सर्वनाम- परिभाषा, अर्थ, भेद\प्रभेद, प्रयोग, आपस में अतंर – Sarvanam Ke Bhed

सर्वनाम

सर्वनाम  की परिभाषा(Defination of Pronoun)

’’ऐसे शब्द जो संज्ञा शब्दों के स्थान पर प्रयोग में लाए जाते हैं’’ उन्हें सर्वनाम कहते है।

ये शब्द किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा प्रयुक्त न होकर सबके द्वारा प्रयुक्त होते है। तथा कसी एक नाम न होकर सबका नाम न होकर सबका नाम होते है। मैं का प्रयोग सभी व्यक्ति अपने लिए करते है। अतः मै किसी एक का नाम न होकर सबका नाम अर्थात सर्वनाम है।

अतः हम कह सकते है- कि संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होकर संज्ञा का ही प्रकार्य करने वाले शब्दों को सर्वनाम कहा जाता है।

सर्वनाम का प्रयोग करके हम एक ही संज्ञा शब्द को बार बार प्रयोग करने से बचते हैं।

उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा हम सर्वनाम को समझते है-
’’गरिमा सुंदर लडकी है। गरिमा प्रतिदिन स्कूल जाती है। गरिमा के भाई का नाम धवल है। ’गरिमा के पिताजी जीवन बीमा निगम में काम करते हैं। गरिमा के सभी भाई प्यार करतें है।’’

उपर्युक्त गद्यांश में -’गरिमा’ संज्ञा शब्द का प्रयोग पॉच बार हुआ है यह बडा अटपटा-सा प्रतीत हो रहा है। इसलिए

इस गद्यांश को इस प्रकार लिखा जाना चाहिए था- गरिमा सुंदर लडकी है। वह प्रतिदिन स्कूल जाती है। उसके भाई का नाम धवल है। उसके पिताजी जीवन बीमा निगम में काम करते हैं। उसको सभी भाई प्यार करतें है। इस बार गरिमा शब्द एक बार ही आया है और उसके लिए ’वह’ उसके ’ उसको’ सर्वनाम का प्रयोग हुआ है।

इस प्रकार,

संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।- मै, तू, वह, आप, कोई, यह, य, वे, हम, तुम, कुछ, कौन, क्या, जो, सो, उसका आदि सर्वनाम शब्द हैं। अन्य सर्वनाम शब्द भी इन्हीं शब्दों से बने हैंए जो लिंगए वचन कारक की दृष्टि से अपना रूप बदलते हैं,

अतः हम कह सकते है- कि संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होकर संज्ञा का ही प्रकार्य करने वाले शब्दों को सर्वनाम कहा जाता है

सर्वनाम का अर्थ(Meaning of Pronoun)

 

सर्वनामः(Pronoun)– सर्वनाम का शाब्दिक अर्थ है-  सर्व’’ (सब)का नाम’’ यह दो शब्दों से मिलकर बना है।— सर्व $ नाम ।

अर्थात जो शब्द सबके नामों के स्थान पर प्रयुक्त होते है उन्हें सर्वनाम कहते है।

सरल शब्दों में सर्व सब नामों संज्ञाओं के बदले जो शब्द आते है उन्हें सर्वनाम  कहते है यानी संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते है। जैसे -मै तुम हम वे आप आदि शब्द सर्वनाम हैं।

नोट:-
सर्वनाम शब्द का प्रयोग संज्ञा शब्दों के पुनरावृति से बचने के लिए किया जाता है। अनुच्छेद में बार बार एक ही संज्ञा शब्द का प्रयोग करने से भाषा का सौंदर्य नष्ट हो जाता है। निम्नलिखित उदहारण द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है

  • दिल्ली एक ऐतिहासिक नगर है।
  • दिल्ली के इतिहास में भारत के इतिहास की झलक मिलती है।
  • दिल्ली की संस्कृति पर विभिन्न संस्कृतियों का प्रभाव पडा है।
  • दिल्ली भारत की राजधानी है।
  • दिल्ली में आधुनिक भारत की संस्कृति की छवि देखी जा सकती है।
  • एक ओर दिल्ली आधुनिकता की परिचायक है तो दूसरी ओर दिल्ली प्रदूषण रूपी कैंसर से ग्रसित/रोग ग्रस्त है।

उपर लिखित अनुछेद/उदहारण में दिल्ली शब्द बार बार प्रयोग करने से भाषा का सुंदरता नष्ट हो गई है। दिल्ली के स्थान पर सर्वनाम शब्दों का प्रयोग करने से भाषा का सौंदर्य प्रभावशाली हुआ है।

यथा- हम कह सकते है कि-

  • दिल्ली एक ऐतिहासिक नगर है।
  • इसके इतिहास में भारत के इतिहास की झलक मिलती है।
  • इसकी संस्कृति पर विभिन्न संस्कृतियों का प्रभाव पडा है।
  • यह भारत की राजधानी है। इसमें आधुनिक भारत की संस्कृति की छवि देखी जा सकती है।
  • एक ओर यह आधुनिकता की परिचायक है तो दूसरी ओर यह प्रदूषण रूपी कैंसर से ग्रसित/रोग ग्रस्त है।

