चिह्न या पहचान का साधन

पुरूष वर्ग के अंतर्गत आने वाले संज्ञा शब्द पुल्लि्ांग तथा स्त्री वर्ग के अर्तंगत आने वाले संज्ञा शब्द स्त्रीलिंग कहलाते है।    अत: हम कह सकते है कि:-लिंग संज्ञा का गुण है। 

अतः हर संज्ञा शब्द या तो पुल्लि्ांग होगा या स्त्रीलिंग । उदहारण के तौर परः-

  1.  लडका दौडता है।
  2. लडकी दौडती है।
  3. पंखा चल रहा है।
  4. घडी चल रही है।
इस प्रकार लिंग संज्ञा का वह लक्षण है जो संज्ञा के पुरूषवाची या स्त्रीवाची होने का बोध कराता है।
हिंदी में लिंग दो प्रकार के है
  • 1). पुल्लि्ग(Masculine Gender)  
  • 2).  स्त्रीलिंग(Feminine Gender)

पुल्लि्ांग का सन्धि विच्छेद :है- पुम्’ लिंग। पुम्’ लिंग में म् का अनुस्वार हो जाता है। अतः पुल्लि्ांग लिखना चाहिए।हिंदी में लिंग निर्धारणः-  इसके  लिए निम्न आधार ग्रहण किए गए है।

  • 1 रूप के आधार पर
  • 2 प्रयोग के आधार
  • 3 अर्थ के आधार पर
1). रूप के आधार पर :-रूप के आधार पर लिंग निर्णय का तात्पर्य हैः- शब्द की व्याकरणिक बनावट। शब्द की रचना में किन प्रत्ययोंं का प्रयोग हुआ है तथा शब्दान्त में कौन सा स्वर है- इसे आधार बनाकर लिंग निर्धारण किया जाता है।
1. पुल्लि्ांग शब्द
अकारांत अकारांत शब्द प्रायः . पुल्लि्ांग होते है।  जैसे –
  • राम सूर्य क्रोध समुद्र चीता  घोडा कपडा घोडा आदि ।
 वे भाववाचक संज्ञाए जिनके अन्त में त्व व य होता है। वे प्रायः  पुल्लि्ांग होती हैं गुरूत्व गौरव शौर्य आदि ।
 जिन शब्दों के अंत में पा पन आव आवा खाना जुडे होते है। वे प्रायः . पुल्लि्ांग होते है। जैसे –
  • बुढापा मोटापा बचपन घुमाव भुलावा पागलपन आदि ।
2. स्त्रालिंग शब्द
आकारांत शब्द प्रायः स्त्रालिंग होते है जैसे :-
  • लता, रमा, ममता ।
इकारांत शब्द भी प्रायः स्त्रालिंग होते है जैसे :-
  • रीति, तिथि, हानि, किंतु इसके अपवाद भी हैं
  • कवि , रवि, कपि पुल्लि्ांग है
ईकारांत शब्द  भी प्रायः स्त्रालिंग होते है जैसेः-
  • नदी  रोटी टोपी आदि। किंतु इसके अपवाद भी हैंः-
  • हाथी दही पानी पुल्लि्ांग है
आई इया आवट ता इमा प्रत्यय वाले शब्द भी स्त्रीलिंग होते है। जैसे :-
  • लिखाई डिबिया मिलावट घबराहट सुन्दरता महिमा आदि।
स्त्रीलिंग प्रत्यय
पुल्लि्ांग शब्द को स्त्रीलिंग बनाने के लिए कुछ प्रत्ययों का शब्द में जोडा जाता है। जिन्हें स्त्री प्रत्यय कहते है।
संस्कृत के स्त्री प्रत्यय उदहारण
संस्कृत के स्त्री प्रत्ययउदहारण
-आ छात्र-छात्रा    महोदय- महोदय
-आनीइन्द्र -इन्द्राणी    रूद्र -रूद्राणी
इका गायक- गायिक नायक.नायिक
-इनी यक्ष-यक्षिणी योगी-योगिनी
-ई कुमार- कुमारी  पुत्र पुत्री
-तीश्रीमान-श्रीमती भाग्यवान-भाग्यवती
-त्रीअभिनेता- अभिनेत्री नेता-नेत्री
-नीपति -पत्नी भिक्षु- भिक्षुणी
हिंदी के स्त्री प्रत्यय उदहारण
हिंदी के स्त्री प्रत्ययउदहारण
आइनाठाकुर- ठाकुराइन पंडित-पंडिताइन
आनीजेठ-जेठानी मुगल-मुगलानी
इनतेली-तेलिन धोबी-धोबिन
इयाबेटा-बिटिया लोटा- लुटिया
काका-काकी पोता -पोती
नीमेर-मोरनी  शेर-शेरनी
उर्दू के स्त्री प्रत्यय उदहारणआ माशूक- माशूका वालिद वालिदा

