Vakya Vichar Rachna – वाक्य विचार रचना (Syntax, Sentence)

Vakya Vichar Rachna – वाक्य विचार रचना (Syntax, Sentence)

वाक्य की परिभाषा 

जब भी हमें अपने मन की बात दूसरों तक पहुॅंचानी होती है या बातचीत करनी होती है। तब हम वाक्यों का सहारा लेते है।अर्थात्   वाक्य वक्ता के विचारों को श्रोता तक पंहुचाने का माध्यम हैं। उदहारण के लिए , अगर कोई भी व्यक्ति आम खरीदना चाहता है तो  फल बेचने वाले से कहेगा -’मुझे दो किलो आम दे दो’ या किसी बच्चे को रूपये की जरूरत हैतो वह अपनी मॉ से कहेगा -’मॉ, मुझे कुछ रूपए चाहिए’।इस तरह अपनी बात दूसरे तक संप्रेषित करने के लिए हम वाक्यों का प्रयोग करते है।
वाक्यों के कुछ अन्य उदहारण इस प्रकार हैं
  •  शेर पिंजडे में बंद है।
  • किसान खेत में हल चला रहा है।
  • दरजी कपडे सिल रहा है।
  • लडकी नृत्य कर रही है।
यदि वाक्य-1 एक के स्थान पर हम’ शेर पिंजडा बंद’ अथवा वाक्य-2 के स्थान पर ’किसान खेत हल चलाना’ कहें तो ये वाक्य नहीं कहलाएगें। ये केवल शब्दों का संग्रह है, वाक्य नहीं।
वाक्य के लिए सबसे आवश्यक बात , वाक्य में प्रयुक्त होने वाले सभी शब्दों का वाक्य के नियमों में बॉधकर आना है। तभी वे किसी विचार या भाव को व्यक्त  कर पाने  में समर्थ हो जाते है। अतः जब तक कोई रचना  किसी भाव या विचार को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाती तब तक उसे वाक्य नहीं कहा जाता ।
1).सार्थक का मतलब होता है अर्थ रखने वाला। यानी शब्दों का ऐसा समूह जिससे कोई अर्थ निकल रहा हो, वह वाक्य कहलाता है।
2). शब्दों के एक सार्थक समूह को ही वाक्य कहते हैं

वाक्य का अर्थ

भाषा की मुख्य इकाई वाक्य है,जिससे किसी भाव को पूर्ण रूप से व्यक्त किया जा सकता है। यद्यपि शब्दों का अपना अर्थ होता है,लेकिन इनके बिना किसी क्रम के अलग अलग बोलने से वक्ता का पूरा अभिप्राय स्पष्ट नहीं हो पाता इन शब्दों को निश्चित क्रम और स्वाभविक गति से बोलने पर वक्ता का अभिप्राय: स्पष्ट हो जाता है।

  • जैसे नदी के किनारे—किनारे एक गाय जा रही थी ‘इस वाक्य को अलग अलग या रूक रूक कर बोला जाए तो अभिप्राय: स्पष्ट नहीं होगा

अर्थात कहा जा सकता है कि -वाक्य के शब्दों को सही क्रम में संयोजित करने तथा स्वाभिक गाति से बोलने पर बात पूरी तरह समझ आ जाये ,वाक्य कहलाता है।

भाषा की वह इकाई जो किसी भाव या विचार को पूरी तरह से व्यक्त करने में शक्ति होती है, वाक्य कहलाती है।
कहने  का तात्पर्य यह है कि -वाक्य पदों का वह व्यवस्थित समूह है। जिसमें पूर्ण अर्थ देने का सामर्थ्य  होता है, वाक्य कहलाता है।
  • वाक्य शब्दों की इकाई है जो रचना की दृष्टि से अपने आप में स्वतंत्र है।
  • वाक्य किसी विचार भाव या मंतव्य को पूर्णतया प्रकट करता है।

वाक्य के  अंग

वाक्य के दो अंगहोते है.
  1. उद्देश्य (Subject)
  2.  विद्येय(Predicate)

1).उद्देश्य (Subject):- 

वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाये उसे उद्देश्य कहते हैं।  यह प्रायः वाक्य के  प्रारंभ में आता है। इसमें कर्ता, और कर्ता का विस्तार विशेषण आदि आता है।
  • उहारण 1-सपेरा बीन बजा रहा है
  • उहारण 2 – पेड काटने वाला मजदूर घर चला गया है।
  • उहारण 3-मेरा मित्र मोहन कल आ रहा है।
वाक्य-1. में सपेरे द्वारा बीन बजाए जाने की बात कही गई है अतः सपेरा पद, जो वाक्य का कर्ता तो है ही, साथ ही वाक्य का उद्देश्य भी है। इसी प्रकार वाक्य-2 का उद्देश्य है- पेड काटने वाला मजदूर क्योंकि वाक्य में ’अपने घर जाने की बात’ पेड काटने वाले मजदूर के बारे में कही गई है।  भी लगा हुआ है। वाक्य-2 का उद्देश्य में कर्ता ’मजदूर’ को विस्तार देने वाला विशेषण पद पेड काटने वाला भी लगा
2).  विद्येय(Predicate) 
वाक्य के उद्देश्य के बारे में जो कुछ कहा जाता है, वह विधेय कहलाता है उपर दिए वाक्य -1 में बीन बजा रहा है तथा वाक्य-2 में अपने घर चला हैं विधेय हैं क्योंकि ये अंश दोनो वाक्यों के उद्देश्य के बारे में  कुछ कह रहे हैं। विधेय के अंतर्गत क्रिया  तथा क्रिया के  विस्तार हैं
उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाता है, उसे विद्येय कहते है।जैसे-
  •  रेलगाडी पटरी पर दौड रही है।
इस वाक्य में ’’दौड रही है। विधेय है क्योंकि ’’रेलगाडी’ उद्देश्य के विषय में कहा गया है।
दूसरे शब्दों में. वाक्य के कर्ता -उद्देश्य को अलग करने के बाद वाक्य में जो कुछ भी शेष रह जाता है, वह विधेय कहलाता है।
इसके अंतर्गत विधेय का विस्तार आता है। जैसे. लंबे-लंबे बालों वाली लड़की अभी-अभी एक बच्चे के साथ दौड़ते हुए उधर गई
इस वाक्य में विधेय “गई” का विस्तार अभी-अभी एक बच्चे के साथ दौड़ते हुए उधर है

विधेय के भाग.