दिल्ली के स्थान पर इसके इसकी यह इसमें यह सर्वनाम शब्दों का प्रयोग करने से उक्त अनुच्छेद पूर्णयता नया और प्रभावशाली रूप प्राप्त हुआ है।

विशेष

  • संज्ञा की अपेक्षा सर्वनाम की विलक्षणता यह है कि संज्ञा से जहाँ उसी वस्तु का बोध होता है, जिसका वह संज्ञा नाम है,
  • वहाँ सर्वनाम में पूर्वापरसम्बन्ध के अनुसार किसी भी वस्तु का बोध होता है।
  • लडका कहने से केवल लड़के का बोध होता है,
  • घर, सड़क आदि का बोध नहीं होता, किन्तु किन्तु ‘वह’  कहने से पूर्वापरसम्बन्ध के अनुसार ही किसी वस्तु का बोध होता है।

 

सर्वनाम के भेद /प्रभेद(Kind of Pronoun)

जिस तरह संज्ञा शब्द के अलग अलग तरह के प्रकार्य होते है। उसी तरह सर्वनाम शब्द के भी अलग अलग तरह के प्रकार्य होते है। अलग अलग प्रकार्य करने के कारण सर्वनामों के भी अलग अलग भेद हो जाते है। सर्वनाम शब्दों के निम्नलिखित भेद किए गए है-

सर्वनाम के छ: भेद होते है

  •  पुरुषवा चक सर्वनाम  (Personal pronoun)
  • निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative pronoun)
  • अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite pronoun)
  • संबंधवाचक सर्वनाम  (Relative Pronoun)
  • प्रश्नवाचक सर्वनाम  (Interrogative Pronoun)
  • निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun)

पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal pronoun)

जिन सर्वनाम शब्दों से व्यक्ति का बोध होता हैए उन्हें पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है

पुरूष वाचक -सर्वनाम व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त किए जाते है। इसका प्रयोग तीन रूपों में होता है। वार्तालाप की स्थितियों के अनुसार इसके ये रूप बनते है।

  •  वार्तालाप करते समय बोलने वाले व्यक्ति को वक्ता कहते है।
  •  जिससे वकता बात करता है। उसे श्रोता कहते है। यह दूसरा व्यक्ति है।
  • वक्ता श्रोता से जिस अन्य व्यक्ति के विषय में वार्तालाप करता है। वह तीसरा व्यक्ति है।

दूसरे शब्दों में. बोलने वाले, सुनने वाले तथा जिसके विषय में बात होती है, उनके लिए प्रयोग किए जाने वाले सर्वनाम पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।

वक्ता श्रोता तथा अन्य व्यक्ति के लिए भाषा में जिन सर्वनाम का प्रयोग किया जाता है। वे शब्द पुरूष वाचक ़सर्वनाम कहलाते है।

इन स्थितियों के आधार पर पुरूष वाचक सर्वनाम के तीन भेद है।

पुरुषवाचक सर्वनाम पुरुषों -स्त्री या पुरुष के नाम के बदले आते हैं।
जैसे.

  • मैं आता हूँ।
  • तुम जाते हो।
  • वह भागता है।

उपर्युक्त वाक्यों में श्मैं, तुम, वह, पुरुषवाचक सर्वनाम हैं ।

पुरुषवाचक सर्वनाम के प्रकार:-

पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते है.

  1. उत्तम पुरुषवाचक(First Person)
  2.  मध्यम पुरुषवाचक(Second Person)
  3. अन्य पुरुषवाचक(Third Person)

1-उत्तम पुरुषवाचक (First Person)

जिन सर्वनामों का प्रयोग बोलने वाला अपने लिए करता हैए उन्हें उत्तम पुरुषवाचक कहते है।
जैसे. मैं, हमारा, हम, मुझको, हमारी, मैंन, मेरा, मुझे आदि।

–उदाहरणः.

एकवचन-.

  • मैं एक विद्यार्थी है।…
  • मैंने इस साल सातवीं कक्षा पास की है।
  • मुझ में बहुत हिम्मत है।

बहुवचन

  • हम दिल्ली के रहने वाले है।
  •  मुझे क्रिकेट खेलना बहुत पंसद है।
  •  हमसे किसी का दुख देखा नहीं जाता है।
  •  मेरे लिए सब बराबर हैं।
  •  हमको अपना काम स्वंय करना चाहिए।
  •  पिताजी हमारे लिए कुछ लाए है।

 मध्यम पुरुषवाचक(Second Person)

वक्ता द्वारा श्रोता के नाम के स्थान पर जिन सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है। वे मध्यम पुरूष सर्वनाम कहलाते है। इस वर्ग में तू एकवचन तुम बहुवचन आप बहुवचन आदर सूचक तथा इनके विभिन्न रूप आते है।

ऐसे सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग सुनने वाले और पढनेवाले के लिए होता है। उन्हें मध्यम पुरूष कहते हैं।

