Shabd Vichar (शब्द विचार)

शब्द विचार(Morphology-Word)

आपसी  बातचीत अथवा विचारों के आदान प्रदान के समय हमारे मुख से अनेक प्रकार की ध्वनियॉ निकलती है। इन ध्चनियों के मेल से बने सार्थक ध्वनि समूह को शब्द कहते है। किंतु व्याकरण में केवल उन शब्दों पर विचार किया जाता है। जिनका सार्थक अर्थ होता है। जैसे :-

1 पारूल :-   प्+ आ+ र्+ उ+ ल्+ अ

2 राहुल :-   र् +आ +ह् +उ +ल् +अ

3 नाटक :-  न् +आ+ ट्+ अ+ क्+ अ

4 शुभांगी :- श् +उ +भ् +आ +ग्  +ई

 

शब्द ​विचार का अर्थ:- 

सरल शब्दों में कह सकते है कि— वर्णों के क्रमबद्ध और सार्थक समूह के मेल को शब्द कहते  है।

दूसरे शब्दों में    ध्वनियों के मेल से बने सार्थक वर्ण समुदाय को शब्द कहते है। इसे हम ऐसे भी कह सकते है. वर्णों या ध्वनियों के सार्थक मेल को शब्द कहते है।

अन्य शब्दों में  कह सकते हैदो या दो से अधिक वर्णो से बने ऐसे समूह को शब्द कहते है  जिसका  कोई न कोई अर्थ अवश्य हो।

शब्द ​विचार की परिभाषाएं:-

शब्द ​विचार की निम्नलिखित परिभाषाएं है।

1).शब्द की रचना विभिन्न ध्वनियों के मेल से होती है।

हर  भाषा की स्वर और व्यंजन ध्वनियॉ होती है। जिनके मेल से तरह तरह के शब्द बनते है। वर्ण विच्छेद के माध्यम से हम पता लगा सकते है कि किसी शब्द की रचना किन किन ध्वनियों के मेल से हुई है। प्रश्न यह उठता है। कि क्या कोई भी अन्य ध्वनि के साथ मिलकर किसी भी अनुक्रम में शब्द बना सकती है? नही, ’किताब’ शब्द में आई ध्वनि के यदि क्रम बदल दिए जाएॅ तो इस तरह से बनी रचनाएॅ हिंदी के शब्द नहीं होगेंजैसे :-

1 क् +आ+ त् +इ +ब्+ अ- कातिब इनको

2 त् +इ +क् +आ+ ब् +अ -तिकाब

3 ब्+ इ +त् +आ+ क् +अ – बिताक आदि ।

अर्थात ’किताब’ ’तिकाब’ और बिताक रचनाएॅ विभिन्न ध्वनियों से मिलकर बनी है।पर ये निरर्थक रचनाएॅ है। इनका कोई अर्थ नही है अतः ’शब्द’ नहीं कह सकते शब्द के लिए उसका सार्थक या अर्थवान होना अनिवार्य शर्त है। जो निरर्थक है उसे शब्द नहीं कह सकते

2). शब्द भाषा की अर्थवान या सार्थक ईकाई :-

शब्द के बारे में एक बात और ध्यान रखनी चाहिए कि वाक्यसे बाहर की इकाई होने के कारण शब्द एक स्वतंत्र इकाई है। वाक्य में प्रयुक्त होने पर शब्द वाकय के नियमों में बॅध जाता है। वाक्य से बाहर की इकाई होने के कारण शब्द का प्रयोग भाषा में स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है। शब्द कोश में शब्दों को इसीलिए स्थान दिया जाता हैकि , वे स्वतंत्र इकाई है।

3).शब्द भाषा की स्वतंत्र इकाई है।:-

विभिन्न ध्वनियों के मेल  से बनी अर्थवान एंव स्वंतत्र रचना शब्द कहलाती है। उपर्युक्त ध्वनि समूहों के मेल का एक सार्थक अर्थ है। अतः इस मेल से बने सभी शब्द ’सार्थक शब्द’ कहते है।

शब्द की प्रमुख विशेषताएॅ इस प्रकार है।

ऽ सभी शब्दों के वर्णों का एक निश्चित क्रम होता है।

ऽ शब्द भाषा की स्वतंत्र इकाई है।

ऽ  शब्द की रचना ध्वनियों के मेल से होती है।

ऽ  व्याकरण में हर या प्रत्येक शब्द का कोई ना कोई अर्थ अवश्य होता है।

ऽ  जो निरर्थक है उसे शब्द नहीं कह सकते।

ऽ  व्याकरण में केवल सार्थक शब्दों पर ही विचार किया जाता है निरर्थक शब्दों पर नहीं

ऽ शब्दों का वाक्यों में प्रयोग किया जा सकता है।

शब्द एवम् पद

शब्द की सत्ता वाक्य से बाहर है। अतः शब्द स्वतंत्र होता है। लेकिन शब्द जब वाक्य में प्रयुक्त होता है। तब वह शब्द नही कहलाता पद कहलाता पद कहलाता है। पद बनने की प्रकिया के अंर्तगत शब्द के साथ के साथ निम्नलिखित कार्य होते है-

 1). शब्द वाक्य के नियमों में बॅध जाता है उसकी स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है।