वाक्य छह होते है।
  1. क्रिया
  2. क्रिया के विशेषण
  3. कर्म
  4. कर्म के विशेषण या कर्म से संबंधित शब्द
  5. पूरक
  6. पूरक के विशेषण।
वाक्यउद्देश्यविधेय
रेलगाडी पटरी पर दौड रही है।दौडरही है।
सब्जी बेचने वाला लडका घर के बाहर खडा है। सब्जी बेचने वालाबाहर खडा है।
सभी बच्चे कक्षा के शांत बैठे हैं।सभीबैठे हैं।
तुम्हारे पिताजी इस समय टेलिविजन देख रहें हैंतुम्हारेदेख रहें हैं
वाक्य के भेद या अंग
वाक्य के  भेद दो आधारों पर किए जाते हैं-
  1. अर्थ  के आधार पर
  2.  रचना के आधार पर

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद.

अर्थ के आधार पर वाक्य मुख्य रूप से आठ प्रकार के होते है.
  • विधानवाच
  • निषेधवाचक
  • आज्ञावाचक
  • प्रश्नवाचक
  • इच्छावाचक
  • संदेहवाचक
  • विस्मयवाचक
  • सकेंतवाचक
 विधानवाचकः/विधानार्थक – जिन वाक्यों में क्रिया के समान्य रूप से  करने या होने की सूचना मिलें ,या बोध होउन्हें विधानवाचक वाक्य कहते है, जैसे –
  • ठंडी हवा चल रही है।
  • बाग में फूॅल खिल रहें है।
  • लडके पढ रहे है।
  • राधा ने पूजा की।
  • रमाकांत पुस्तकें लाया

2.)  निषेधवाचक /नकारात्मक वाक्य -ःजिन वाक्यों की क्रियाओं के द्वारा कार्य न होने के भाव का बोध होता है। उनहें निषेधवाचक वाक्य कहते है।
सरल शब्दों में—जिन वाक्यों में किसी बात,कथन या कार्य का निषेध मनाही किया जाता है।उनहें निषेधवाचक वाक्य कहते है।
जैसे

  • वह नहीं आएगा।
  • बोतल में शर्बत नहीं है।
  • उससे बात मत करो।
अन्य शब्दों में — इन वाक्यों में समान्य कथनों को नकारा जाता है। हिंदी में प्रायः नही, मत, तथा लगाकर निषेधात्मक वाक्य बनाए जाते हैं। कथात्मक वाक्यों को नहीं लगाकर निषेधात्मक वाक्य बनाया जाता है।  जैसे
कथात्मक निषेधात्मक वाक्य
  •  आज फिल्म नहीं दिखाई जाएगी।
  • प्रधानमंत्री अमेरिका नहीं जा रहे ।
  • किताब मेज पर नहीं हैं।
आज्ञार्थक निषेधात्मक वाक्य
  •  मेरे सामने झूठ मत बोलो ।
  • देर रात तक मत जागा करो।
  • आपस में झगडा मत करना।
इच्छार्थक निषेधात्मक वाक्य
  •  मैं चाहता हूॅ कि आप कभी सफल न हो ।
  • तुम्हें कभी नौकरी न मिले ।

संभावनार्थक निषेधात्मक वाक्य

  • शायद रेलगाडी समय पर न आए।
  • हो सकता है आज बारिश न आए।

आज्ञावाचक/आज्ञार्थक/विधिवाचक– जिन वाक्यों में वक्ता किसी को आज्ञा, आदेश,अनूमति, निवेदन,देता है,या बोध होता है। उन्हें आज्ञावाचक या विधिवाचकवाक्य कहा जाता है। जैसे-

  • पुस्तकालय में बात मत करो
  • जाइए,जल्दी किजिए।
  • यह फाइल प्रंबधक तक पहुॅंचाओ।
  • कृपया सम्मान—समारोह में मुख्य—अतिथि के रूप में पधारें।
  • हमारी प्रार्थना स्वीकार करें।
प्रश्नवाचक/प्रश्नार्थक :-  जिन वाक्यों में वक्ता के द्वारा कोई प्रश्न पूछा जाता है। , उन्हें प्रश्नवाचक कहते है,
अन्य शब्दों में– जिन वाक्यों से प्रश्न पूछने करने के भाव का बोध होता है। उन्हें प्रश्नवाचक कहते है,
जैसे-
  • सोहिमा किस कक्षा में पढती है।
  • –संभव को लाने कौन गया है।
  • रमेश कहॉ जाएगा?
  • आपको किसका डर है?
  • अभी कौन आया है?
5).  इच्छावाचक/इच्छार्थक :- जिन वाक्यों से इच्छा,  आशीष एंव शुभकामना, अभिशाप, आशीर्वाद आदि का भाव प्रकट किया जाता है।,इन्हें इच्छावाचक वाक्य कहते है। जैसे :-
  •  तुमहारा कल्याण हो।
  • आपकी यात्रा सफल हो।
  • ईश्वर तुम्हें दीर्घायु हो।
  • आज तो मैं केवल फल खाउगॉ।
6). संदेहवाचक/संदेहार्थक /संभावनार्थक —वाक्यों से कार्य होने के प्रति संदेह और सभांवना का बोध होता है।,
उन्हें संदेहवाचक वाक्य कहते है।
अन्य शब्दों में -इन वाक्यों में वक्ता कार्य के होने या न होने के बारे में संदेह या संभावना व्यक्त या प्रकट की जाती है।
जैसेः-
  • दोनों परिवारों में पहले सा प्रेम स्थापित हो।
  • आपको नौकरी मिल जाए।
  • बारिश आ जाए, तो अच्छा है।
  • निराला पुस्तक मिलने पर बधाई ।
7. विस्मयवाचक/विस्मयार्थकः-
जिन वाक्यों सें शोक, आश्चर्य, हर्ष, विस्मय, घृणा,को्रध  आदि मनोभावों को व्यक्त किया जाता है या अभिव्यक्ति  होती है तथा वाक्य के प्रारंभ में विस्मयादिसूचक अव्ययों का प्रयोग किया जाता है,उन्हें विस्मयवाचक वाक्य कहते है,जैसेः-
  •  हाय उसके माता-पिता दोनों ही चल बसे।
  • शाबाश तुमने बहुत अच्छा काम किया ।
  • वाह कितना बढिया भोजन बनाया है।
  • अरे यह क्या कर रहे है?
  • सावधान! सडक निर्माण कार्य चल रहा है।
  • राम राम! बुढे ने पुत्री की उम्र की लडकी से विवाह कर लिया।
8. सकेंतवाचक या शर्तवाची वाक्यः
जिन वाक्यों से शर्त संकेत का बोध होता है। यानी एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है,उन्हें संकेतवाचक वाक्य कहते है,
अन्य शब्दों में —जिन वाक्यों में क्रिया के विषय में शर्त का बोध हों उन्हें सकेंत वाचक वाक्य कहते है।