प्रयोग के आधार पर :-

प्रयोग के आधार पर  लिंग निर्णय के लिए संज्ञा शब्द के साथ प्रयुक्त विशेषण कारक चिह्न एंव क्रिया को आधार बनाया जाता है। जैसे
1). अच्छा लडका—अच्छी लडकी
 – लडका (पुल्लिंग) लडकी (स्त्रीलिंग)
2). राम की पुस्तक—राम का चाकू
 – पुस्तक (स्त्रीलिंग) चाकू (पुल्लिंग)
3). राम ने रोटी खाई-
  रोटी (स्त्रीलिंग)  क्रिया( स्त्रीलिंग)
4).राम ने आम खाया-
आम (पुल्लिंग़) क्रिया( पुल्लिंग)

3. अर्थ के आधार पर

कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से भिन्न होते है। उनका उचित और सम्यक प्रयोग करना चाहिए ।
1). आपकी महान कृपा होगी।
आपकी महती कृपा होगी ।
2). वह एक विद्वान लेखिका है।
वह एक विदुषी लेखिका है।
संज्ञा शब्दों का लिंग निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण तथ्य :
1). जीव जगत में  लिंग का भेद प्राकृतिक है किंतु भाषा में इस व्याकरण की दृष्टि से देखना अपेक्षित है।

2). हिंदी में बहुत से प्राणिवाचक संज्ञा  लिंग निर्धारण प्रायः उनके लिंग नर/मादा के आधार पर कर लिया जाता है। जैसे-

  •  बच्चा बच्ची नाई-नाईन  माली मालिन  चाचा चाची आदि।
3.) ऐसे प्राणि जिनमें लिंग के आधार पर अंतर करना संभव नहीं होता ’नर या मादा’ शब्द जोडकर अंतर किया जा सकताहै।जैसे –
  • नर भालू/ मादा भालू , नर मक्खी/मादा ेमक्खी आदि ।
4.) हिंदी में कुछ संज्ञा शब्दों का प्रयोग दोनों लिंगों  में किया जाता है। जैसे-
  • खिलाडी, मैनेजर, इंजीनियर, चपरासी ,वकील, मरीज ,मंत्री ,डाक्टर आदि।
5.) निर्जीव वस्तुओं जैसे-
  • मकान, खिडकी, पंखा, पानी, दूध, मेज, कुरसी ,सोफा ,पंलग ,घडी, चूल्हा, झाडू ,बिस्तर, चादर आदि  का लिंग निर्धारण प्रयोग के आधार पर किया जाता है

वचन :-

वचन शब्द वह रूप है। जिससे यह पता चले कि कोई संज्ञा शब्द एक ईकाई के रूप में ग्रहण किया जाएगा या एक से अधिक अथवा अनेक के रूप में। उदहारण के लिए:-
  •   बच्चा कुरसी मेज आदि एकवचन होने की सूचना दे रहे है।
  • जबकि किताबें बच्चें मेजे आदि एक से अधिक होने का बोध करा रहे है।

परिभाषा

वचन शब्द का अभिप्रायः संख्या से है। विकारी शब्दों के जिस रूप से उनकी संख्या एक या अनेक का बोध होता है। उसे वचन कहते है। उदहारण के लिए:-
1). लडका जाता है।
–लडके जाते है।
2).बच्चा सोता है।
–बच्चे सोते है। आदि एक से अधिक होने का बोध करा रहे है।

वचन का अर्थ

संज्ञा शब्द के जिस अंश रूप से यह ज्ञात होता है। कि:- वह एक ईकाइ के रूप में ग्रहण किया जाएगा या अनेक रूप में व्याकरण में वचन कहलाता है।
सरल शब्दों में :-वचन संज्ञा पदों का वह लक्षण है जो एक या अधिक का बोध कराता है जैसे :-
  • घोडा— घोडा
  • पुस्तक— पुस्तकें
  • नदी —नदियॉ ।

