वाच्य की परिभाषा, अर्थ, प्रकार/भेद, प्रयोग एवंम परिवर्तन (Vachya in Hindi)

वाच्य  की परिभाषा (Definition of  Voice)

क्रिया के जिस रूपांतर से यह ज्ञात/बोध  हो कि क्रिया द्वारा किये गये विधान का मुख्य बिंदु/विषय कर्ता है, या कर्म उसे वाच्य कहते है।

सरल शब्दों में —क्रिया के जिस रूप से यह पता चलें कि किसी वाक्य में कर्ता कर्म या भाव में किसी एक की प्रधानता है, उसे वाच्य कहते है।
दूसरे शब्दों में—जिस क्रिया के द्वारा हमें यह पता चलता है कि  वाक्य क्रिया को मुख्य या मूल रूप से चलाने वाला कौन है। अर्थात कर्म,कर्ता भाव,या कोई अन्य घटक है। उसे वाच्य कहते है। 
जैसे —
  1.  रंजन पुस्तक बेच रहा था।
  2.  (क). पुस्तक बेची जा रही थी ।   (ख). वह पुस्तक बहुत बिक रही थी
  3.  हमसे यहॉं नहीं बैठा जाता ।
वाक्य 1 में— बेच रहा था- क्रियापद रंजन के बारे में बता रहा है। रंजन कर्ता है और क्रिया पद उसी के बारें में कुछ विधान कर रहा है। अत: पूरा वाक्य कर्तृवाच्य है।
वाक्य 2 में— बेची जा रही थी क्रिया पद का उददेश्य बेचने वाले व्यक्ति के बसरे में बताना नहीं है। बल्कि पुस्तक के बारें में बताना है। यहॉं पुस्तक कर्म है। इसलिए सम्पूर्ण वाक्य में है। इसी प्रकार वाक्य ख में भी कर्मवाच्य है।
वाक्य 3 में — बैठा जाता क्रिया के साथ कर्म सम्भव नहीं है। और न ही कर्ता पर बल है। इसमें क्रिया का भाव ही मुख्य है। इसलिए यह वाक्य भाव वाच्य है।
इस प्रकार उस रूप रचना को वाच्य कहते है जिससे यह पता चलें कि क्रिया को मूल रूप से चलाने वाला कर्ता है,कर्म है।, या अन्य कोई घटक।
  • इनमें इन्ही  के अनुसार क्रिया के पुरुष, वचन आदि आए हैं।
इन परिभाषाओं  के अनुसार वाक्य में क्रिया के लिंग, वचन चाहे तो कर्ता के अनुसार होंगे अथवा कर्म के अनुसार अथवा भाव के अनुसार।

वाच्य का अर्थ(Meaning of Voice)

वाच्य का अर्थ  है— वाणी या कथन,,, यहॉं वाणी का अर्थ— वक्ता की वाणी या वक्ता का कथन है।
वस्तुत: वाच्य किसी एक बात को थोडे से अर्थ के अंतर के साथ कहने का तरीका है। इस तरह कहे गए वाक्यों कथनों की सरंचना भिन्न हो जाती है।
उदहारण के लिए
  1. मॉं ने खाना बनाया
  2. मॉं के द्वारा  खाना बनाया गया।
यद्यपि दोनो वाक्यों का अर्थ समान्य तो लग ही रहा है किंतु दोनों के अर्थ में सूक्ष्म अंतर है। दोनों की सरंचना भी भिन्न है।  कर्ता द्वारा मॉं के कार्य खाना बनाना  को प्रधानता दी गई है।
 जबकि वाक्य 2—- में कर्ता के कार्य को नकारने या निरस्त  करने का  कार्य किया गया है, कार्य को निरस्त करने का अर्थ है,
जहॉं वाक्य 1—- में कर्ता क्रिया को करने में सक्रिय रूप से भाग लेता है।  है। , वही वाक्य 2 में  उसकी भूमिका निष्क्रिय हो जाती ​है।
इन सभी कार्यों से क्रिया के मूल रूप की सरंचना का पता चलता है कि कौन कर्ता है। क्रिया क्या है। भाव कौन सा है। वही वाच्य कहलाता है।
इसके अन्य उदहारण है।
वर्ग---1वर्ग---2वर्ग---3
1.मजदूर ने पेड काटामजदूर के  द्वारा /से पेड काटा गयापेड काटा गया 
2.बच्चे ने चित्र बनायाबच्चे के द्वारा/से चित्र बनाया गयाचित्र बनाया गया
3.किसान हल चला रहा है।किसान के द्वारा/से हल चलाया जा रहा है।हल चलाया जा रहा है। 
वाच्य में क्रिया के तीनों मूल रूप की सरंचना की प्रधानता  का होना आवश्यक  है
  1.  कर्ता
  2. कर्म
  3. भाव
जैसे –
  1.  राम  क्रिकेट खेलता है।————– (क्रिया कर्ता के अनुसार)
  2. राम द्वारा क्रिकेट खेला जाता है।——- (क्रिया कर्म के अनुसार)
  3.  राम से क्रिकेट खेला जाता है।———(क्रिया भाव के अनुसार)