सरल शब्दों में
इन वाक्यों में किसी  न किसी शर्त को पूरा करने का कार्य किया जाता है। अतःइन वाक्यों को शर्तवाची वाक्य भी कहते है।  जैसे :-
  •  यदि विमान का किराया देंगे तो ही मै हैदराबाद जाउगॉ।
  • यदि तुम परिश्रम करोगे तो अवश्य सफल होगे ।
  • अगर उसने शादी की होती तो आज इस तरह भटकना न पडता ।
  • अगर मीरा मेरी बात मानेगी तो मैं उसका काम अवश्य करूगॉ

2). रचना के आधार पर वाक्य भेद :-

1). सरल वाक्य
2). जटिल वाक्य
1). सरल वाक्य या साधरण वाक्य:-.  जिन वाक्यों में केवल एक क्रिया या क्रिया पदबंध होता है सरल वाक्य कहलाते हैं जैसे – चपरासी पॅंहुच गया।
सरल वाक्य के अन्य अर्थ
  • जिन वाक्य में एक ही क्रिया होती है, और एक कर्ता होता है, वे साधारण वाक्य कहलाते है।
  • सरल वाक्यों में कर्ता से अधिक हो सकते है। पंरतु विधेय और क्रिया एक ही हो सकते है।
  • इन वाक्यों में केवल एक ही उददेश्य और एक ही विधेय होता है।
  • सरल वाक्यों में एक ही समापिका क्रिया करता है,किया,करेगा आदि होती है।
जैसे –
  •  सोनू ने मकान बनवाया ।
  • इंद्रप्रकाश को पुस्तकें दो।
  • रेलगाडी रूकी।
  • नर्तकी ने आकर्षक भरतनाटय.प्रस्तुत किया ।
  • बस चालाक ने बस बहुत तेज चलाई।
  • इन वाक्यों में एक-एक क्रिया बनवाया, दो, रूकी, चलाई, और िकया आई । इसलिए ये सरल वाक्य है।
 इन वाक्यों में एक ही क्रिया होती है, जैसे.
  • मुकेश पढ़ता है। राकेश ने भोजन किया।
सरल वाक्य(simple Sentance)—
एक क्रिया पदबंध वाले वाक्य सरल वाक्य कहलाते हैं। नीचे दिए सभी वाक्यों में केवल एक ही क्रिया पदबंध का प्रयोग हुआ है। अतः ये सभी वाक्य ’’सरल वाक्य’’ के उदहारण हैं-
  •  आज स्कूल बंद रहेगा।
  • लडके पंतग उडा रहे है।
  • बंदर पेड से लडका हुआ है।
  • महिलाएं मंदिर में पूजा कर रहे है।

2.जटिल वाक्यः-जिन वाक्यों में एक से अधिक क्रिया पदबंध होते है, रचना की दृष्टि से वह वाक्य जटिल वाक्य कहलाते है।

यदि किसी वाक्य में एक से अधिक क्रिया-पदबंध आते हैं तो इसका  अर्थ यही है कि उसकी रचना एक से अधिक सरल वाक्यों के मेल  से हुई होगी, जैसे –

वाक्य -1 मॉ खाना बना रही है और बच्चे खेल रहे हैं।
जटिल वाक्य को दो भागों में विभाजित किया गया है।
  •  संयुक्त वाक्य
  •   मिश्र वाक्य
1. संयुक्त वाक्यः-जिस जटिल वाक्य के सभी उपवाक्य स्वतंत्र या समानाधिकृत उपवाक्य होते है।उसे संयुक्त वाक्य कहा जाता है।
समानाधिकृत शब्द का अर्थ है— समान अधि
कार वाला 
संयुक्त वाक्य के सभी उपवाक्य स्वतंत्र और समान स्तर के होतें है।जो और, अथवा,या,एंव,सो,इसलिए,पो,वरना,अन्यथा,लेकिन,किंतु परंतु आदि समुच्चयबोधक अव्ययों/ योजकों से जुड़े रहते है।
जैसे.
  • सच—सच बताओ अन्यथा/वरना सजा मिलेगी।
  • सब लोग वहॉं पहुचें और/तथा नारे लगाने लगे।
  • तुम चलना चाहोगें या/ अथवा यही आराम करोगें।
  • मैने उसे बहुत समझाया लेकिन उसने मेरी एक न सुनी।
  • मैं नहा रहा था इसलिए आपका फोन नहीं सुन पाया ।
  • मैं आपका काम कर दूॅंगा लेकिन/पर आनको मुझे कुछ रूपये उधार देने होगें।
  • वह शादी तो करेगा पर/पंरतु घरजमाइ बनकर नहीं रहेगा।
ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैए एक पूर्ण वाक्य में किन्हीं दो स्वतंत्र सरल वाक्यों को रखा गया है। ये वाक्य एक दुसरे पर आश्रित नहीं हैं। इन दोनों वाक्यों को किन्तु अव्यय सयोंजक से जोड़ा गया है।
संयुक्त वाक्य के चार प्रकार होते हैं inko bnana h
.
1).संयोजक संयुक्त वाक्य      इसके उपवाक्यों में परस्पर मेल प्रकट होता है। जैसे:-
  • रचना बोल रही है और सीमा सुन रही है।।
2). विभाजक संयुक्त वाक्य  :- इसके उपवाक्यों में परस्पर विरोध उत्पन्न होता है। जैसे :-
  • रीमा गा रही है, पर सीमा चुप है।
3).विरोधसूचक – विकल्पसूचकसंयुक्त वाक्य  :-  इसके दों उपवाक्यों में प्रकट होता है। जैसेः-
  • तुम कुछ तो कहो या यहॉ से चले जाओ
4). परिमाणवाचक संयुक्त वाक्य  :-  इसके एक उपवाक्य दूसरे उपवाक्य का परिणाम या फल होता है, जैसः-
  • मोहन ने कठिन परिश्रम किया इसलिए पास हो गया ।

मिश्रित वाक्य ..