हर भाषा की सरचंना के अपने कुछ नियम होते हैं जो शब्द को ’पद’ में बदलने के लिए निम्नलिखित कार्य करते है।वाक्य में शब्द का स्थान वाक्य सरंचना के नियम तय करते हैवाक्य में कौन-सा शब्द किस स्थान पर आएगा।इसका निर्धारण उस भाषा की संरचना के नियमों द्वारा तय किया जाता है। उदहारण के लिए , हिंदी ं  की संरचना के अनुसार वाकय में पहले कर्ता फिर कर्म और अंत में क्रिया आते है जबकि अग्रेंजी में वाक्य में पहले कता फिर क्रिया और अंत में कर्म आते है।

हिंदी में   – लडकी खाना बना रही है।

अग्रेजी में –  the girl is cooking food

2).शब्द के रूप में परिवर्तन होता है

वाक्य में प्रयुक्त होने पर शब्द कोई  न कोई ऐसा प्रत्यय अवश्य लगता हैजो उसके रूप को परिवर्तित कर देता है। ऐसे प्रत्यय को रूप परिवर्तक या रूप साधक प्रत्यय कह सकते हैं रूप साधक प्रत्यय लगने के लगने से शब्द  के रूप में परिवर्तन मात्र होता है। उसकी कोटि नहीं बदलती है।  उदहारण के लिए

  • बच्चे ने किताब पढी । —- बच्चा  ए – (तिर्यटक) एकवचन सुचक प्रत्यय
  • हे बच्चों अपना अपना काम करो। — बच्चा ओ – सबोधन एकवचन सुचक प्रत्यय
  • बच्चो ने खाना नहीं खाया। —–बच्चा  ओ – (तिर्यक)  बहुवचन सुचक प्रत्यय

लेकिन हिंदी में निम्नलिखित प्रकार के वाक्य भी मिलते हैं जिनमें प्रयुक्त शब्दों में प्रत्यय नहीं देता, जैसे –

ऽ             बच्चा गिर गया।     —0        बच्चा शून्य प्रत्यय -सामान्य एकवचन सूचक प्रत्यय

ऽ             बच्चा काम कर रहा है।—-0बच्चा शून्य प्रत्यय-सामान्य एकवचन सूचक प्रत्यय

 

ऐसी स्थितियों के लिए आधुनिक भाषा विज्ञान ने ’शून्य प्रत्यय’ की संकल्पना की है। इसके अनुसार, यदि वाक्य में किसी शब्द में प्रत्यय दिखाई नहीं देता है। तो यह मानकर चलना चाहिए कि वहॉ ’शून्य प्रत्यय’ लगा हुआ है। ’शून्य प्रत्यय’ भी वही प्रकार्य होने करता है जो अन्य ’रूप परिवर्तन’ प्रत्यय करते है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि वाक्य में प्रयुक्त होने वाले शब्द में कोई न कोई ’रूप परिवर्तक प्रत्यय’ अवश्य लगेगा। भले ही वह शून्य प्रत्यय ही क्यों न हो। किस शब्द में कौन सा प्रत्यय लगेगा। यह उस के नियमों द्वारा तय किया जाता है

3).शब्द कोई ना कोई प्रकार्य अवश्य होता है।

जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होता है। तो वह कोई न कोई प्रकार्य अवश्य करता है। अर्थात वाक्य में प्रयुक्त सभी शब्द कर्ता, कर्म, विशेषण  क्रियाविशेषण ,अथवा क्रिया का प्रकार्य करते है। प्रकार्य के आधार पर ही शब्द की व्याकरणिक कोटि तय की जाती है। उदहारण के लिए

वाक्य 1. मेरे पिताजी बहुत बिमार है।

वाक्य 2. बच्चों के लिए खेलना जरूरी है।

वाक्य -1 में प्रयुक्त मेरे पद मूलतः सर्वनाम है। पर यहॉ ’मेरे’ पद ’पिताजी’ पद की विशेषता बताने का कार्य कर रहा है अतः सर्वनाम न होकर विशेषता का प्रकार्य कर रहा है। ऐसे विशेषण को इसीलिए ’सार्वनामिक  विशेषण कहा जाता है। इसी तरह वाक्य-2 में प्रयुक्त खेलना शब्द मूलतः क्रिया शब्द है, लेकिन वाक्य में संज्ञा का प्रकार्य करने के कारण ’संज्ञा पद’ बन गया है। ऐसे संज्ञा पदों को जो क्रिया से बने हैं, ऐसे संज्ञा पदों को जो क्रिया से बने है, क्रियात्मक संज्ञा कहते है।

शब्द और पद में अंतर

शब्द  और पद  दोनों को एक नहीं माना जाता है। इन दोनों में पर्याप्त अंतर होता है।

शब्द.

1.स्वतंत्र एवं सार्थक वर्ण समूह ’शब्द’ कहलाता है।

2 .शब्द स्वतंत्र होते है।

3.लडकी, रस्सा, कूदना , आदि शब्द है।

पद.