वाच्य के भेद

हिंदी में मख्य रूप से दो ही वाच्य है।
  1. कर्तृवाच्य (Active Voice)
  2. अकर्तृवाच्य(Passive Voice)
(1) कर्तृवाच्य (Active Voice) जिन वाक्यों  में वक्ता, कर्ता के कार्य की प्रधानता या महत्त्व देता है। वे
कृर्तवाच्य कहलाते है।
सरल शब्दों में—क्रिया के उस रूपान्तरण को कृर्तवाच्य कहते है। जिससे वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध होता है।  कृर्तवाच्य में क्रिया के लिंग, वचन आदि कर्ता के समान होते है
जैसे
  • राम ने दूध पीया।
  • सीता गाती है।
  • मैं स्कूल गया ।
  • सचिन सो रहा है।
  • मैंने शरबत पी लिया है।
  • राधा पुस्तक पढ़ रही है। 
इस प्रकार के वाक्यों में अकर्मक सकर्मक दोनों प्रकार की क्रियॉंए हो सकती है। इनमें कर्ता प्रमुख होता है। 
और कर्म गौण होता है।
  1. पिताजी आ रहें है। ——————(अकर्मक)
  2. बच्चा रो रहा है। ———————(अकर्मक)
  3. माताजी सो रही है। ——————(अकर्मक)
  4. मजदूर काम कर रहें है।————–(अकर्मक)
  5. गरिमा पुस्तक पढ़ रही है। ———–(सकर्मक)
  6. मैं खाना खाता हूॅं।———————-(सकर्मक)
  7. डाकिया डाक विकरित करता है।—- (सकर्मक)
  8. निर्मला कंप्यूटर ठीक करती है।——–(सकर्मक)
ध्यान रखिए
  • कर्ता के कार्य की प्रधानता दिए जाने का का अर्थ बिल्कुल भी नहीं है कि कर्तृवाच्य के वाक्य की क्रिया कर्ता की संज्ञा के अनुसार ही बदलेगी।
  • कर्तृवाच्य के वाक्यों में क्रिया कर्ता के अनुसार उसी समय तक बदलती है। जब कर्ता के बाद कोई परसर्ग नहीं लगा होता है।
  • यदि वाक्य में कर्ता के बाद परसर्ग आ रहा है तो क्रिया वाक्य की दूसरी संज्ञा केअनुसार बदलती है।

विशेष

  • क्रिया का बदलने का संबंध वाच्य के साथ नहीं होता है।
  • हिंदी में क्रिया बदलने के अलग नियम है। जिनका वाचय से संबंध नहीं है।

पहचान

  • वाच्य सकर्मक और अकर्मक दोनों क्रियाओं से बनता है।
  • कर्तृवाच्य में क्रिया कर्ता के अनुसार होती हैअर्थात कर्ता की प्रधानता होती ​है और उसी क्रिया के अनुसार चलती है,
  • कभी कभी कर्ता के साथ ने चिह्न नहीं लगाया जाता ।
  • जहॉं पर वाक्य में क्रिया को मुख्य रूप से चलाने वाला कर्ता होता है। वहॉं पर कृर्त वाच्य होता है।
  • जिन वाक्यों  में कर्ता ही प्रधानता होती है, उसे कृर्तवाच्य कहते है।
(2) अकर्तृवाच्य(Passive Voice)जिन वाक्यों में वक्ता द्वारा कर्ता के कार्य को निरस्त अथवा निष्क्रिय कर दिया जाता है। वे अकर्तृवाच्य के वाक्य कहलाते है।
दूसरे शब्दों में——जिन वाक्यों में कर्ता गौण होता अथवा लुप्त ​होता हैं, उन्हें अकृर्तवाच्य कहते है।