जैसे. तू, तुम, तुम्हे, आप, तुम्हारेए तुमने, आपने आदि।

उदाहरण

  • तुम सो जाओ।
  • आप से यह काम नहीं हो पाएगा
  • आप इतना काम मत किजिए।
  • तुमको पहले बताना चाहिए था।
  • मै पत्र लिख रहा हूॅ।
  • तुमने गृहकार्य नहीं किया है।
  • तुम्हारे पिता जी क्या काम करते हैं घ्
  • तू घर देर से क्यों पहुँचा
  • घ्तुमसे कुछ काम है।

मध्यम पुरूष के सर्वनाम की स्थिति

यद्यपि संरचना के आधार पर मघ्यम पुरूष एकवचन सर्वनाम तू है पर प्रयोग के स्तर पर हिंदी में तू तुम तथा आप तीनों का ही एकवचन का प्रयोग किया जाता है।एकवचन में तू का प्रयोग अत्यंत निकटता की स्थिति में किया जाता है।

हिंदी में समान्यतः तुम तथा आप का प्रयोग एकवचन में किया जाता है।

आप सर्वनाम का प्रयोग आदर /सम्मान देने के अलावा औपचारिक स्थिति में अनजान लोगों के लिए किया जाता है। बहुवचन में इनके साथ लोग शब्द जोड दिया जाता है।

एकवचन का प्रयोग

  • मरिया! क्या तुम मेरे साथ चलोगी?
  • पिताजी! आप मेरे साथ चलेगें ?
  •  बहुवचन का प्रयोग
  • लडकियों ! तुम लोग रात को बाहर मत निकलना।
  • दोस्तों ! आप अपना अपना काम कीजिए।
  •  आप का प्रयोग

आदर्शनाथ मध्यम पुरूष के लिए भी होता है

  • आप आगे आ जाएं।
  • आप खाना खा लिजिए।
  • तू का प्रयोग

तु सर्वनाम का प्रयोग या तो समीपता आत्मीयता प्रकट करने के लिए आता है, निरादर और हीनता दिखाने के लिए आता है।

  • मॉ! तू जल्दी आ —- आत्मीयता
  • तू बडा दुष्ट है। —– निरादर

अन्य पुरुषवाचक (Third Person)

वक्ता या श्रोता किसी अन्य अनुपस्थित पुरूष या व्यक्ति के नाम के स्थान पर जिन सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है। वे अन्य पुरूष कहलाते है।

इस वर्ग में एकवचन के अंतर्गत वह तथा उसके विभिन्न रूप जैसे उसने उससे उसमें उसको उसके लिए आदि आते है
तथा बहुवचन के अंतर्गत वे विभिन्न रूप जैसे उनसे उन्होनें उसमें उनका उन पर उनके लिए आदि आते है

दूसरे शब्दों में :-ऐसे सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग वक्ता और श्रोता किसी अन्य के लिए के लिए करते है। उन्हें अन्य पुरुषवाचक कहते है।
जैसे. वे, यह, वह,इनका, इन्हें, उसे, उन्होंने, इनसे, उनसे आदि।

सरल शब्दों में जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किसी अन्य व्यक्ति के लिए किया जाता है,

उदाहरण.

  • वह गा रही है।
  • उसे बाजार भेजो।
  • उन्हें सम्नानित किया गया।
  • उनको चाय दे जाओ।
  • वे पढते पढते सो गए।
  • वे मैच नही खेलेंगे।
  • उन्होंने कमर कस ली है।
  • वह कल विद्यालय नहीं आया था।
  • उसे कुछ मत कहना।
  • उन्हें रोको मत, जाने दो।

निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative pronoun)

जिन सर्वनाम शब्दों से किसी वस्तु व्यक्ति या घटना का निश्चित बोध होता है। निश्चित बोध निकटवर्ती तथा दूरवर्ती दोनों ही वस्तुओं/व्यकितयों का हो सकता है।

  • हिंदी में समीप की वस्तुओं के लिए एकवचन में -यह तथा बहुचवन में -ये’ का प्रयोग किया जाता है।
  • दूर की वस्तुओं/व्यक्तियों के लिए एकवचन में -वह और बहुचवन में -वे का प्रयोग किया जाता है।

दूसरे शब्दों में -जिन सर्वनाम शब्दों से दूरवती अथवा समीपवर्ती व्यक्तियों प्रणियों वस्तुओं और घटनाओं का निश्चित बोध होता है। उसे निश्चियवाचक सर्वनाम कहते है। जैसे-

  • भाई मतिदास चौक वह है।
  • डबलरोटी उससे ले आओ।
  • वह सरकारी विद्यालय है।
  • हमारे हिंदी के अध्यापक वे
  • अटैचीकेस की चाबी है।
  • यह सीमा का मकान है।
  • सब्जियॉ उसमें पडी है।
  • इन वाक्यों में वह उसमें उससे और यह वह निश्चयवाचक सर्वनाम है।