1.लेकिन शब्दों को जब वाक्य में प्रयुक्त किया जाता है, तो वह पद कहलाता है।

  1. पद वाक्य में व्याकरण के नियमों में बधें रहते है।
  2. वाक्य में प्रयुक्त करने पर इनका रूप इस प्रकार हो जाता है, लडकी रस्सा कुदती है। ’’

शब्द भण्डार

प्रत्येक भाषा  में शब्दों की सख्ंया असीमित होती है। हिंदी में भी अनेक प्रकार के असख्ंय शब्द है। इनमें में से बहुत से शब्द सस्ंकृत से , विभिन्न विदेशी भाषाओं से तथा हिंदी की बोलियों से आए है। इनके अलावा बहुत से  नए शब्दों का विकास किया है। कहने का तात्पर्य यही है। कि भाषा में तरह तरह शब्दों का भण्डार होता है। जिनका वर्गीकरण निम्न आधारों पर किया गया है।

शब्दों का वर्गीकरण :-

.शब्दों को पाचॅ आधारों पर वर्गीकृत किया गया है।

1).स्त्रोत या उत्पति के आधार पर(Based on source)

2).रचना के आधार पर (Based on construction)3

3).अर्थ के आधार पर(Based on meaning)

4).प्रयोग के आधार पर (Based on user)

5)..शब्द विकार के आधार पर(Based on words)

 

1).स्त्रोत या उत्पति के आधार पर

स्त्रोत’ शब्द की स्त्रोत अग्रेंजी के(Source)शब्द का तात्पर्य है जिसका अर्थ है-’उदगम स्थान’ शब्दों का स्त्रोत उस भाषा को  माना जाता है जिससे किसी शब्द की उत्पति हुई है। हिंदी के अनेक शब्दों का उदगम स्त्रोत संस्कृत है जो या तो  अपने मूल रूप में अथवा कुछ परिवर्तित होकर हिंदी में प्रयोग किए जाते है।

शब्द की उत्पति जिस भाषा से होती है वह भाषा उस ’’स्तोत्र-भाषा’कहलाती है।

  • तत्सम शब्द  ।
  • तद्भव शब्द ।
  • देशज शब्द  
  • विदेशी शब्द।
  • संकर शब्द ।

 

  तत्सम शब्द : जिन शब्दों की स्त्रोतभाषा ’संस्कतृ’ है, वे ’तत्सम शब्द ‘ कहलाते हैं तत्सम शब्द की रचना दो शब्दों से मिलकर हुई है-’’तत तथा सम ’’तत् का अर्थ है- उसके ‘तथा ’’सम’का अर्थ है-’समान’

अतः तत्सम शब्द का अर्थ होगा “उसकें समान” यहॉ उसके सर्वनाम का प्रयोग सस्ंकृत के लिए किया जाता है। अतः तत्सम शब्द का अर्थ है वह शब्द जो ’ संस्कृत के समान  है। वस्तुतः तत्सम शब्द वे शब्द होते हैं जो बिना किसी परिवर्तन के संस्कृत से हिंदी में आ गए हैं और आज भी उसी रूप में प्रयुक्त किए जाते है।

सरल शब्दों में कह सकते है- संस्कृत भाषा के वे शब्द जो हिन्दी में अपने वास्तविक रूप में प्रयुक्त होते है, उन्हें तत्समशब्द कहते है।  अग्नि, क्षेत्र, वायु, रात्रि, सूर्य आदि।

दूसरे शब्दों में.  सस्ंकृत के जो शब्द अपने मूल रूप में हिंदी में प्रयोग किए जाते है। उन्हें तत्समशब्द कहते है।जैसे -सर्प, मयूर, ग्राम, अग्नि, नृत्य, जिहा,  माता, विद्या, नदी, फल, पुष्प, पुस्तक, पृथ्वी, क्षेत्र, कार्य, मृत्यु  आदि ।

तत्समहिंदीतत्समहिंदी
आम्रआमगोमल ,गोमयगोबर
उष्ट्रऊॅंटघोटकघोड़ा
चंचुचोंचपर्यकपलंग
त्वरिततुरंतभक्त्तभात
शलाकासलाईहरिद्राहल्दी, हरदी
चतुष्पदिकाचौकीसपत्रीसौत
उद्वर्तनउबटनसूचिसुई
खर्परखपरा, खप्परसक्तुसत्तू
तिक्ततीताक्षीरखीर

 तद्भव शब्द :- तदभव शब्द -’तत तथा ’भव’ शब्दों के मेल से बना है। जिसका अर्थ है’–उससे हुए’ या उससे विकसित हुए’ अर्थात वे शब्द जो सस्ंकृत शब्दों से थोडे -बहुत परिवर्तन हुए हैं या उनके परिवर्तित रूप है। इन शब्दों को देखकर मूल रूप का पता लगाया जा सकता है।

दूसरे शब्दों में. :-संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द, जो बिगड़कर अपने रूप को बदलकर हिन्दी में मिल गये है  तद्भव शब्द कहलाते है। जैसे.आग –अग्नि, , खेत-क्षेत्र , रात –रात्रि  सूरज –सूर्य  आदि।

संस्कृततदभवसंस्कृततदभव
दुग्धदूधउच्च ऊँचा
हस्तहाथदिवसदिन
कुब्जकुबड़ाधैर्यधीरज
कर्पूरकपूरपंचपाँच
अंधकारअँधेरापक्षीपंछी
अक्षिआँखपत्रपत्ता
अग्निआगपुत्र बेटा
मयूर मोरशतसौ
आश्चर्यअचरजअश्रुआँसू
उच्चऊँचामिथ्याझूठ
ज्येष्ठजेठमूढ़ मूर्ख
कार्य काममृत्यु मौत
क्षेत्रखेतरात्रिरात
जिह्वा जीभप्रस्तर पत्थर
कर्ण कणशून्यसूना
तृणतिनकाश्रावण सावन
दंतदाँतसत्यसच
स्वप्न सपनास्वर्ण सोना