अकर्तृवाच्य(Passive Voice) के भेद

सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया के प्रयोग के आधार पर अकर्तृवाच्य के दो भेद किए गए है।
  • कर्मवाच्य और
  • भाव वाच्य ।
क़) कर्मवाच्य (Passive Voice) क्रिया के उस रूपान्तरण को कर्मवाच्य कहते है। जिससे वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध होता है।  यह वाच्य सकर्मक क्रिया से बनता है।
दूसरे शब्दों में—  अकर्तृवाच्य के वे वाक्य जिनमें सकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है, कर्मवाच्य के वाक्य कहे जाते है।
सरल शब्दो में ——जहॉं पर क्रिया को मुख्य रूप से चलाने वाला कर्म होता है। उसे कर्मवाच्य कहते है।
उदहारण के लिए:—
  • प्रेमचंद द्वारा उपन्यास लिखा जाता है।
  • मुझ से पत्र नहीं पढ़ा जाता है।
  • यहॉं हिंदी बोली जाती है।
  • बच्चों से नदी पार न की जा सकीं
उपर्युक्त सभी वाक्य अकर्तृवाच्य के वाक्य है। जिनमें सकर्मक क्रिया का प्रयोग हुआ है।  अत: ये सभी वाक्य कर्मवाच्य कहे जाएगें 

ध्यान देने योग्य बातें

  • अकर्तृवाच्य के वाक्य में क्रिया कर्ता की संज्ञा के अनुसार कभी नहीं बदलेगी क्योकि उसके भेद हमेशा “से अथवा के द्वारा “परसर्ग लगा होगा।
  • कर्मवाच्य के वाक्यों में दो ही सम्भावनाएॅ होती है। या तो क्रिया कर्म  की संज्ञा के अनुसार बदलेगी या उसके साथ कोई परसर्ग लगा होगा तो फिर उसके अनुसार भी नहीं बदलेगी।
  • ऐसी स्थिति में क्रिया तटस्थ हो जाती है।
  • ​क्रिया  का तटस्थ रूप है—अन्य पुरूष पु​ल्लिंग एकवचन ,भूतालिक रूप

 विशेष

  • इनमें सकर्मक क्रियाएॅ ही प्रयुक्त होती है।
  • इस प्रकार के वाक्यों में क्रिया को करने वाला कर्ता और कर्म दोनों ही रहते है। पर कर्म प्रधान होता है। कर्ता नहीं

कभी कभी कर्ता का लोप भी हो जाता है।

  • मुझसे यह चिळी नहीं पढी जाती।
  • मुझसे यह कपडा नहीं धोया जाता।
  • यह किताब नहीं बिकती ।
  • बाहर का दरवाजा नहीं खुलता।
कर्मवाच्य में कर्म की प्रधानता होती है। कर्म के बाद”से अथवा द्वारा, के द्वारा” का प्रयोग होता है। 
  • प्रेमचंद द्वारा यह उपन्यास हलखा गया। ————(कर्ता द्वारा )
  • नेता के द्वारा पुल का उद्घाटन किया गया———(कर्ता के द्वार)
  • मोहन से यह मेज़ टूट गई।—————————(कर्ता से )
  • आप का काम कर दिया गया है।———————(कर्ता का लोप)
  • दीपावली अक्टूबर या सवम्बर में मनाई जाती है।—(कर्ता का लोप)
  • यह उल्लेखनीय है कि कर्म वाच्य में कर्ता के साथ द्वारा  के द्वारा,या से” जोडा जाता है।इस कारण कर्ता गौण हो जाता है।
  • कर्म वाच्य रचना में असर्मथता सूचक वाक्य भी आते है। किंतु इनमें द्वारा के स्थान पर प्राय: “से” परसर्ग का प्रयोग होता है।
इनमें भी सकर्मक क्रिया प्रयुक्त होती है। ये वाक्य केवल निषेधात्मक रूप में प्रयुक्त होते है। और कर्ता की असर्मथता को सूचित करते है।
जैसे
  • मुझसे दरवाजा नहीं खोला जाता।
  • मुकेश से खानाा नहीे खया जाता ।
हिंदी में क्रिया का एक ऐसा रूप है। जो कर्मवाच्य की तरह प्रयुक्त होता है। वह रूप सकर्मक रूप है। इसका अकर्मक रूप जिसे व्युत्पन्न कहते है।
जैसे
  • दरवाजा खुल गया ——— (खोलना ,खूलना)
  • गिलास टूट गया ———- (तोडना टूटना।)
  • भोजन पक गय।————(पकाना ,पकना)।