जिस  जटिल वाक्य में एक ’प्रधान उपवाक्य’’ तथा शेष उस पर ’’आश्रित उपवाक्य’’ होते है। पहले को मुख्य वाक्य और दूसरे को  सहायक वाक्य भी कहते हैं। इनमें एक मुख्य उद्देश्य और मुख्य विधेय के अलावा एक से अधिक समापिका क्रियाएँ होती हैं,
जैसे –
  •  गॉधी जी ने कहा कि सदा सत्य बोलो।
  • तुम वहॉ चले जाओ, जहॉ बस खडी है।
  • जिसने गिलास तोडा है, खडा हो जाए।
  • ये आश्रित उपवाक्य किसी ना किसी योजक से जुडे होते है।

अतः हम कह सकते है किः  वह वाक्य जिसमें एक मुख्य (प्रधान) उपवाक्य हो  तथा एक से अधिक  आश्रित उपवाक्य हो, मिश्र वाक्य कहलाता है- तथा जो आपस में ‘कि’ ‘जो’ ‘क्योंकि’ ‘जिना’ ‘उतना’ ‘जैसा’ ‘वैसा’ ‘जब’ ‘तब’ ‘जहाँ’ ‘वहाँ’ ‘जिधर’ ‘उधर’ ‘अगर/यदि’ ‘तो’ ‘यद्यपि’ ‘तथापि’ आदि से मिश्रित(मिले.जुले) हों उन्हें मिश्रित वाक्य कहते हैं। हमने इन वाक्यों में आए मुख्य और आश्रित उपवाक्यों को अलग अलग करके दर्शाया गया है।

मुख्य उपवाक्य  औरआश्रित उपवाक्य

  •  सिपाही ने उस युवक को पीटा जिसने (आश्रित उपवाक्य)जेब काटी थी।
  •  अटलबिहारी वाजपेयी ने कहा था कि (आश्रित उपवाक्य)हम शांति और युद्ध दोनों के लिए तैयार है।
  •  बिस्मिल्लाह खॉ वही शहनाईवादक हैं जिन्हें(आश्रित उपवाक्य) भारत रत्न से अलकृंत किया गया।
  •  यह वही मकान हैजिसमें (आश्रित उपवाक्य)बालमुकुंद गुप्त का जन्म हुआ था।
  • अशोक महता मुख्य अतिथि थे  जो  (आश्रित उपवाक्य)प्रसिद्ध साहित्यकार है।
  •  स्वामी गणेशानंद ने कहा था कि (आश्रित उपवाक्य) शाकाहारी रहो और आनंदपूर्वक जियो।

मुख्य और आश्रित उपवाक्यों को पहचानना

1). वाक्य में मुख्य उपवाक्य की क्रिया ही मुख्य क्रिया होती है।
2). वाक्यों में आए आश्रित उपवाक्यों का आरंभ अधिकांशः समुच्चयबोधक शब्दों से होता है। जैसे-जिसने, कि, जिन्हें, जिसमें, जहॉ, जब, तो, क्योंकि, यदि, परन्तु, तब आदि।
3). आश्रित उपवाक्य के आरंभ, मध्य, या अंत, में भी रहती है।  उदहारण के लिए
  • जिसने बालक की जान बचाई , वह युवती कुंदन कालोनी में रहती है।
  • वह युवती जिसने बालक की जान बचाई , कुंदन कालोनी में रहती है।
  • वह युवती कुंदन कालोनी में रहती है, जिसने बालक की जान बचाई ।
पहले वाक्य में आश्रित  उपवाक्य जिसने बालक की जान बचाई वाक्य के आरंभ में आया है।दूसरे वाक्य में ये मध्य  में आया है। तीसरे वाक्य में अंत में आया है।

आश्रित उपवाक्य के भेद

  • संज्ञा उपवाक्य
  • विशेषण उपवाक्य
  • क्रिया-विशेषण उपवाक्य
उपवाक्य वाक्य :-
यदि किसी एक वाक्य में एक से अधिक समापिका क्रियाएॅ होती है। तो वह वाक्य उपवाक्य में बॅट जाता है और उसमें जितनी भी क्रियाएॅ होती हैं उतने  ही उपवाक्य होते है इन उपवाक्यों में से जो वाक्य का केंद्र होता है। उसे मुख्य या प्रधान उपवाक्य कहते है। और शेष आश्रित उपवाक्य कहते है। आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते है।

1). संज्ञा उपवाक्यः- जो आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया के कर्ता, कर्म, अथवा क्रिया पूरक के रूप में प्रयुक्त हों, उन्हें संज्ञा उपवाक्य कहते है,

सरल शब्दों में कह सकते है-  किसी वाक्य में जो आश्रित उपवाक्य मुख्य उपवाक्य की संज्ञा के स्थान पर आते है, उन्हें संज्ञा उपवाक्य कहते है जैसेः-

  •  दादा जी कहा करते थे कि आलोक महान व्यक्ति बनेगा।
  •  कौशल्या नहीं आएगी, सुमित्रा जानती थी।
इन वाक्यों में संज्ञा  उपवाक्य हैः- कि आलोक महान व्यक्ति बनेगा’ और कौशल्या नहीं आएगी,
  •  मैं जानता हूॅ कि वह ईमानदार है
  • उसका विचार है- कि राम सच्चा आदमी है।
  • रश्मि ने कहा कि उसका भाई पटना गया है।

संज्ञा  उपवाक्यों कें  आरम्भ में प्रायः कि शब्द आता है। ये  मुख्य उपवाक्य से कि द्वारा जुडे होते है। यदि संज्ञा उपवाक्य आरम्भ में आ  जाते हैं तो इनके साथ कि का प्रयोग किया जाता है।

संज्ञा  उपवाक्य कर्ता और कर्म दोनों के स्थान पर दिया जाता है। जैसे :-

 

 कर्ता के स्थान पर संज्ञा उपवाक्य
  •  राधा जानती है कि सोना को ही पुरस्कार मिलेगा ।
  • सास का यह सोचना कि बहू झगडालु है।सत्य सिद्ध हुआ
  •  मुरलीधर का यह कहना है कि अमित पास हो जाएगा।
कर्म के स्थान पर संज्ञा उपवाक्य
  •  गुरू जी कहते हैं कि तुम्हें प्रथम आना चाहिए ।
  •  कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें पूरा वेतन दिया जाए।
  • अध्यापिकाएॅ चाहती हैं कि वे पिकनिक पर जाए।
  • कमला ने बताया कि तुम कविता भी लिखते है।
पहचान :- संज्ञा उपवाक्य का प्रारंभ कि’ से होता है।
2. विशेषण उपवाक्यः
जब कोई आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की संज्ञा पद की विशेषता बताते है, उन्हें विशेषण उपवाक्य कहते हैं,
  • जैसे- मैंने एक व्यक्ति को देखा जो बहुत मोटा था
  • वे फल कहॉ है जिन को आप लाए थे।इन वाक्यों में रगींन अक्षरों वाले अंश विशेषण उपवाक्य हैं।
पहचान :- विशेषण उपवाक्य का प्रारंभ जो अथवा इसके किसी रूप- जिसे, जिस को, जिसने, जिन से को आदि से होता है। 
3. क्रिया-विशेषण उपवाक्य :-