3).देशज या देशी शब्दः   देशज शब्द का अर्थ है- देश में जन्मा हुआ। देशज शब्द वे शब्द हैं जिनका स्तोत्र हिंदी की बोलियों तथा ग्रामीण अंचल है। अर्थात वे शब्द है।जो ग्रामीण क्षेंत्रों तथा बोली क्षेत्रों से हिंदी में आए हैं,देशज शब्द कहलाते है  ।जैसे अटकल,झकझक, भोंदू , झाडू, गडबड, ,झझट, भोंपु, लोटा, पगडी, खिडकी, थैला, डिबिया , ठोकर, थप्पड ,पेट, छोरा, बेटा पैसा, जूता, ढेर, रोटी आदि।

अर्थात हम कह सकते है कि–  जो शब्द क्षेत्रीय प्रभाव के कारण परिस्थिति व आवश्यकतानुसार बनकर प्रचलित हो गए हैं वे देशज कहलाते हैं। जैसे.पगड़ी ,गाड़ी,, थैला,, पेट,,,खटखटाना आदि।

दूसरे शब्दों में. जो शब्द देश की विभिन्न भाषाओं से हिन्दी में अपना लिये गये हैए उन्हें देशज शब्द कहते है।जैसे. चिड़िया, कटरा, कटोरा, खिरकी,जूता, खिचड़ी, पगड़ी, लोटा,डिबिया, तेंदुआ, कटरा, अण्टा, ठेठ, ठुमरी, खखरा, चसक, फुनगी, डोंगा आदि।

 

4 आगत, विदेशी या विदेशज. आगत शब्द का अर्थ है– आया हुआ। वे शब्द जो अरबी फारसी, तुर्की, अग्रेंजी, पुर्तगाली आदि विदेशी भाषाओं से हिंदी में आ गए हैं आगत या विदेशी शब्द कहलाते है।

अर्थात हम कह सकते हैकि- विदेशी जातियों के संपर्क से उनकी भाषा के बहुत से शब्द हिन्दी में प्रयुक्त होने लगे हैं। ऐसे शब्द विदेशी अथवा विदेशज कहलाते हैं। जैसे.स्कूल, अनार, आम, कैंची,अचार, पुलिस, टेलीफोन, रिक्शा आदि। ऐसे कुछ विदेशी शब्दों की सूची नीचे दी जा रही है।

 

अंग्रेजी. कॉलेज, पैंसिल, रेडियो, टेलीविजन,  डॉक्टर,, लैटरबक्स, पैन, टिकट, मशीन, सिगरेट, साइकिल, बोतल, बुक, स्टेशन, कार,  स्कूल, कंप्यूटर, ट्रेन, सर्कस, ट्रक, टेलीफोन, टिकट, टेबुल इत्यादि।

फारसी. अनार, चश्मा,  जमींदार,    दुकान, दरबार,  नमक, नमूना, बीमार,,  बरफ, रूमाल, आदमी,  चुगलखोर, गंदगी ,चापलूसी आदि।

अरबी. —-औलाद,  अमीर, कत्ल, कलम, कानून, खत, फकीर, रिश्वत, औरत, कैदी, मालिक, गरीब , असर, किस्मत, खयाल, दुकान, औरत, जहाज, मतलब, तारीख, कीमत, अमीर, औरतए, इज्जत,  इलाज,  वकील,  किताब,  कालीन,  मालिक, गरीब, मदद इत्यादि आदि।

तुर्की— . कैंची, चाकू, तोप, बारूद, लाश, दारोगा, बहादुर,  काबू, तलाश, चाकू, बेगम इत्यादि।

पुर्तगाली. —अचार, आलपीन, कारतूस, गमला, चाबी, तिजोरी, तौलिया, फीता, साबुन, तंबाकू, कॉफी, कमीज, अलमारी, बाल्टी, फालतू,  तौलिया इत्यादि।

 फ्रांसीसी. —पुलिस, कार्टून,  इंजीनियर, कर्फ्यू, बिगुल आदि।

चीनी—. तूफान,  लीची , चाय,  पटाखा आदि।

यूनानी. टेलीफोन, टेलीग्राफ, ऐटम डेल्टा

जापानी. रिक्शा आदि।

इनमें फारसी, अरबी,  तुर्की, अँगरेजी, पुर्तगाली और फ्रांसीसी भाषाएँ मुख्य है। अरबी, फारसी और तुर्की के शब्दों को हिन्दी ने अपने उच्चारण के अनुरूप या अपभ्रंश रूप में ढाल लिया है