कर्म वाच्य के प्रयोग स्थल या स्थान

  • कई बार क्रिया का कर्ता अज्ञात होता है।
  • जैसे गाना गाया गया।
  • जब कर्ता को प्रकट करने की आवश्यकता ही न हों।
  • जैसे साहित्यिक गोष्ठी में कविता पढी जाएगी 
  • कानूनी भाषा में
  • जैसे — कानून का उल्लंघन करने वालों को दण्ड दिया जाएगा
  • दर्प ,गर्व ,अधिकार प्रकट करने के लिए
  • जैसे——मामलों की पूरी जॉच की जाए।

कर्म वाच्य  वाले वाक्य में

  • एक से अधिक पद होते है।
  • जाना क्रिया को सहायक क्रिया के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
  • वाक्य का उद्देश्य कर्म होता है। मुख्य क्रिया सकर्मक होती है।
  • कर्ता गौण् होता है।
 3) भाववाच्य (Impersonal Voice)- जिन वाक्यों में कर्ता और कर्म दोनों ही अप्रधान होते है। वे भाव वाच्य कहलाते है।
सरल शब्दों में ———अकर्तृवाच्य के वे वाक्य जिनमें अकर्मक क्रिया का प्रयोग किया जाता है, भाववाच्य के वाक्य कहलाते जाते है।
दसरे शब्दों —क्रिया के उस रूपान्तर को भाववाच्य कहते हैं, जिससे वाक्य में क्रिया अथवा भाव की प्रधानता का बोध हो।
अत: कहा जा सकता है कि– क्रिया के जिस रूप में न तो कर्ता की प्रधानता हो, न कर्म की, बल्कि क्रिया का भाव ही प्रधान हो, वहाँ भाववाच्य होता है।
अन्य शब्दों में —क्रिया के जिस रूप में भाव की प्रधानता होती है और क्रिया का सीधा सम्बंध भाव से होता है। उसे भाव वाच्य कहते है। यह केवल अकर्मक क्रिया के वाक्यों में ही प्रयुक्त होता है।
उदाहरण के लिए-
  • शेर से दहाडा भी नहीं गया
  • लडकियों से हसॉ तक नहीं गया।
  • माताजी से पहाउ पर चढा नहीं गया।
  • बच्चों से नदी में तैरा नहीं जाता ।
उपर्युक्त सभी अकर्तृवाच्य के वाक्य है। तथा इनमें अकर्मक क्रिया का प्रयोग हुआ है। अत: ये सभी वाक्य भाव वाच्य के अंतर्गत आएगें  अकर्तृवाच्य में वाक्यों में प्राय: लोन कर दिया जाता है। 
भाव वाच्य के अन्य उदहारण 
  • गाया नहीं जाता
  • यहॉं बैठा नहीं जाता
  • पैदल चला नहीं जाता
  • खडे होकर पानी पीया नहीं जाता
  • अब सोया जाए

ध्यान रखिए

  • प्रयोग के स्तर पर भाव वाच्य का प्रयोग निषेधात्मक वाक्यों में अधिक देखने को मिलता है।
  • भाव वाच्य के सकारात्मक वाक्य सहज प्रतीत नहीं होते  जैसे
  • बच्चों से दौडा गया।
  • लडकियों से हॅसा गया।

विशेष

  • इसमें वक्ता का कथ्य बिंदु क्रिया से प्रकट होता है।

भाव वाच्य में केवल अकर्मक क्रिया काा प्रयोग किया जाता है। वस्तुत: अकर्मक क्रिया का कर्म वाच्य ही भाव वाच्य है। जैसे