जो आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया की विशेषता बताए, उसे क्रियाविशेषण उपवाक्य कहते हैं।  ये प्रायः क्रिया का काल, स्थान, रीति, परिणाम, कारण आदि के सूचक क्रियाविशेषणों के द्वारा प्रधान वाक्य से जुडे रहते है, जैसे –

  • मैं उससे नहीं बोलता, क्योंकि वह बदमाश है।
  • जब वर्षा हो रही थी तब मैं कमरे में था।
  • जहॉ-जहॉ वे गए, उनका स्वागत हुआ।
  • यदि मैंने परिश्रम किया होंता तो अवश्य सफल होता
  • यद्पि वह गरीब है, तथापि ईमानदार है।
  • इन वाक्यों में रंगीन अक्षरों वालें अंश क्रियाविशेषण उपवाक्य  हैं।
पहचानः- क्रियाविशेषण उपवाक्य का प्रारम्भ ’क्योंकि ’जितना’ जैसा, जब, जहॉ, जिधर, अगर/यदि, यद्पि, आदि से होता है।

क्रिया-विशेषण उपवाक्यों के भेद

क्रिया- विशेषण उपवाक्यों के पॉच भेद होते है।
  1.  कालवाचक उपवाक्य
  2.  रीतिवाचक उपवाक्य
  3.  स्थानवाचक उपवाक्य
  4.  परिणाम उपवाक्य
  5. कार्य-कारणवाचक या परिणामवाचक उपवाक्य
1). कालवाचक उपवाक्य :– ऐसे क्रिया-विशेषण उपवाक्य जिनमें समय काल का बोध होता है। उन्हें कालवाचक उपवाक्य कहते है।  जैसे :-
  •  जब पिताजी समाचार-पत्र पढ रहे थे तब मैं टी0 वी0 देख रही थी
  • जब तक तुम नृत्य करोगी दर्शक बैठे रहेगें।
  • जब बिजली चली गई सभा विसर्जित हो गई।
2). रीतिवाचक उपवाक्य :- ऐसे क्रिया-विशेषण उपवाक्य जिनसे रीति या ढंग की विशेषता का बोध होता है। उन्हें रीतिवाचक उपवाक्य कहते है।  जैसे :-
  •  जैसा पत्नी कहती है वही करता है।
  •  जैसी मेरी पसंद थी दुकान वैसी ही मिल गई।
  •  जैसा बनाने के लिए कहा था चित्र वैसा ही बन गया ।

3. स्थानवाचक उपवाक्य :- ऐसे क्रिया-विशेषण उपवाक्य जिनमें स्थान का बोध होता है। उन्हें स्थानवाचक उपवाक्य कहतें है। जैसे

  • जहॉ तक दृष्टि जाती है।प्रकृति की अनुपम यछटा बिखरी पडी है।
  • यह वही जेल है जहॉ भष्टाचारी नेता रखे जाते है।
  • जहॉ खेत थे वहॉ बहुमजिलें भवन बन गए है।

 4).परिणामवाचक उपवाक्य :- ऐसे क्रिया-विशेषण उपवाक्य जिनमें परिणाम का बोध होता है। उन्हें परिणामवाचक उपवाक्य कहतें है।जैसेः-

  •  जितनी चीनी पडी थी उतनी चटनी में डाल दी।
  • जैसे जैसे शरबत पियोगे वैसे वैसे और मॉगोगे।
  • जतनी रबडी आई थी उतनी  प्ररेणा खा गई।
  • जितना पानी जमा था उतपा बह गया।

5).कार्य-कारणवाचक या परिणामवाचक उपवाक्य :– ऐसे क्रिया-विशेषण उपवाक्य जिनसे कार्य होने के कारणों का बोध होता है। उन्हें कार्य-कारणवाचक या परिणामवाचक उपवाक्य कहतें है।जैसेः-

  •  यदि कूलर ठीक होता तो गर्मी नहीं लगती
  • यदि घायल को समय पर  अस्तपताल ले जाते तो वह बच जाता।
  • यद्यपि गुंजन  तेज दौडी तथापि प्रथम न आ स  के।
  • सीमा खूब पढ रही है। ताकि मेडिकल में प्रवेश ले सके ।

वाक्य रचनांताण/रूपांतरण

 

एक प्रकार के वाक्य का दूसरे प्रकार के  वाक्य परिवर्तन  रचनांतरण कहलाता है।
जैसे :-
  •  मैं बाजार जाउॅगा -विधान वाचक
  • मैं बाजार  नहीं जाउॅगा -निषेध वाचक
वाक्य-रचनांतरण निम्न रूपों में होता है
  1.  संरचना की दृष्टि से
  2. अर्थ की दृष्टि से
  3. वाक्य की दृष्टि से

1. संरचना की दृष्टि से वाक्य-रचनांतरण के तीन भेद होते है।

 

  1. .सरल वाक्य
  2. संयुक्त वाक्य
  3. मिश्र वाक्य

इन वाक्यों का एक-दूसरे में परिवर्तन हो जाता है।यह परिवर्तन निम्न रूपों में होता है।

 

  1. सरल वाक्य का संयुक्त वाक्य में रचनांतरण
  2. सरल वाक्य का मिश्र वाक्य में रचनांतरण
  3. संयुक्त वाक्य का सरल वाक्य में रचनांतरण
  4. संयुक्त वाक्य का मिश्र वाक्य में रचनांतरण
  5. मिश्र वाक्य का सरल वाक्य में रचनांतरण
  6. मिश्र वाक्य का संयुक्त वाक्य में रचनांतरण

सरल वाक्यों का संयुक्त वाक्यों में रचनांतरण

 