फारसी शब्द

पैदावार, ,पलक, पुल, पारा, पेशा, पैमाना, बेवा, बहरा, बेहूदा, बीमार, बेरहम, मादा माशा, मलाई, मुर्दा मजा,,मुफ्त मोर्चा, मीना, मुर्गा मरहम, याद, यार, रंग, रोगन, राह, लश्कर, लगाम, लेकिन, वर्ना, वापिस, शादी, शोर, सितारा, सितार, सरासर, सुर्ख, सरदार, सरकार, सूद,सौदागर, हफ्ता, हजार, अफसोस, आबदार, आबरू, आतिशबाजी, अदा, आराम, आमदनी, आवारा, आफत, आवाज, आइना, उम्मीद, कबूतर, कमीना, कुश्ती, कुश्ता, किशमिश, कमरबन्द, किनारा, कूचा, खाल, खुद, खामोश, खरगोश, ,खुश, खुराक, खूब, गर्द, गज, गुम, गल्ला, गवाह, गिरफ्तार, गरम, गिरह, गुलूबन्द, गुलाब गुल,  चाबुक, चादर, चिराग, चश्मा, चरखा, चूँकि, चेहरा, चाशनी, जंग, जहर, जीन, जोर, जबर, जिन्दगी, जादू, जागीर, जान, जुरमाना, जिगर, जोश, तरकश, तमाशा, तेज, तीर, ताक तबाह, तनख्वाह, ताजा, दीवार, देहात, दस्तूर, दुकान, दरबार, दंगल, दिलेर, दिल, दवा, नामर्द, नाव, नापसन्द, पलंग,  इत्यादि।

अरबी शब्द

दुनिया, दौलत, दान, दीन, नतीजा, नशा, नाल, नकद, नकल, नहर, फकीर, फायदा, फैसला, बाज, बहस ,बाकी, मुहावरा, मदद,मरजी, माल, मिसाल, मजबूर, मालूम, मामूली, मुकदमा, मुल्क, मल्लाह, मौसम, मौका, मौलवी, मुसाफिर, मशहूर, मजमून, मतलब, मानी, मान, राय, लिहाज, लफ्ज, लहजा, लिफाफा, लायक, वारिस, वहम. वकील. शराब. हिम्मत. हैजा. हिसाब. हरामी. हद. हज्जाम. हक, हुक्म, हाजिर, हाल, हाशिया, हाकिम, हमला, हवालात, हौसला, अदा, अजब, अमीर, अजीब, अजायब, अदावत, अक्ल, असर, अहमक ,अल्ला, आसार, आखिर आदमी, आदत, इनाम, इजलास, इज्जत, इमारत, इस्तीफा, इलाज, ईमान, उम्र, एहसान, औरत, औसत, औलाद, कसूर, कदम, कब्र, कसर, कमाल, कर्ज, क़िस्त, किस्मत, किस्सा, किला, कसम, कीमत, कसरत, कुर्सी, किताब, कायदा, कातिल, खबर, खत्म, खत, खिदमत, खराब, खयाल, गरीब, गैर, जिस्म, जलसा, जनाब, जवाब,जहाज, जालिम, जिक्र, तमाम, तकदीर, तारीफ, तकिया, तमाशा, तरफ, तै, तादाद, तरक्की, तजुरबा, दाखिल, दिमाग, दवा, दाबा, दावत, दफ्तर, दगा, दुआ, दफा, दल्लाल, दुकान, दिक इत्यादि।

ऽतुर्की शब्द

आगा आका, उजबक, उर्दू, कालीन, काबू, कैंची, कुली, कुर्की, चिक, चेचक, चमचा, चुगुल, चकमक, जाजिम तमगा, तोप, तलाश, बेगम, बहादुर, मुगल, लफंगा, लाश, सौगात,   सुराग ,,तुर्क, कुरता, कलगी ,गलीचा, मुचलका, चाकू, तमगा, ताश, तोपची, दारोगा, बावर्ची, , चम्मच, बारूद, नागा, कुर्ता ,कूच, गनीमत, चोगा  , खच्चर  इत्यादि।

अंग्रेजी शब्द  तथा ऐशियाई एवम् यूरोपीय भाषाओं से आए शब्द   :- लाइसेंस दीगर आॅटों ग्लास मास्टर शूज तोप बूट हॉस्पीटल इन्सपेक्टर प्रिंसिपल टीचर स्लेट    डायरी  पेस्ट पार्टी डिग्री कैसेट माउस डॉक्टर टेलीफोन स्कूल कॉलेज टाई चॉकलेट बिस्किट रेडियो कैमरा कार कंप्यूटर लाइ रेल पेस्ट्री टे्रन स्वेटर सिगरेट बैंक इत्यादि

 

इनके अतिरिक्तए हिन्दी में अँगरेजी के कुछ तत्सम शब्द ज्यों.के.त्यों प्रयुक्त होते है। इनके उच्चारण में प्रायः कोई भेद नहीं रह गया है। जैसे. अपील, आर्डर, इंच, इण्टर, इयरिंग, एजेन्सी, कम्पनी, कमीशन, कमिश्रर, कैम्प, क्लास, क्वार्टर, क्रिकेट, काउन्सिल, गार्ड, गजट, जेल, चेयरमैन, ट्यूशन, डायरी, डिप्टी, डिस्ट्रिक्ट, बोर्ड, ड्राइवर, पेन्सिल, फाउण्टेन, पेन, नम्बर, नोटिस, नर्स, थर्मामीटर, दिसम्बर, पार्टी, प्लेट, पार्सल, पेट्रोल, पाउडर, प्रेस, फ्रेम, मीटिंग, कोर्ट, होल्डर, कॉलर इत्यादि।

अंग्रेजी (तत्सम)तद्भवअंग्रेजी (तत्सम)तद्भव
ऑफीसरअफसर थियेटर थेटरए,ठेठर
एंजिन इंजनटरपेण्टाइनतारपीन
डॉक्टरडाक्टर माइलमील
लैनटर्नलालटेन बॉटलबोतल
स्लेटसिलेट कैप्टेन कप्तान
हास्पिटलअस्पताल टिकटटिकस