  • यहॉ सोया नहीं जाता ।
  • मुझसे चला नहीं जाता ।
कर्मवाच्य या भाव वाच्य के जिन वाक्यों में कर्ता के बाद से प्रयोग होता है। वहॉ कर्ता के सामथर्य का भाव वा रहता है। ऐसे वाक्य प्राय: नकारात्मक होते है। तथा इस प्रकार के वाक्य भाव वाच्य में आते है।
जैसे———
  • अब चला जाए
  • थोडी देर सो लिया जाए।
भाव वाच्य केवल अकर्मक क्रियाओं  के साथ ही सम्भव है। क्योकि इनमें कर्म की स्थिति नहीं होती ,भाव वाच्य क्रिया हमेशा एकवचन,अन्य पुरूष्,पुल्लिग रूप में रहती है।
जैसे —-
  • सोया जाता है।
  • चला जाता है।
भाव वाच्य के प्रयोग स्थल या स्थान
भाव वाच्य के प्रयोग प्राय: असमर्थता और विवशता को प्रकट करने के लिए नही के साथ किया जाता है।
जैसे —
  • मुझसे अब नहीं चला जाता
जहॉ नहीं का प्रयोग होता,वहॉ मूल कर्ता समान्य होता है।
जैसे
  • अब चला जाए।
  • चलो उपर सोया जाए।

कर्मवाच्य और  भाव वाच्य में अंतर

कर्मवाच्य तथा भाववाच्य दोनों ही अकर्तृवाच्य के भेद है। दोनो में अंतर केवल इस बात को लेकर है कि कर्मवाच्य वाले वाक्य में सकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है। भाववाच्य वाले वाक्यों में  अकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है।

वाच्य-परिवर्तन

(1) कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य (Active to Passive)
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में रूपान्तरण के लिए हमें निम्नलिखित कार्य करने चाहिए-
  • कर्तृवाच्य के साथ लगी विभक्ति हटा दी जाती है और  कर्त्ता कारक में करण कारक के चिह्न ‘से’या केद्वारा’ का प्रयोग करना चाहिए।
  •  कर्तृवाच्य की मुख्य क्रिया को समान्य भूतकाल की क्रिया में बदला जाता है। और जाना क्रिया के उचित रूप का प्रयोग किया जाता है।
  • कर्म के साथ कोई परसर्ग हो तो उसे हटा दिया जाता है।
  •  कर्म को चिह्न-रहित करना चाहिए।
  •  क्रिया को कर्म के लिंग-वचन-पुरुष के अनुसार रखना चाहिए अर्थात कर्म प्रधान बनाना चाहिए।
नीचे कुछ उदाहरण दिया जा रहा है
कर्तृवाच्य                   कर्मवाच्य
दीपिका ने खाना बनाया ।      दीपिका के द्वारा खाना बनाया गया।
क्या अमीना आगरा जाएगी।      क्या अमीना के द्वारा  आगरा  जाया जाएगा ।
केदारनाथ ने पूजा की ।       केदारनाथ के द्वारा  पूजा की  गई।
राधा ने कहानी सुनाई ।       राधा के द्वारा  कहानी सुनाई गई।
यह मकान नानी जी ने बनवाया था। यह मकान नानी जी के द्वारा  बनवाया  गया था ।
चित्रकार चित्र बनाता है।चित्रकार द्वारा चित्र बनाया जाता है
राधा नृत्य करती है। राधा द्वारा नृत्य किया जाता है।
पुलिस ने अपराधी को पकड़ा।पुलिस द्वारा अपराधी को पकड़ा गया।
मित्र विपत्ति में मदद करते हैं।मित्रों के द्वारा विपत्ति में मदद की जाती है।
महेश पत्र लिखता है।महेश के द्वारा पत्र लिखा जाता है।
फैक्टरी बंद कर दी।फैक्टरी बंद करा दी गई
बुढ़िया खाना नहीं खा सकती।बुढ़िया के द्वारा खाना नहीं खाया जाता है।
बच्चे शोर मचाएँगे। बच्चों के द्वारा शोर मचाया जाएगा।
भारतवासी महात्मा गाँधी को नहीं भूल सकते है।भारतवासियों के द्वारा महात्मा गाँधी नहीं भुलाए जा सकते।

 कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य बनाना

कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य में परिवर्तन के लिए निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए-
  • भूतकाल की सकर्मक क्रिया रहने पर कर्म के लिंग, वचन के अनुसार क्रिया को रखना चाहिए।
  • कर्त्ता के अपने चिह्न (०, ने) आवश्यकतानुसार लगाना चाहिए।
  • यदि वाक्य की क्रिया वर्तमान एवं भविष्यत् की है तो कर्तानुसार क्रिया की रूप रचना रखनी चाहिए।
नीचे कुछ उदाहरण दिया जा रहा है-
 कर्मवाच्य सेकर्तृवाच्य
बंदर द्वारा बच्चे को काटा गया  बंदर ने बच्चे को काट लिया
रोगी के द्वार दवा खाई गई।     रोगी ने दवा खाई ।
मोहित के द्वारा हनुमान चालीसा पढ़ा गया मोहित ने  हनुमान चालीसा पढ़ा
मैं यह दृश्य नहीं देख सका।मुझसे यह दृश्य नहीं देखा गया।
मजदूर पत्थर नहीं तोड़ रहे। मजदूरों से पत्थर नहीं तोड़े जा रहे।
यह छात्रा भावभीनी श्रद्धांजलि दे रही है।इस छात्रा द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि दी जा रही है।
भक्तों के द्वारा भजन गाए गए   भक्तों ने भजन गाए 
ड्राइवर ​के द्वारा बस रोकी गईड्राइवर ​ने बस रोकी
नरेश पत्र लिखता है। नरेश से पत्र लिखा जाता है।
मैं अख़बार नहीं पढ़ सकता। मुझसे अख़बार पढ़ा नहीं जाता
लड़कियों द्वारा गीत गाए जा रहे हैं। —लड़कियाँ गीत गा रही हैं।
मैं यह वजन उठा नहीं पाऊँगा।मुझसे यह वजन नहीं उठाया जाएगा।

कर्तृवाच्य से भाववाच्य (Active voice to Impersonal Voice)

कर्तृवाच्य से भाववाच्य  निम्नलिखित बिंदुंओ के आधार पर बनते है।
  • क्रिया के साथ से विभक्ति चिह्न लगाया जाता हें
  • क्रिया को सामान्य भूत काल में लाकर उसके साथ काल के अनुसार ‘जाना’ क्रिया रूप जोड़ा जाता है
  • कर्त्ता के साथ से/द्वारा चिह्न लगाकर उसे गौण किया जाता है।
  • मुख्य क्रिया को सामान्य क्रिया एवं अन्य पुरुष पुल्लिंग एकवचन में स्वतंत्र रूप में रखा जाता है।
  • भाववाच्य में प्रायः अकर्मक क्रियाओं का ही है।
  • क्रिया को एकवचन, पुल्लिंग और अन्य पुरुष में परिवर्तित कर दिया जाता है
  • हिंदी में निषेधात्मक अधिंकाश्त: भाववाच्य  का ही प्रचलन है। अन्य भाववाच्य प्रचलन के ही बराबर है।

कर्तृवाच्य से भाववाच्य में परिवर्तित कुछ उदाहरण

  
कर्तृवाच्य सेभाववाच्य में
अध्यापिका ज़ोर से नहीं बोलती अध्यापिका से ज़ोर से नहीं बोला जाता 
बकरी में—में करती है।
बकरी से में—में ​किया जाता
चिडिया नहीं बैठती है।चिडिया से नहीं बैठा जाता है। 
कनु​प्रिया नहीं गाएगी   कनुप्रिया से   गाया नहीं  जाएगा।
महादेवी नहीं उठतीमहादेवी से नहीं उठा जाता 
गरमियों में लोग खूब नहाते हैं। गरमियों में लोगों से खूब नहाया जाता है।
पक्षी रात में सोते हैं।पक्षियों से रात में सोया जाता है।
 वह तख्त पर सोता है।उससे तख्त पर सोया जाता है।
पक्षी उड़ रहे हैं। पक्षियों से उड़ा जा रहा है।
बच्चा चल नहीं पाता।बच्चे से चला नहीं जाता।
राधा हँसती है। राधा से हँसा जाता है।
वाच्य संबंधी कुछ महत्वपूर्ण या विशिष्ठ बातें 
  • कर्म वाच्य तथा भाव वाच्य में कर्ता के बाद के द्वारा/द्वारा या से परसर्ग का प्रयोग किया जाता है।
  • भाव वाच्य की क्रिया सदा अन्य पुरूष पुल्लिंग में रहती है।
भाव वाच्य से प्राय: में  “से” का प्रयोग होता है।  बोलचाल की भाषा में से का प्रयोग प्राय: निषेधात्मक वाक्यों में किया जाता है। जैसे :—
  • मुझसे चला नहीं जाता है।
  • उससे काम नहीं होता

कर्मवाच्य तथा भाव वाच्य के निषेधात्म्क वाक्यों में जहॉं कर्ता से का प्रयोग किया होता है। वहॉं एक अन्य असमर्थकतासूचक अर्थ की अभिव्यक्ति होती है।