यह और वह पुरूषवाचक सर्वनाम और निश्चयवाचक सर्वनाम दोनों है। इन दोनों में अंतर इस प्रकार किया गया है।

  •  शशांक मेरा भाई है वह मुबंई में रहता है।-पुरूषवाचक सर्वनाम
  •  यह किताग मेरी है, वह तुम्हारी है। – निश्चयवाचक सर्वनाम
  •  यह गीता की साईकिल है।- पुरूषवाचक सर्वनाम
  •  ये मेरे हथियार है। वे तुम्हारे आदमी है।_निश्चयवाचक सर्वनाम

अन्य शब्दों में कह सकते है– जो सर्वनाम शब्द संज्ञा के निश्चित होने का बोध कराएं उन्हें सर्वनाम कहते है। जैसे – यह वह वे आप उन्होनें उसका उसके उनके अपना आदि। जैसे:-

यह /ये और उनके रूप

  •  अध्यापक -पास में रखे कलम की ओर इशारा करते हुए राम! यह किसका है ?
  •  मिनी- मेज पर रखी मिठाई की ओर इशारा करते हुए मम्मी!यह कौन है?
  •  अध्यापिका -पास पडी झाडू की ओर इशारा करते हुए रामू! इसे यहॉ क्यों छोड दिया?
  • पिता – हाथ में पकडे हुए थैले की ओर इशारा करते हुए दीपा! इसमें से आम निकालकर फ्रिज में रख दो।

वह /वे और उनके रूप

  •  मॉ -दूर खडी साइकिल की ओर सकेंत करते हुए—- उसे कौन लेकर आया?
  •  पिताजी-छत पर खेल रहे बच्चों की ओर सकेंत करते —हुए वे छत पर क्या कर रहे हैं?
  • अध्यापक-दूर पडी कुरसियों की ओर इशारा करते हुए—-उन्हें यहॉ लेकर आओं

वाक्यों में इनका प्रयोग देखिए\

  • तनुज का छोटा भाई आया है। यह बहुत समझदार है।
  • किशोर बाजार गया थाए वह लौट आया है।

उपर्युक्त वाक्यों में यह और वह किसी व्यक्ति का निश्चयपूर्वक बोध कराते हैंए अतः ये निश्चयवाचक सर्वनाम हैं।

अनिश्चयवाचक सर्वनाम(Indefinite pronoun)

जब किसी व्यक्ति/वस्तु के बारे में यह निश्चित न हो कि वह व्यक्ति कौन है अथवा वह वस्तु क्या है तब जिन सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है वे अनिश्चिय वाचक सर्वनाम कहलाते है। अथवा

दूसरे शब्दों में –जिस सर्वनाम शब्द से किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध न होए उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते है। जैसे-कोई ,व्यक्ति के, लिए ,कुछ, वस्तु के लिए आदि

अनिश्चयवाचक केअन्य उदहारण

  • कोई आ गया तो क्या करोगे?
  • उसने कुछ नहीं लिया।
  • मम्मी किसी ने फूल भेज दिए।
  • मुझे भी कुछ खरीदना है।
  • घर में कोई घुसा था ।

उदहारण के लिए कुछ विशेष तथ्यः

कुछ- ही, कुछ- कोई, सब- कुछ , हर- कोई, कुछ -भी ,कुछ -कुछ –ये सभी अनिश्चय वाचक सर्वनाम में आते है

वाक्यों में इनका प्रयोग देखिए.

  • मोहन! आज कोई तुमसे मिलने आया था।
  • पानी में कुछ गिर गया है।

यहाँ  और व्यक्ति और वस्तु का अनिश्चित बोध कराने वाले अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं।

संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun)

संबंधवाचक का अर्थ है-सबंधं बताने/जोडने वाले

कुछ सर्वनाम मिश्रवाक्य के आश्रित उपवाक्यों को प्रधान उपवाक्य के साथ जोडने का कार्य करते हैं। इनको संबंधवाचक सर्वनाम कहते है। हिंदी के अंतर्गत “जो तथा जिसे” सर्वनाम आते है।

सरल शब्दों मे – दो उपवाक्यों का आपस में संबंध स्थापित करने वाले सर्वनाम शब्दों को संबंधवाचक सर्वनाम कहते है।

अन्य शब्दों में
– जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग वाक्य में आए दूसरे सर्वनाम शब्दों से संबंध प्रकट करने के लिए किया जाता है। उदहारण के लिए-

  • जो जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है।
  • वह पुस्तक दो जो गुरू जी ने दी थी ।
  • यह वही पैन है जिसे रोहित ने खरीदा था।
  • वे लोग नहीं आए जो नारे लगा रहे थे।
  • जिसने कभी झूठ न बोला हो मेरे साथ आए।
  • यह वही नदी है जिसमें निले साल बाढ आई थी ।

इन वाक्यों में जो-उसकी वह-जो और यह -जिसे शब्द संबंधवाचक सर्वनाम है। ये शब्द एक-दूसरे से संबंध बता रहे हैं।