क). सरल वाक्य :- सरस्वती ने नहाकर पूजा की।
क) संयुक्त वाक्य :- सरस्वती नहाई और पूजा की।
ख). सरल वाक्य :- बच्चे नाश्ता करके विद्यालय गए।
ख).संयुक्त वाक्य :- बच्चों ने  नाश्ता किया और विद्यालय गए।
ग) सरल वाक्य :- लक्ष्मी के जाते ही सीमा आ गई।
ग) संयुक्त वाक्य :- लक्ष्मी गई और सीमा आ गई।
घ). सरल वाक्य :- नेता भाषण देकर चला गया।
)संयुक्त वाक्य :- नेता  ने भाषण  दिया और चला गया।
ड). सरल वाक्य :- मॉ ने बेटी को दूध पिलाकर सुलाया।
ड)संयुक्त वाक्य :-  मॉ ने बेटी को दूध पिलाया और  सुलाया।
च).सरल वाक्य  :- राधा सास से मिलने के लिए दिल्ली गई।
च). संयुक्त वाक्य :-  राधा ने सास से मिलना था इसलिए दिल्ली गई।

सरल वाक्यों का मिश्र वाक्यों में रचनांतरण

 

सरल वाक्य-– उसने अपने मित्र का पुस्तकालय खरीदा।
मिश्र वाक्य-– उसने उस पुस्तकालय को खरीदा- जो उसके मित्र का था।
सरल वाक्य— अच्छे लड़के परिश्रमी होते हैं।
मिश्र वाक्य-– जो लड़के अच्छे होते है- वे परिश्रमी होते हैं।
सरल वाक्य— लोकप्रिय कवि का सम्मान सभी करते हैं।
मिश्र वाक्य– जो कवि लोकप्रिय होता है- उसका सम्मान सभी करते हैं।
इस प्रक्रिया के ठीक विपरीत मिश्र वाक्यों को साधारण वाक्यों में बदला जा सकता है। एक उदाहरण देखिए.
मिश्र वाक्य–. जो लोग नियमित रूप से व्यायाम करते है- वे सदैव स्वस्थ रहते हैं।
साधारण वाक्य-— नियमित रूप से व्यायाम करने वाले लोग सदैव स्वस्थ रहते हैं।
3. संयुक्त वाक्य का सरल वाक्य में रचनांतरण
1). संयुक्त वाक्यः– पूनम ने कविता लिखी और पुरस्कार प्राप्तकिया।
1).सरल वाक्यः- पूनम ने कविता लिखकर पुरस्कार प्राप्त किया।
2). संयुक्त वाक्यः-बिजली नहीं थी इसलिए अंधेरा था।
2).सरल वाक्यः–   बिजली न होने के कारण अंधेरा था।
3). संयुक्त वाक्यः-   दर्शाना बहुत मोटी है इसलिए चल नहीं पाती है।
3). सरल वाक्यः– बहुत मोटी होने के कारण दर्शाना चल नहीं पाती
4) . संयुक्त वाक्यः– दादा जी आए और टेलिविजन देखने लगे।
4).  सरल वाक्यः- दादा जी आकर टेलिविजन देखने लगे।
5). संयुक्त वाक्यः-पानी गिरा और पुस्तक गीली हो गई।
5).सरल वाक्यः– पानी गिरने पर पुस्तक गीली हो गई।
6).संयुक्त वाक्यः– रमेश धनी है परंतु कंजूस है।
6).सरल वाक्यः– धनी होने पर भी रमेश कंजूस है।
4. संयुक्त वाक्य का मिश्र वाक्य में रचनांतरण

 

संयुक्त वाक्यः– नेहा शोर मचा रही थी इसलिए डॉट पडी।
मिश्र वाक्यः–  क्योंकि नेहा शोर मचा रही थी इसलिए डॉट पडी।
संयुक्त वाक्यः– सुरेश को रूपए मिले और उसने लौटा दिए।
मिश्र  वाक्यः– सुरेश को ज्योंहि रूपए मिले उसने लौटा दिए।
संयुक्त वाक्यः– समय हो गया है परंतु कंडेक्टर बस नही चला रहा ।
मिश्र वाक्यः– यद्यपि समय हो गया है तथापि कंडेक्टर बस नही चला रहा ।
संयुक्त वाक्य— सूर्य निकला और कमल खिल गए।
मिश्र वाक्य— जब सूर्य निकला, तो कमल खिल गए।
संयुक्त वाक्य— छुट्टी की घंटी बजी और सब छात्र भाग गए।
मिश्र वाक्य.—- जब छुट्टी की घंटी बजीए तब सब छात्र भाग गए।
5. मिश्र वाक्यों  का  सरल वाक्यों में रचनांतरण

 

मिश्र वाक्यः– जिनके पास टिकट नहीं है- वे बस से उतर जांए

सरल वाक्यः–  बेटिकट बस से उतर जांए

मिश्र वाक्यः– कोई ऐसा गीत गाओ जिसमें देश प्रेम की भावना हों।

सरल वाक्यः– देश प्रेम की भावना का कोई गीत गाओ ।

मिश्र वाक्यः– नानी जी कहती है कि मै अध्यापिका बनूॅ।

सरल वाक्यः– नानी जी मुझे अध्यापिका बनने के लिए कहती है।

मिश्र वाक्य.– उसने कहा कि मैं निर्दोष हूँ।

सरल वाक्य.— उसने अपने को निर्दोष घोषित किया।

मिश्र वाक्य–. मुझे बताओ कि तुम्हारा जन्म कब और कहाँ हुआ था।

सरल वाक्य–. तुम मुझे अपने जन्म का समय और स्थान बताओ।

मिश्र वाक्य. जो छात्र परिश्रम करेंगेए उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी।
सरल वाक्य. परिश्रमी छात्र अवश्य सफल होंगे।

6. मिश्र वाक्यों का संयुक्त वाक्यों में रचनांतरण

 

मिश्र वाक्यः– जब गोमती घर पहॅुची बेटी रो रही थी।

संयुक्त वाक्यः– गोमती घर पहॅुची  तो बेटी रो रही थी।

मिश्र वाक्यः– यदि घुमने चलना है तो तैयार हो जाओ।
संयुक्त वाक्यः– घुमने चलना है इसलिए तैयार हो जाओ।
मिश्र वाक्य– जब सूर्य निकला- तो कमल खिल गए।

संयुक्त वाक्य सूर्य निकला और कमल खिल गए।

मिश्र वाक्य-.   जब छुट्टी की घंटी बजीए तब सब छात्र भाग गए।
संयुक्त वाक्य.– छुट्टी की घंटी बजी और सब छात्र भाग गए।