जैसे:—

  • मुझसे चावल नहीं खाया जाता है।
  • पिता जी से पैदल नहीं चला जाता।
  • उनसे कन्नड नहीं बोली जाती।?
  • बच्चे से दूध नहीं पीया जाता ।
कर्तृवाच्य क सकारत्मक वाक्यों में इसी सामथर्य को सूचित करने के लिए क्रिया के साथ “सक” का प्रयोग किया जाता है। जैसे :
  • वे पुस्तक पढ सकते है। 
  • गीता मिठाई बना सकती है
इसी तरह असमर्थकतासूचक  वाक्यों में सक का प्रयोग किया जा सकता है।
  • मैं यह नौकरी नहीं कर सकता ।
  • वह दुकान नहीं चला सकता।
कर्तृवाच्य  के निषेधात्मक वाक्यों को कर्मवाच्य और भाववाच्य दोनों में रूपांतरित/परिवर्तित किया जा सकता है।
कर्मवाच्य के वाक्यों में प्राय: क्रिया में “जा” रूप लगाकर किया जाता है।
  • सोया जाता है।
  • खाया जाता है। 
जैसे वाक्य बनते है। लेकिन कुछ व्युत्पन्न अकर्मक क्रियाओं का प्रयोग भी कर्मवाच्य में होता है।

1 श्रमिक पेड नहीं काट रहे 

  • क).).श्रमिकों से  पेड नहीं काटा जाता।
  • ख श्रमिकों से पेड नहीं कट  रहा।
2 हलवाई मिठाई नहीं बना रहा
  • क). हलवाई  से मिठाई नहीं बनाई  जा रही।
  • ख).  हलवाई  से मिठाई नहीं बन रही।
हिंदी में अकर्तृवाच्य कर्मवाच्य तथा भाववाच्य के वाक्यों में प्राय: कर्ता का लोप कर दिया जाता है।
जैसे:—
  • पेट नहीं काटा जा रहा है। 
  • पेड नहीं कट रहा।
  • कपडें नहीं धुल रहे।
हिंदी में क्रिया का एक ऐसा भी रूप है, जो कर्मवाच्य की तरह प्र्युक्त होता है। वह है—सकर्मक क्रिया से बना उसका अकर्मक रूप जिसे व्युत्पन्न अकर्मक कहते है।
जैसे
  • गिलास टूट गया  तोडना से टूटना रूप 
  • हवा से दरवाजा खुल गया  खोलना से खुलना रूप 
कुछ व्युत्पन्न  अकर्मक क्रियाओं का प्रयोग भी कर्मवाच्य में होता है। जैसे
  • मजदूर पेड नहीं काट रहे।
  • मजदूर  से पेड नहीं काटे जाते। 
  • मजदूर  से पेड नहीं कट रहे।

वाच्य के प्रयोग

प्रत्येक वाच्य का प्रयोग स्थल उसकी क्रिया  लिंग वचन संज्ञा  तथा पुरुष  के  आदि द्वारा अलग अलग किया जाता है। वाक्य की क्रिया का लिंग, वचन एवं पुरुष कभी कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार होता है, तो कभी कर्म के लिंग-वचन-पुरुष के अनुसार, लेकिन कभी-कभी वाक्य की क्रिया कर्ता तथा कर्म के अनुसार न होकर एकवचन, पुंलिंग तथा अन्यपुरुष होती है,इन सभी कि द्वारा प्रयोग किया जाता है।