दूसरे शब्दों में यदि वाक्य के पहले भाग में प्रयुक्त सर्वनाम शब्द का वाक्य के दूसरे भाग में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम शब्द के साथ संबंध दिखाई देता है। जैसे –

  • जो-सो’ जैसा-वैसा ’जिसकी-उसकी’ जो वो ’ आदि प्रयोग किया जाता है।
  • जैसा कहा था वैसा कर दिखाया।
  • जिसने आना था उसने मना कर दिया।
  • जैसी करनी वैसी भरनी।
  • जो नृत्य कर रही थी वह प्रिया की मैसी थी ।
  • जैसा बोया वैसा काटा ।

इन वाक्यों में आए सर्वनाम शब्द जैसा-वैसा जो-वह जिसने-उसने वह-जो जिसको -वह जैसा-वैसा संबंधबोधक सर्वनाम है।

वाक्यों में इनका प्रयोग देखिए.

  • जैसा करोगे, वैसा भरोगे।
  • जिसकी लाठी, उसकी भैंस।

उपर्युक्त वाक्यों में वैसा का सम्बंध जैसा  के साथ तथा उसकी का सम्बन्ध जिसकी  के साथ सदैव रहता है। अतः ये संबंधवाचक सर्वनाम है।

प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun)

प्रश्न पुछने के लिए जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किया जाता है। उन्हें प्रश्नवाचक कहा जाता है। अर्थात

हम कह सकते है। कि प्रश्न करने के लिए प्रयुक्त होने वाले सर्वनाम शब्दों को प्रश्नवाचक कहा जाता है। –

हिंदी में प्रश्नवाचक सर्वनाम “कौन”– व्यक्ति के लिए तथा “क्या”. “कौन-सा”, “कौन-सी “-वस्तु या घटना के लिए आदि ।

उदहारण के लिएः-

  • कल मेले में तुमने क्या खरीदा?
  • मेरे साथ कौन चलना चाहता है?
  • मुंबई में तम्हें कौन मिला था?
  • इन मकानों में से तुम्हें कौन-सा पसंद है?

सरल शब्दों में-सर्वनाम शब्द जिनसे किसी प्राणी वस्तु व्यक्ति और कार्य आदि के विषय में प्रश्न का बोध होता है। उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते है।

जो सर्वनाम शब्द सवाल पूछने के लिए प्रयुक्त होते हैए उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते है।जैसे. कौन, क्या, किसने आदि।

वाक्यों में इनका प्रयोग देखिए

  • कपडे कौन धो रही है?
  • नाना जी किसे बुला रहे हैं?
  • कूडा किसने फेंका था?
  • तुम्हें क्या चाहिए?
  • टोकरी में क्या रखा है।
  • बाहर कौन खड़ा है।
  • तुम क्या खा रहे हो

उपर्युक्त वाक्यों में क्या और कौन का प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए हुआ है। अतः ये प्रश्नवाचक सर्वनाम है।

नोट :-

  •  कौन किसने क्या किसे किससे और किनके प्रश्नवाचक सर्वनाम है
  •  कब कहां क्यों कितना कैसे आदि प्रश्नवाचक में नहीं आते है।
  •  कौन क्या प्रश्नवाचक में आते है।

निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun)

निजवाचक सर्वनाम का अर्थ है-“अपने लिए प्रयुक्त करना।”

यह दो शब्दों से मिलकर बना -निज +वाचक  जिसमें -निज का अर्थ होता है- “अपना” और ” वाचक” का अर्थ होता है— “बोध” ज्ञान कराने वाला अर्थात  निजवाचक का अर्थ हुआ”” अपनेपन का बोध कराना।

 

निजवाचक सर्वनाम शब्दों का प्रयोग वक्ता वाक्य के कर्ता के लिए करता है। निजवाचक सर्वनाम हैं- मैं ,स्वयं ,खुद ,अपने ,आप-, निजी आदि।

 

अर्थात हम कह सकते है कि– ऐसे सर्वनाम जिनका प्रयोग कर्ता अपने या स्ंवय के लिए करता है वे निजवाचक सर्वनाम कहलाते है। इसमें अपने -आप; स्वत; स्वय या खुद के लिए प्रयुक्त सर्वनाम है।

  • जैसे- यह कार्य मैं आप ही कर लूगॉ।

वाक्य में इनका प्रयोग

  • मैं यह काम स्वयं कर लूॅगा।
  • वह खुद आया था।
  • वह अपने आप आ जाएगा।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • ध्यान रहे कि यहॉ प्रयुक्त आप स्वंय के लिए प्रयुक्त है जो कि पुरूषवाचक मध्यम पुरूष आदरसूचक सर्वनाम आप’ से अलग है।
  • संज्ञा या सर्वनाम के बाद आप स्वयं खुद आए तो निज वाचक सर्वनाम है
  • संज्ञा व सर्वनाम का आपस में गहरा संबंध एक व्यक्ति के लिए दोनों शब्द प्रयुक्त किए जा सकते है

निजवाचक सर्वनामआप का प्रयोग निम्नलिखित अर्थो में होता है.