अर्थ की दृष्टि से वाक्य में परिवर्तन

 अर्थ की दृष्टि से वाक्य आठ प्रकार के होते है।-
  1. विधानवाचक
  2. निषेधवाचक
  3. विस्मयवाचक
  4. संदेहवाचक
  5. आज्ञावचक
  6. संकेतवाचक
  7. इच्छावाचक
  8. प्रश्नवाचक।
इन सब वाक्य-भेदों में विधानवाचक को मूलाधार रचना माना जाता हैं इनमें कुछ अर्थ वैशिष्ट्य के कारण अन्य वाक्य भेद बनते है।
इन्हें इस रूप में देखा जा सकता है-
  1. विधानवाचक- कुणाल पुस्तक पढता है
  2.  निषेधवाचक  – कुणाल पुस्तक नहीं पढता है।
  3.  प्रश्नवाचक- क्या कुणाल पुस्तक पढता है।
  4.  आज्ञावचक- कुणाल पुस्तक पढो।
  5.  इच्छावाचक- कुणाल पुस्तक पढे।
  6.  विस्मयवाचक – अरे! कुणाल पुस्तक पढता है।
  7. संदेहवाचक- कुणाल पुस्तक पढता होगा।
  8.  संकेतवाचक- यदि कुणाल पुस्तक पढे तो……..

वाच्य

वाच्य को अग्रेंजी में (voice) कहते है। जिसमें कर्ता कर्म और भाववाच्य तीनों को शामिल किया गया है।

इस प्रकार :- उस रूप- रचना को वाच्य कहते हैं जिससे यह पता चलता है कि क्रिया को मूल रूप से चलाने वाला कर्ता है-कर्म है या कोई अन्य घटक ।

वाच्य तीन  प्रकार के होतेहै।
  1.  कृर्त वाच्य
  2. कर्म वाच्य
  3. भाव वाच्य  इन सभी के द्वारा वाच्य परिवर्तन किए जाते हैं।

3. वाक्य की दृष्टि से वाक्य में परिवर्तन /रचनांतरण

1).कर्तृवाचक से कर्मवाचक वाक्य में रचनांतरण

कर्तृवाचक वाक्य—— प्रधानमंत्री उद्घाटन करते है।
कर्मवाचक वाक्य——–प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन किया गया ।

कर्तृवाचक वाक्य———-मजदूर काम कर रहें है।
कर्मवाचक वाक्य——– मजदूरों से काम करवाया जा रहा है।

कर्तृवाचक वाक्य——-डाकिया डाक वितरित करता है।
कर्मवाचक वाक्य—— डाकिया द्वारा डाक वितरित किया जाता है।

2.विधिवाचक से निषेधवाचक वाक्य में रचनांतरण

विधिवाचक वाक्य—-–मैं बाजार जाउगॉं
निषेधवाचक.———- मैं बाजार नहीं जाउगॉं

विधिवाचक वाक्य——. शशिकांत कार्यालय जाएग।
निषेधवाचक वाक्य.——-शशिकांत कार्यालय नहीं जाएग ।

विधानवाचक वाक्य से निषेधवाचक वाक्य में परिवर्तन

विधानवाचक वाक्य.— ठंडी हवा चल रही है।
निषेधवाचक.—- ठंडी हवा नहीं चल रही है।

 

विधानवाचक वाक्य-——. उससे बात किजिए।
निषेधवाचक—–.——- उससे बात मत किजिए।

विधानवाचक वाक्य——— महेश खाना बनाएगा।
निषेधवाचक————– महेश खाना नहीं बनाएगा।

विधानवाचक वाक्य-——–.सुरेश राजस्थान से अभी लौटा है।
निषेधवाचक————. सुरेश राजस्थान से अभी नहीं लौटा है।

विधानवाचक वाक्य———– मोनु की नौकरी लग गई है।
निषेधवाचक-—————. मोनु की नौकरी अभी नहीं लगी।

विधानवाचक वाक्य———— उमांकात रसगुल्ले लाया।
निषेधवाचक—————– उमांकात रसगुल्ले नहीं लाया ।

विधानवाचक वाक्य———— बाग में फूल खिले हैं।
निषेधवाचक—————– बाग में फूल नहीं खिले है।

4 प्रश्नवाचक वाक्य से .निश्चयवाचक वाक्य में परिवर्तन

प्रश्नवाचक———– संभव को लाने कौन गया है?
निश्चयवाचक———-संभव को लाने गया है।
.
प्रश्नवाचक–.———- क्या राधा पहली कक्षा में पढती है?
निश्चयवाचक———— राधा पहली कक्षा में पढती है।

प्रश्नवाचक———- सोहन ने क्या खानाा खा लिया है?
निश्चयवाचक——–-सोहन ने खाना खा लिया है।

प्रश्नवाचक———— क्या प्रसाद विमलिया पहुॅच गया?
निश्चयवाचक———–.प्रसाद विमलिया पहुॅच गया।

प्रश्नवाचक-———– तुम कब चलोगें?
निश्चयवाचक———-. तुम चलोगें।

प्रश्नवाचक———— मीरा बांका किसके साथ जाएगी?
निश्चयवाचक-———-मीरा बांका साथ जाएगी।

 

5.विस्मयादिबोधक वाक्य से विधानवाचक वाक्य में परिवर्तन

विस्मयादिबोधक——– वाह! कितना बढ़िया भोजन बनाया है।
विधानवाचक वाक्य——-. बहुत ही स्वादिष्ट भोजन बनाया है।

विस्मयादिबोधक–———– उफ! कितनी गरमी है।
विधानवाचक वाक्य———-आज अधिक गरमी है।

विस्मयादिबोधक———–शबाश! तुमने तो कमाल कर दिया।
विधानवाचक वाक्य———-क्रिकेट खेल में आज कमाल हो गया है।