पुर्तगाली शब्द

अन्नास ,अलमारी, आलपिन, आया ,इस्त्री, इस्पात, कमीज,  कमरा, कर्नल, काज, काफी,काजू ,गमला, गोभी, गोदाम, चाबी, तैलिया, पपीता, नीलाम, पादरी, फीता, बाल्टी ,बोतल, ​िमस्त्री, संतरा आदि।

हिन्दी पुर्तगाली
अलकतराAlcatrao
अनत्रासAnnanas
आलपीनAlfinete
आलमारीAlmario
बाल्टीBalde
किरानी Carrane
चाबी Chave
फीताFita
तम्बाकूTabacco

संकर शब्द :-जो शब्द दो विभिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बनते हैं, संकर शब्द कहलाते हैं।

सरल शब्दों में कह सकते है- दो भिन्न स्त्रोतों से  आए शब्दों के मेल से बने नए  शब्दों को संकर शब्द कहते है। हिंदी में संकर शब्दों के कुछ ही उदहारण देखने को मिलते हैं इनकी रचना प्रायः सस्ंकृत तथा हिंदी , हिंदी तथा अग्रेंजी, अग्रेंजी तथा अरबी-फारसी, अरबी तथा फारसी, अग्रेंजी तथा हिंदी आदि के मेल से हुई है

हिंदी +अग्रेंजी:कपडा+मिल=कपडामिल,लाठ़ी+ चार्ज— लाठ़ीचार्ज
अग्रेंजी+ हिंदीरेल+ गाडी = रेलगाडीटिकट+घर — टिकटघर
हिंदी +फारसीछाया+दार = छायादारपान+दान —पानदान
अग्रेंजी + फारसीजेल+खाना= जेलखानासील+बंद— सीलबंद
फारसी+ हिंदी बे +डौल = बेडौलखून+पसीना— खूनपसीना
अरबी-फारसीतहसील+दार= तहसीलदारफिजूल+खर्च -फिजूलखर्च

रचना/बनावट के आधार पर शब्द- भेदः-

यदि शब्दों की रचना पर ध्यान दिया जाए तो हर भाषा में दो तरह के शब्द मिलते हैं। कुछ मूल शब्द होते है और कुछ दो मूल शब्दों के मेल से बनते हैं। इस आधार पर शब्दों े प्रमुख भेद सामने आते हैं। 1 मूल शब्द   2. यौगिक शब्द

1).मूल शब्द

वे सरल शब्द जिनके और छोटे अर्थवान नहीं किए जा सकते मूल शब्द कहलाते है। जैसेः-चावल, सब्जी, फल, रूपया, पैसा मकान, कलम,  पुस्तक, ऑख , कान, नाक, पेट नाक, दाल, आदि

यों तो हर मूल शब्द का अपना एक अर्थ होता है। जिसे मुख्य अर्थ कहते है। कभी कभी कुछ मूल शब्द का प्रयोग अपने मुख्य अर्थ से हटकर किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति के लिए होने लगता है। वह शब्द उस वस्तु या व्यक्ति के लिए रूढ हो जाता है।उदहारण के लिए :- हिंदी में गधा शब्द का समान्य अर्थहै-विशेष नए पशु’ में यह श्ब्द मूर्ख के अर्थ में रूढ हो गया है। यदि किसी लडके के लिए कहा जाए कि ’वह लडका गधा है।’ इसका अर्थ यही लिया जाएगा कि ’वह लडका मूर्ख है’ अतः मूल शब्द दो तरह के हो जाते है।

1.सामान्य मूल शब्द    2. रूढ मूल शब्द   

क .सामान्य मूल शब्द :- इस वर्ग में सभी  मूल शब्द आते है।  जैसे रात ,दिन,  साल, महीना, बरस, घोडा, बकरा, शेर, चिता, लोमडी, बिल्ली, दाल, चावल, मेज, कुरसी, चादर, तकिया, रजाई, कंबल, गद्दा, केला, संतरा, स्कूल, इमारत, मकान, पहाड, घाटी, नौकरी, व्यापार आदि।

ख.  रूढ मूल शब्द :- जो शब्द प्रयोग होते होते किसी विशेष अर्थ में, किसी वस्तु विशेष के लिए निश्चित हो गए हों, उन्हें रूढ शब्द कहते है। जैसे घर, फल, दूध, पुस्तक आदि। अर्थात इस वर्ग में वे मूल शब्द आते हैं जो अपने अनेक अर्थों में से किसी एक अर्थ में रूढ हो जाते है।

दूसरे शब्दों में कह सकते है-किसी विशेष अर्थ में प्रयोग होने वाले ऐसे शब्द जिनके  सार्थक खंड या टुकड़े न किए जा सकते हों, रूढ शब्द कहलाते है।   जैसे →

 

जिन शब्दों के सार्थक खंड न हो सके और जो अन्य शब्दों के मेल से न बने हों उन्हें रूढ शब्द कहते है। इसे मैलिक या अयौगिक शब्द भी कहा जाता है। जैसे चावल, शब्द का यदि हम खंड करेंगें तो चाव,ल तो  ये निरर्थक खंड होगें। अतः चावल शब्द रूढ शब्द कहते है। अन्य उदहारण – दिन, घर , मुॅह, घोडा आदि ।