  • निज वाचक सर्वनाम में संज्ञा या सर्वनाम के अवधारणा/निश्चय के लिए किया जाता है
  • जैसे- मैं आप वही से आया हूॅ।
  • निजवाचक आप का प्रयोग दूसरे व्यक्ति के निराकरण के लिए भी होता है।
  • जैसे—-वह औरों को नहीं अपने आप को सुधार रहा है।
  • सर्वसाधारण के अर्थ में भी आप का प्रयोग होता है।
  • जैसे—- आप भला तो जग भला,
  • अपने से बड़ों का आदर करना
  • अवधारण केअर्थ में– कभी.कभी  आप के साथ ही जोड़ा जाता है।
  • जैसे. मैं,आप ही चला आता था,
  • यह काम आप ही कर लूँगा।
सर्वनाम और सर्वनामिक में अंतर

निश्चयवाचक सर्वनाम यह वह अनिश्चयवाचक सर्वनाम कोई कुछ तथा प्रश्नवाचक कौन क्या आदि सर्वनाम सर्वनामिक विशेषण के रूप में भी प्रयुक्त हो सकते है। अतः दोनों में अंतर समझना आवश्यक है।

ध्यान दे-

  •  यदि ये शब्द संज्ञा के स्थान पर आ रहे है। तो सर्वनाम होगें |
  • बहार कोई आया है? — अनिश्चयवाचक सर्वनाम|
  • कौन रो रहा है? —– प्रश्नवाचक सर्वनाम|

 

परंतु जब ये सर्वनाम किसी संज्ञा के पूर्व लगकर संज्ञा की विशेषता बताते है। तब सर्वनामिक विशेषण कहलाते है।

  • मैं यह पुस्तक लेना चाहता हूॅ — सर्वनामिक विशेषण
  • कोई लडका आया है।—- सर्वनामिक विशेषण
  • कौन लडकी रो रही है। — सर्वनामिक विशेषण

नोटः-

जब यह वह कोई कुछ जो सो अकेले आते है तो सर्वनाम होते हैं और जब किसी संज्ञा क साथ आने हैं तो विशेषण हो जाते है। जैसे-

  • यह आ गई। यह सर्वनाम है।
  • यह किताब कैसी है। यह विशेषण है।

सर्वनाम का अपना कोई लिंग विधान नहीं है। वाक्य में संज्ञा के लिए जिस लिंग का प्रयोग होता है। उसके लिए प्रयुक्त सर्वनाम के लिए भी उसी का प्रयोग होता है

सर्वनाम के लिंग की जानकारी क्रिया-रूपों से मिलती है
।जैसे–

  • कुत्ता घर में घुस आया है वह भौंक रहा है।
  • गीता के पैर में चोट आई है वह चल नहीं सकती ।
  • मध्यम पुरूष सर्वनाम तू एकवचन है। इसका प्रयोग अत्ंयत आत्मीयता घनिष्ठता अथवा निरादार का भाव दर्शाता है।
  • कौन सा सर्वनाम का प्रयोग प्रायःअप्राणिवाचक रूपों में होता है
  • जैसे आप कौन सा कमरा लेगें ?

कुछ सर्वनाम सयुंक्त सर्वनाम भी होते है जिनका प्रयोग: रूस के हिन्दी वैयाकरण डॉ० दीमशित्स “ने सर्वनाम के रूप में उल्लेख किया है जिन्हें सयुंक्त सर्वनाम कहा जाता है। यह प्रथम श्रेणी में आते है।  क्योंकि

  • यह सर्वनाम के बाकि भेदों से अलग है।
  • सयुंक्त सर्वनाम में एक शब्द नहीं बल्कि एक से अधिक शब्द आते है।

सयुंक्त सर्वनाम स्वतंत्र रूप से अथवा संज्ञा के साथ भी प्रयुक्त किए जाते है

उदहारण के लिए

  • जो कोई, सब कोई, हर कोई, और कोई, कोई और, जो कुछ, सब कुछ, और कुछ, कुछ और, कोई एक, एक कोई, कोई भी, कुछ एक, कुछ भी, कोई-न-कोई, कुछ-न-कुछ, कु-.कुछ, कोई-कोई इत्यादि।

सर्वनाम शब्दों की रूप रचना/सर्वनाम की कारक-रचना (रूप-रचना)

परसर्ग के कारण सर्वनाम का रूपांतरणः

पुरूषवाचक सर्वनामों के साथ परसर्ग लगने पर अधिकतर सर्वनामों में परिवर्तन हो जाता है।उसी प्रकार संज्ञा शब्दों की भाँति ही सर्वनाम शब्दों की भी रूप.रचना होती जिससे हम उनकी रचना में परिवर्तन ला सकते है।

क- अन्य पुरूष सर्वनाम ’’ यह वह वे ये ’’के साथ ’’ने’’परसर्ग लगने पर ये सर्वनाम क्रमशः उसने इसने उन्होनें रूपों में बदल जाते है।