वचन के प्रकार

संस्कृत में तीन वचन है-
  • एकवचन
  • द्विवचन 
  • बहुवचन पर हिंदी में केवल दो ही वचन रह गए है।

एकवचनः-

संज्ञा शब्द के जिस रूप से किसी एक वस्तु पदार्थ या व्यक्ति के ज्ञान का बोध होता है। वह एकवचन कहलाता है। जैसे
  •  मेज, किताब ,कमरा, ताला, माला ,बोतल, दवाई ,ऑख, नाक ,कमीज ,बिल्ली ,कछुआ आदि ।

बहुवचन

संज्ञा शब्द के जिस रूप से एक से अधिक वस्तुओं पदार्थों और व्यक्तियों के ज्ञान का बोध हो वह बहुवचन कहलाता है जैसेः
  • -बालकों ,,मालाएं, बोतलें दवाइयॉ ,आखें, नाकें, कमीजें, बिल्लियॉ आदि।

वचन की पहचानः-

वचन की पहचान नि​म्नलिखित शब्दों से की जा सकती है।
1).संज्ञा शब्दों से
2). सर्वनाम शब्दों से
3). क्रिया शब्दों से
1संज्ञा शब्दों सेः-वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा शब्दों से एकवचन और बहुवचन की पहचान होती है।
  •  सोहन ने किताब खरीदी–( एकवचन)
  • सोहन ने किताबें खरीदी– (बहुवचन)
  •  लडकी के पास छाता है।–(एकवचन)
  • लडकियों के पास छाता है।—(बहुवचन)
  • पायल ने संतरा खाया –(एकवचन)
  • पायल ने संतरें खाए।–(बहुवचन)
2 सर्वनाम शब्दों से–
  •  वह आज नहीं आया । (एकवचन )
  • वे आज नहीं आए। ( बहुवचन)
  • मै दिल्ली जाउॅगा। (एकवचन )
  • हम सब दिल्ली जाएगें।( बहुवचन)
  • तुम मंदिर चले जाओ।(एकवचन )
  • तुम सब  मंदिर चले जाओ। ( बहुवचन)

3  क्रिया शब्दों से

  •  शेर जंगल में रहता है।–(एकवचन)
  • शेर जंगल में रहते है।—–( बहुवचन)
  •  बल्ब अचानक फयूज हो गया –(एकवचन)
  • बल्ब अचानक फयूज हो गए।–(बहुवचन)
  • खिलाडी मैदान से चला गया।– (एकवचन)
  • खिलाडी मैदान से गए—-।( बहुवचन)
वचन परिवर्तन  के उदहारण
  • लड़का खाता है. लड़के खाते हैं।
  • लड़की खाती है. लड़कियाँ खाती हैं।
  • एक लड़का जा रहा है. तीन लड़के जा रहे हैं।
इन वाक्यों में  लड़का शब्द एक के लिए आया है और लड़के एक से अधिक के लिए। लड़की एक के लिए और लड़कियाँ एक से अधिक के लिए व्यवहृत हुआ है। यहाँ संज्ञा के रूपान्तर का आधार श्वचनश् है। लड़का एकवचन है और लड़के बहुवचन में प्रयुक्त हुआ है।

कारक चिह्न

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम का संबंध क्रिया के साथ स्थापित करते है। उन्हें कारक चिह्न या परसर्ग कहते है। जैसे
  • – लडका किताब पढ रहा है।
  • – राम ने किताब पढी।
  • – राम ने नौकर को बुलाया।
  • – राम कलम से लिखता है।
  • – राम भाई के लिए कपडे लाया।
  • – उसने भाई को पैसे दिए।
  • – पत्ता पेड से गिरा।
  • – वह कमरे में सो रहा है।
इन वाक्यों में संज्ञाओं का क्रिया से संबंध बताने के लिए कुछ चिह्नों का प्रयोग किया गया है जैसे
  • ने ,को ,से ,के लिए, में आदि।
इन चिह्नों को कारक चिह्न या परसर्ग कहते है। इन्हें विभक्ति चिह्न भी कहा जाता है।