प्रयोग को निम्न आधारों पर  वर्गीकृत किया जाता है। 
  1. कर्मणि (कर्म ) के अनुसार वाक्य का प्रयोग
  2.  कर्तरि (कर्ता) के अनुसार वाक्य का प्रयोग
  3.  भावे (भाव )के अनुसार वाक्य का प्रयोग
1).कर्मणि का प्रयोग :———जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हों, तो उसे कर्मणि प्रयोग कहते हैं।
सरल शब्दों में-  जिस रूप में  क्रिया  का प्रयोग पुरुष, लिंग और वचन कर्म के अनुसार हों, उसे कर्मणि प्रयोग कहते हैं।
जैसे-
  • राधा ने गीत गाया ————————क्रिया कर्म के अनुसार पुल्लिग है।
  • मोहन ने किताब पढ़ी ————क्रिया कर्म के अनुसार स्त्रीलिंग है।
2). कर्तरि का  प्रयोग–  जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हों, तो उसे कर्तरि प्रयोग कहते हैं।
सरल शब्दों में:—जिस रूप में क्रिया के  लिंग  वचन और पुरुष,कर्ता के अनुसार हों, उसे कर्तरि प्रयोग कहते हैं।
जैसे-
  • रोहणी खाना खाती है।
  • लडकें  पुस्तकें पढेंगें।
पहले वाक्य में ‘खाती’ क्रिया कर्ता ‘रोहणी’ के अनुकूल अन्य पुरुष,स्त्रीलिंग  बहुवचन और है। दूसरे वाक्य में ‘पढ़ेंगें’ क्रिया कर्ता ‘लडके’ के अनुसार अन्य पुरुष, पुल्लिंग और एकवचन  है। ये दोनों कर्तरि प्रयोग के उदाहरण हैं।
भावे का प्रयोग :—  क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता अथवा कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार न होकर एकवचन, पुंलिंग तथा अन्य पुरुष हों ,तब  भाव भावे का  प्रयोग होता हैं।
जैसे
  • राम से रोया नहीं जाता
  • सीता से रोया नहीं जाता
  • लडकों से रोया नहीं जाता

इन तीनों वाक्यों में कर्ता के बदलने पर भी क्रिया अपरिवर्तित है। तथा वह पुल्लिंग है। एकवचन तथा अन्य पुरूष में है। अत: ये भावे प्रयोग है।

विशेष

वाच्य के प्रयोग में तीनों वाच्यों में भाव भावे  का प्रयोग देखा जा सकता हैं। जैसे-
इसमें क्रिया का रूप सदैव अन्य पुरुष, पुल्लिंग और एकवचन में रहता है,
वह कर्ता या कर्म के अनुसार नहीं होता।

कर्म वाच्य के प्रयोग

कर्म वाच्यों के प्रयोग स्थल नीचे दिए गए है।
असर्मथता प्रकट करने के लिए :—
  • मुझसे चला नहीं जाता।
  • रोमा सा किसी कर दुख देखा नहीं जाता।
  • अब उससे जागा  नहींके  जाएगा।
कार्यालय में प्रयोग करने पर 
  • आपकी स्कूटर लिए ऋण संबंधी प्रार्थना स्वीकार की जाती है।
  • बस हडताल के कारण विद्यालय कल बंद रखा जाएगा।
  • पर्यावरण दिवस प्रतियोगिता संबंधी पुरस्कार शीघ्र दिए जाएगें
  • आपको अतिरिक्त वेतन वृद्धि प्रदान की जाती है।
वाक्य में कर्ता का न रहने पर 
  • बसें तोडी जा रही है।
  • सडक बना दी गई है।
  • आतंकवादी गतिविधियॉं निंरतर चल रही है।
  • प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है।
कर्ता के व्यक्ति न होकर संस्था समाज या सरकार होने पर
  • सुमंगलम के महासचिव द्वारा लेखकों को अनुदान दिया जाता है।
  • सरकार द्वारा अनुसूचितों को अनेक सुविधाएॅं प्रदान की जाती है।
  • उडान शिक्षा द्वारा पशिक्षण दिया जाता है।
  • आपको सूचित किया जाता है कि————
अधिकार अभिमान और अंहकार प्रकट किए जाने पर
  • नृर्तकियों से नृत्य कराया जाए।
  • इतनी गरमी में हमसे नहीं जाया जाता
  • कर्मचारियों से सफाई कराई जाए।
सूचना विज्ञप्ति में जहॉं कर्ता निश्चित हो—
  • पटरी पार करने वालों को सजा दी जाए ।

 भाव वाच्य का प्रयोग

 भाव वाच्य का प्रयोग निम्न स्थितियों में किया जाता है। 
असमर्थता प्रकट करने  के लिए नहीं का प्रयोग 
  • लालचंद से चला नहीं जाता
  • राधा से अधिक खाया नहीे जाता
  • विद्याप्रसाद से इनता बोला नहीं जाता
जब नहीं कर प्रयोग नहीं होता तो मूल कर्ता जनसमान्य होता है:—
  • गर्मिंयों में छत पर सोया जाता है।
अनुमति या आदेश प्राप्त करने पर  भाव का प्रयोग 
  • अब प्रस्थान किया जाए ।
  • यात्रा पर निकल लिया जाए।
  • कम्पूटर चला लिया जाए।