2).यौगिक शब्दः-

यौगिक शब्द का अर्थ है-मेल से बना हुआ।

जो शब्द दो या दो से अधिक शब्दों से मेल शब्दों से मिल कर बनता है, उसे यौगिक शब्द कहते है, जैसे –

  1. विज्ञान- वि+ ज्ञान
  2. सामाजिक- समाज +इक
  3. विद्यालय – विद्या का आलय
  4. राजपुत्र- राजा का पुत्र आदि।

अन्य शब्दों में कह सकते है कि– जिन शब्दों के सार्थक खंड या टुकड़े किये जा सकते है उन्हें योगिक शब्द कहते हैं द्य  योगिक शब्दों का निर्माण दो या दो से अधिक शब्दों या शब्दांशों के योग से होता है द्जैसे  →

 

जिस तरह  कुछ मूल शब्द किसी विशिष्ट अर्थ हो जाते हैं उसी तरह कुछ ’’यौगिक शब्द’ भी किसी विशिष्ट अर्थ में रूढ हो जाते हैं जैसे ’घरवाली’ एक यौगिक शब्द है, जो ’घर’तथा ’वाली’ दो शब्दों के मेल से बना है। इस शब्द का समान्य अर्थ है ’’गृहस्वामिनी’ लेकिन हिंदी में यह ’पत्नी’के अर्थ के लिए रूढ हो गया है। अतः जो ’यौगिक शब्द ’’किसी विशिष्ट अर्थ के लिए रूढ हो जाते हैं, योगरूढ कहलाते है।

योगरूढ़ →दो या दो से अधिक शब्दों या शब्दांशों के मेल से बने ऐसे शब्द जो अपने समान्य अर्थ को छोडकर किसी विशेष अर्थ का बोध कराते है, ’योगरूढ शब्द’ कहलाते है। जैसे –

रूढ़ यौगिक शब्द—— समान्य अर्थ ——–रूढ अर्थ
जलज —जल+ल ——-कमल,मछली,शंख —-कमल
जलद —जल+द——– बादल कपूर———–बादल
घरवाला -घर+वाला——– गृहस्वामी ————-पति
अक्षर — अ+क्षर ———- शिव,ब्रहमा,सत्——–,वर्ण
रंगभूमि—रंग +भूमि———अखाडा,नाटक का स्थान ,रगंभूमि——- नाटक का स्थान

 

नोट →    योगरूढ़ शब्द में केवल बहुव्रीहि समास के उदाहरण ही आते हैं

 

1).सार्थक शब्द

2).निरर्थक शब्द

1).  सार्थक शब्द

जिन शब्दों का कुछ अर्थ होता है, अर्थात  जिन शब्दों का कुछ.न.कुछ अर्थ हो वे शब्द सार्थक शब्द कहलाते हैं। जैसे.रोटी, पानी, ममता, डंडा , पुस्तक, कमल, पर्वत, आदि।

दूसरें शब्दों में कह सकते है कि– जिन शब्दों का कोई निश्चित अर्थ होता है उन्हें सार्थक शब्द कहते हैं एजैसे → कलम, कोयल,  घर,  एरोटी, पानी, ममता, डंडाआदि

2). निरर्थक शब्द …..

जिन शब्दों का कोई नहीं अर्थ होता हैए उन्हें निरर्थक शब्द कहते हैं ।

जैसे → वाय – वोटी,  रोटी—वोटी, पानी—वानी, डंड-.वंडा इनमें वोटी, वानी, वंडा आदि निरर्थक शब्दआदि ।

3).अर्थ के आधार पर :-

अर्थ के आधार पर शब्दों को निम्नलिखित वर्गों में विभक्त किया गया है।

एकार्थी शब्द,,अनेकार्थी शब्द,पर्यायवाची शब्द,विलोम शब्द,समरूप भिन्नार्थक शब्द आदि

एकार्थी शब्द

जिन शब्दों से केवल एक ही अर्थ का बोध होता है,वे शब्द जिनका एक ही अर्थ होता है एकार्थी शब्द कहलाते है। उन्हें एकार्थी शब्द कहते हैं द्य

जैसे →मोहन, सोहन,आगरा,कानपूर आदि

अनेकार्थी शब्द

जिन शब्दों से एक से अधिक अर्थों का बोध होता है ,वे शब्द जिनके एक से अधिक अर्थ होते है।उन्हें अनेकार्थी शब्द कहते हैं जैसे →

  • कुल——— वंश,सब,गोत्र
  • जलधर——— बादल,समुद्र
  • वर——— वरदान,दूल्हा,श्रेष्ठ
  • चपला— लक्ष्मी, बिजली,
  • नग—— नगीना, पर्वत आदि।

पर्यायवाची शब्द 

जिन शब्दों के अर्थ समान होते हैंए उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं  ।

जैसे →

  • रावण— दशानन,दशकंठ,लंकापति
  • हिरण— मृग,सारंग,कुरंग
  • लहू— रक्त,रूधिर,खून,शेणित

 

विलोम शब्द

विपरीत अर्थ बताने वाले शब्दों को विलोम शब्द या विपरीतार्थक शब्द कहते है ।

यश— अपयश
दूषित—स्वच्छ
जाग्रत— सुप्त
ज्ञानी —अज्ञानी

समानभासी शब्द युग्म या श्रुतिसम भिन्नार्थक या समरूप भिन्नार्थक

जो शब्द सुनने में एक जैसे,एक समान ,लगते/ प्रतीक होते हैं परंतु उनके अर्थ में अधिक अन्तर आता पाया जाता है।उन्ही को ’समश्रुतिभिन्नार्थक शब्द’ कहते है