ख – उत्तम पुरूष मध्यम पुरूष और अन्य पुरूष सर्वनामों के साथ को उपसर्ग लगने पर प्रायः अंतर आ जाता है। जैसे\

  • मै+ को -मुझको या मुझे।
  • वह+को – उसको या उसे।
  • तू+को – तुझको या तुझे ।
  • वे+को- उनको या उन्हें ।
  • तुम+को -तुमको या तुम्हें।
  • हम+को- हमको या हमें ।

इसी प्रकार से के लिए में पर आदि परसर्गां के लगने से मूल सर्वनामों में प्रायः अंतर होता है।

उत्तम पुरूष मध्यम पुरूष सर्वनामों के साथ ने परसर्ग लगने पर परिवर्तन नही होता है।

(‘मैं’ उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्तामैं, मैंनेहम, हमने
कर्ममुझे, मुझकोहमें, हमको
करणमुझसेहमसे
सम्प्रदानमुझे, मेरे लिएहमें, हमारे लिए
अपादानमुझसेहमसे
सम्बन्धमेरा, मेरे, मेरीहमारा, हमारे, हमारी
अधिकरणमुझमें, मुझपरहममें, हमपर

मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम ‘तू’, ‘तुम

कारकएकवचनबहुवचन
कर्तातू, तूनेतुम, तुमने, तुमलोगों ने
कर्मतुझको, तुझेतुम्हें, तुमलोगों को
करणतुझसे, तेरे द्वारातुमसे, तुम्हारे से, तुमलोगों से
सम्प्रदानतुझको, तेरे लिए, तुझेतुम्हें, तुम्हारे लिए, तुमलोगों के लिए
अपादानतुझसेतुमसे, तुमलोगों से
सम्बन्धतेरा, तेरी, तेरेतुम्हारा-री, तुमलोगों का-की
अधिकरणतुझमें, तुझपरतुममें, तुमलोगों में-पर

(‘वह’ अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्तावह, उसनेवे, उन्होंने
कर्मउसे, उसकोउन्हें, उनको
करणउससे, उसके द्वाराउनसे, उनके द्वारा
सम्प्रदानउसको, उसे, उसके लिएउनको, उन्हें, उनके लिए
अपादानउससेउनसे
सम्बन्धउसका, उसकी, उसकेउनका, उनकी, उनके
अधिकरणउसमें, उसपरउनमें, उनपर

(‘यह’ निश्चयवाचक सर्वनाम)

कारक


एकवचनबहुवचन
कर्तायह, इसनेये, इन्होंने
कर्मइसको, इसे ये, इनको, इन्हें
करणइससे इनसे
सम्प्रदान
इसे, इसको इन्हें, इनको
अपादान
इससेइनसे
सम्बन्धइसका, की, केइनका, की, के
अधिकरणइसमें, इसपरइनमें, इनपर

(‘आप’ आदरसूचक)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्ताआपनेआप लोगों ने
कर्मआपकोआपलोगों को
करणआपसेआपलोगों से
सम्प्रदानआपको, के लिएआप लोगों को, के लिए
अपादानआपसेआप लोगों से
सम्बन्धआपका, की, केआप लोगों का, की, के
अधिकरणआप में, परआपलोगों में, पर

(‘कोई’ अनिश्चयवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्ताकोई, किसनेकिन्हीं ने
कर्म
किसी कोकिन्हीं को
करणकिसी सेकिन्हीं से
सम्प्रदानकिसी को, किसी के लिएकिन्हीं को, किन्हीं के लिए
अपादानकिसी सेकिन्हीं से
सम्बन्धकिसी का, किसी की, किसी केकिन्हीं का, किन्हीं की, किन्हीं के
अधिकरणकिन्हीं का, किन्हीं की, किन्हीं के

(‘जो’ संबंधवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्ताजो, जिसनेजो, जिन्होंने
कर्मजिसे, जिसकोजिन्हें, जिनको
करणजिससे, जिसके द्वाराजिनसे, जिनके द्वारा
सम्प्रदानजिसको, जिसके लिएजिनको, जिनके लिए
अपादानजिससे (अलग होने)जिनसे (अलग होने)
संबंधजिसका, जिसकी, जिसकेजिनका, जिनकी, जिनके
अधिकरणजिसपर, जिसमेंजिनपर, जिनमें

(‘कौन’ प्रश्नवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्ताकौन, किसनेकौन, किन्होंने
कर्मकिसे, किसको, किसकेकिन्हें, किनको, किनके
करणकिससे, किसके द्वाराकिनसे, किनके द्वारा
सम्प्रदानकिसके लिए, किसकोकिनके लिए, किनको
अपादानकिससे (अलग होने)किनसे (अलग होने)
संबंधकिसका, किसकी, किसकेकिनका, किनकी, किनके
अधिकरणकिसपर, किसमेंकिनपर, किनमें

 