 शब्दअर्थ
1गिरिपर्वत
गिरीगिरना
2गुरउपाय
गुरूशिक्षक
3अवधिसमय सीमा
अवधी एक भाषा
4मद्यशराब
मदमस्ती, नशा
5कूलकिनारा
कुलवंश
6निधनमृत्यु
निर्धनगरीब

वाक्यांश के लिए एक शब्द

अनेक शब्दों के स्थान पर आने वाले एक शब्द को ’’ वाक्यांश के लिए एक शब्द कहते है जैसे

  • जिसमें कोई सन्देंह ना हो— असदिग्ध
  • जो भूमि अधिक उपजाउ हो— उर्वरा
  • पराए दोष ढूढॅंने वाली —छिद्रानवेशी
  • जिसका इलाज न हो सके— असाध्य

4).प्रयोग के आधार पर शब्द के भेद

1 विकारी

2अविकारी

;विकारी शब्द →वे शब्द होते है जिनमें विकार उत्पन्न होता है। अर्थात लिंग,वचन से परिवर्तन होता है।
वे शब्द  विकारी शब्द कहलाते हैं  जैसे

  • लडका खेलता है। लडकी खेलती है।

विकारी शब्द चार होते हैं ।

1 संज्ञा

2 सर्वनाम

3 विशेषण

4 क्रिया

संज्ञा   

1   सब्जी — सब्जियाँ,, सब्जियों

2  लकड़ी — लड़कियाँ,, लड़कियों

3  पुस्तकत्— पुस्तकें , पुस्तकों

सर्वनाम →

1.तुम – तुम्हें ( तुम्हारा)

2.मेरा- – हमारा

3.उससे — उनसे

विशेषण →

विशेषणशब्द →
कालाकाली, काले
मोटामोटी, मोट
मीठामिठास
चतुर.चातुर्य,, चतुराई
मधुरमाधुर्य
सुंदरसौंदर्य, सुंदरता
निर्बलनिर्बलता
सफेद…सफेदी
हराहरियाली
सफल…सफलता
प्रवीणप्रवीणता
मैलामैला
निपुणनिपुणता
खट्टाखटास

 

 क्रिया →

क्रिया → शब्द →

पढ़ायापढ़ाई-पढ़ाए
पीता है पीती है- पीते है
लिखतालिखती- लिखते
खेलनाखेल
थकनाथकावट
लिखनालेख- लिखाई
हॅसना…हँसी
लेना.देनालेन-देन
पढ़नापढ़ाई
मिलना…मेल
चढ़नाचढ़ाई
मुसकानामुसकान
कमानाकमाई
उतरनाउतराई
उड़नाउड़ान
रहना.सहनारहन-सहन
देखना-भालनादेख.भाल

अविकारी शब्द

जिन शब्दों का लिंग,वचन में भी कोई परिवर्तन नहीं होता है। और बदलते नहीं है।

  • हिमालय,आकाश,पृथ्वी,चन्द्रमा आदि। उन्हें  अविकारी शब्द कहते हैं ।

अविकारी शब्दों को चार भागों में बाँटा गया हैं

1)  क्रियाविशेषण

2)  संबंधबोधक

3)  समुच्चयबोधक)  विस्मयादिबोधक

क्रियाविशेषण →             

1) भीतर, उचित, वैसे, वहॉ, निकट, अचानक, निरंतर, प्रतिदिन आदि।

2) राधा बाहर बैठी हैं  ।

3) मोहन बाहर बैठा है ।

संबंधबोधक

1)तक, बिना,समेत, के उपर, के खातिर, के आगे आदि।

2) रेखा के साथ कमला आएगी ।

समुच्चयबोधक→

1) क्योंकि  या, अथवा, लेकिन, अतएव, ताकि, किंतु , परंतु , अन्यथा आदि ।;

2)  गीता और सीता पढ़ाई कर रही हैं ।

3)  राम और मोहन पढ़ाई कर रहे हैं ।

विस्मयादिबोधक →

1) धन्य, शाबाश, ओहो , क्या, जी, हॉ, अवश्य,  अरे, जीते रहे , वाह आदि ।

2)  अरे! राधा गा रही हैं द्य

3) ओहो! क्या बात है।                                                             ;

4) वाह !देखो कितना सुदर फूल है।

5) अरे! मोहन गा रहा है

अत: इस प्रकार हमने शब्द विचार को बहुत ही सुक्ष्म अध्ययन द्वारा आपको बताने का प्रयास किया है। हमारी कोशिश यही है कि आपको शब्द विचार के बारे में सुक्ष्म से सुक्ष्म जानकारी प्राप्त करा सकें
हमने इस लेख में शब्द से सम्बधित सभी तथ्यों तथा जानकारियों को पूर्ण रूप आपके समक्ष प्रस्तुत किया है। जैसे
शब्द का अर्थ
शब्द की परिभाषाएं
शब्द के प्रकार
शब्द के भेद तथा शब्द से जुडी अन्य जानकारी।

इसमें हम शब्द निर्माण के बारे में आगे पढेगें