सर्वनाम के विकारी रूप

विभिन्न कारकों में प्रयुक्त होने पर सर्वनाम शब्दों के रूप परिवर्तित हो जाते है। सर्वनाम का प्रयोग सम्बोधन में नहीं होता है।
इसके विकारी रूप है- मैने मुझको मुझसे हमने हमको हमसे मेरा हमारा उसने उसको तुमने तुमको आपने आपको तुझे तुम्हारा तुमसे इसने इसको किसको आदि।

सर्वनामों का प्रयोग

कोई और किन्ही सर्वनामों का प्रयोग प्रणियों के लिए किया जाता है।

  • जैसे -कोई दौड रहा है।
  • किन्हीं से पुस्तक मंगवा लो।
  • नल से कोई पानी भर रहा है।
  • उनमें से किन्हीं दो ने झगडा किया था।

कुछ का प्रयोग कीडे मकोडों कीटाणुओं और निर्जीव के के लिए किया जाता है।

  • दीवार पर कुछ चल रहा है।
  • कुछ ओढकर ही सोना
  • दाल में कुछ काला गिर गया है।

मैं हम और तुम सर्वनाम के साथ रा री रे विभक्तियों का प्रयोग किया जाता है।

  • जैसे -मै- मेरा मेरी मेरे हम -हमारा हमारी हमारे तुम -तुम्हारा तुम्हारी तुम्हारे ।

कुछ सर्वंनाम शब्द दो बार प्रयुक्त होते है। इनका प्रयोग किसी कथन पर बल देने के लिए किया जाता है।

  • कुछ कुछ – रमा को मॉ के विषय में कुछ-कुछ याद है।
  • कहॉ-कहॉ – दिल्ली में कहॉ कहॉ घूमने जाएॅगें।
  • अपना-अपना- अपना-अपना कार्य करके ही घर जाना
  • कोई -कोई- कक्षा में कोई कोई पुस्तक लाया है।
  • किस -किस – चाकलेट किस किसको नहीं मिली।
  • जो-जो –जो-जो गृह कार्य करके लाए, हैं कापियॉ दे दो ।

 कई स्थानों का पर भिन्न- भिन्न सर्वनाम शब्दों कर साथ प्रयोग होता है।

  • जो कोई – जो कोई बोलगा वही पिटेगा।
  • हमारा-तुम्हारा आज से हमारा- तुम्हारा कोई संबंध नहीं रहा।
  • जो कुछ- आगरा से जो कुछ लाए हो दिखा तो दो।

सर्वनाम पद का व्याकरणिक परिचय

सर्वनाम पद का व्याकरणिक परिचय पद परिचय देते समय शब्द-भेद का नाम सर्वनाम का उपभेद पुरूष वचन लिंग और कारकीय संबंध बताना आवश्यक होता है।

सरल शब्दों में किसी वाक्य में प्रयुक्त सर्वनाम का पद परिचय देने के लिए पहले सर्वनाम का भेद लिंग वचन कारक एंव अन्य पदों से उसका संबंध बताना पडता है।

उदहारण

  1.  मैनें उन्हें पढने के लिए कहा।
  2.  दूध में क्या पडा है।
  3. वह मुझे कुछ देनेवाला है।
  4. चाय में कुछ पडा है।

इन वाक्यों में प्रयुक्त सर्वनामों का परिचय इस प्रकार होगा

  • मैनें – मैंने :पुरूषवाचक सर्वनाम, उत्तमपुरूष एकवचन कर्ता कारक कहा जाता है।
  • उन्हें- निश्चयवाचक सर्वनाम बहुवचन कर्मकारक कहा क्रिया का कर्म।
  • क्या-प्रश्नवाचक सर्वनाम एकवचन पुल्लिंग एकवचन कर्ता कारक देना क्रिया का कर्ता ।
  • वह- पुरूषवाचक सर्वनाम अन्यपुरूष पुल्लिंग एकवचन कर्ता कारक देना क्रिया का कर्ता
  • मुझे- पुरूषवाचक सर्वनाम उत्तमपुरूष एकवचन पुल्लिंग।
  • कुछ- अनिश्यवाचक सर्वनाम एकवचन ।

सर्वनाम के बारे में ध्यान देने योग्य बातें

लिंग के कारण पदों में कोई परिवर्तन नहीं होता अर्थात स़्त्री-पुरूष दोनों के लिए एक समान सर्वनामों का प्रयोग होता है। अतः किसी सर्वनाम पद का लिंग उसके साथ प्रयुक्त क्रिया रूप से जाना जाता है अथवा संज्ञापद से जाना जाता है जिसके स्थान पर उसका प्रयोग किया गया होः-
जैसे-

  • वह अर्थात रमेश जा रहा है।
  • वह अर्थात गीता जा रही है।
  • तू जा रहा है।तू जा रही है।

वह और यह का प्रयोग पुरूषवाचक निश्चयवाचक संकेतवाचक के लिए होता है। प्रंसगानुसार वाक्य में प्रयोग से ही की जा सकती है।

  • वह लिख रहा है। – पुरूषवाचक सर्वनाम
  • यह लिख रहा है।
  • वह रोहन की पुस्तक है।- निश्चयवाचक सर्वनाम
  • यह राम की पुस्तक है।