विस्मयादिबोधक——– अरे! तुम आ गए।
विधानवाचक वाक्य.—- आपके आने की खुशी हुई ।

विस्मयादिबोधक. ——–हाय! यह क्या हो गया।
विधानवाचक वाक्य——-. मुझसे यह गलत हो

वाक्य प्रयोग के नियम/वाक्यगत प्रयोग

वाक्य कुछ वर्ण. शब्द तथा पदो के मेल से बनते है। जो बिना शब्द और पद के अधूरे है। वाक्य का सारा  श्रृंगार और सौंदर्य शब्द और पद पर निर्भर या आश्रित है।  प्रयोग सम्बन्धी कुछ आवश्यक निर्देश निम्रलिखित हैं.
कुछ आवश्यक निर्देश
1). वाक्य  में शब्दों का प्रयोग करते समय व्याकरण सम्बंधी नियमों का पालन करना चाहिए।
2). वाक्य में वाक्य रचना करते समय वाक्यों को अधूरा पहीं रखना चाहिए।
3).जब हम वाक्य प्रयोग करते है तो उसमें एक ही भाव प्रकट हो।
4). वाक्य.योजना में ही स्पष्ट उचित शब्दावली तथा शैली सम्बंधी शिष्टता का समावेश होना चाहिए ।
5). वाक्य में सभी शब्दों का आपस में घनिष्ठ सम्बंध हो ताकि वाक्य में सभी शब्दों का एक ही समय में एक ही स्थान में और एक अर्थ के साथ प्रयोग होना चाहिए ।
6) वाक्य में पुनरुक्तिदोष नहीं होना चाहिए। शब्दों के प्रयोग में औचित्य पर ध्यान देना चाहिए।
7). वाक्य में उसके सही वर्ण- ध्वनि तथा उसके अर्थ पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
8) वाक्य में उन शब्दों या पदों का प्रयोग नहीं होना चाहिए जो व्यर्थ के हों हमेशा शुद्ध शब्दावली का प्रयोग हो।
9) वाक्य.योजना में हमें जहां जहां वाक्यों ् मुहावरों और लोकोक्तियों की आवश्यकता होती है वहां वहां प्रयोग करना चाहिए।
10). वाक्य में उन शब्दों का प्रयोग न हो जो शब्द अप्रचलित हों
11. वाक्य में एक ही व्यक्ति या वस्तु के लिए कहीं ‘यह’ और कहीं ‘वह’, कहीं ‘आप’ और कहीं ‘तुम’, कहीं ‘इसे’ और कहीं ‘इन्हें’, कहीं ‘उसे’ और कहीं ‘उन्हें’, कहीं ‘उसका’ और कहीं ‘उनका’, कहीं ‘इनका’ और कहीं ‘इसका’ प्रयोग नहीं होना चाहिए।

उपवाक्य और पदबंधः

उपवाक्य से छोटी इकाई पदबंध है’’मेरा भाई मोहन बीमार है, उपवाक्य हैऔर इसमें ’’मेरा भाई मोहन संज्ञा पदबंध है। पदबंध में अधूरा भाव प्रकट हो भी सकता है किन्तु उपवाक्य में पूरा भाव प्रकट हो भी सकता है और कभी – कभी नहीं भी। उपवाक्य में क्रिया अनिवार्य रहती है जबकि पदबंध में क्रिया का होना आवश्यक नहीं। उदहारणः-
  •  रमेश की बहन शीला तेजी बस से गिर पडी और उसे कई चोटे आई ।
  • रमेश की बहन शीला तेजी से चलती बस से गिर पडी.
  • रमेश की बहन शीला
  • तेजी से चलती बस
  • गिर पडी

पदबंध :-

कई पदो ंके योग से बने वाक्याशों को, जो एक ही पद का काम करता है, ’’पदबंध’’ कहते है। पदबंध को वाक्यांश भी कहते हैं। जैसे-
  • 1. सबसे तेज दौडने वाला छात्र जीत गया।
  • 2. यह लडकी अत्यंत सुशील और परिश्रमी है।
  • 3. नदी बहती चली जा रही है।
  • 4. नदी कल-कल करती हुई बह रही थी।
उपर्युक्त वाक्यों में रंगीन छपे शब्द पदबंध है। पहले वाक्य के  सबसे तेज दौडने वाला छात्र में पॉच पद है, किन्तु वे मिलकर एक ही एक अर्थात संज्ञा का कार्य कर रहे है, दूसरे वाक्य के अत्यंत सुशील और परिश्रमी में भी चार पद है, किन्तु वे मिलकर एक ही पद अर्थात क्रिया का काम कर रहे है। चौथे वाक्य के कल -कल करती हुई, में तीन पद है, किन्तु वे मिलकर एक ही पद अर्थात क्रिया विशेषण का काम कर रहे है।

पदबंध के प्रकारः-

 1).संज्ञा पदबंध
 2).विशेषण पदबंध
  3). क्रिया पदबंध
4).क्रिया विशेषण पदबंध
1). संज्ञा पदबंधः
पदबंध का अतिम अथवा शीर्ष शब्द यदि संज्ञा हो और अन्य सभी पद उसी पर आश्रित हो तो वह ’’संज्ञा पदबंध’’ कहलाता है। जैसे –
अ. चार ताकतवार मजदूर इस भारी चीज को उठे पाए।
आ. राम ने लंका के राजा रावण को मार गिराया ।
इ. अयोध्या के राजा दशरथ के चार पुत्र थे ।
आसमान में उडता गुब्बारा फट गया
उपर्युक्त वाक्यों में रंगीन छपे शब्द ’संज्ञा पदबंध’ है,
2). विशेषण पदबंधः
पदबंध का शीर्ष अथवा अंतिम शब्द यदि विशेषण हो और अन्य सभी पद उसी पर आश्रित हो तो वह विशेषण पदबंध कहलाता है।
अ.. तेज चलने वाली गाडियॉ प्रायः देर से पहुचती है।
आ.. उस घर के कोने में बैठा हुआ आदमी जासूस है।
इ.. उसका घोडा अत्यंत सुंदर, फुरतीला और आज्ञाकारी है।
ई.. बरगद और पीपल की घनी छॉव से हमें बहुत सुख मिला।
 3).क्रिया पदबंधः
क्रियापदबंध में मुख्य क्रिया पहले आती है। उसके बाद अन्य क्रियाएॅ मिलकर एक समग्र इकाई बनाती है। यही क्रिया पदबंध है। जैसे :-
1). वह बाजार की ओर आया होगा ।
2). मुझे मोहन छत से दिखाई दे रहा है।
3). सुरेश नदी में डूब गया।
4). अब दरवाजा खोला जा सकता है।
4).क्रिया  विशेषण पदबंधः
यह पदबंध मूलतः क्रिया का विशेषण रूप होने के कारण प्रायः क्रिया से पहले आता है। इसमें क्रिया विशेषण प्रायः शीर्ष स्थान पर होता है, अन्य पद उस पर आश्रित होते है। जैसेः-
1). मैनें रमा की आधी रात तक प्रतीक्षा की।
2). उसने सॉप को पीट-पीटकर मारा ।
3). छात्र मोहन की शिकायत दबी जबान से कर रहे थे।
4). कुछ लोग सोते-सोते चलते है।

वाक्य.विग्रह(Analysis)

वाक्य.विग्रह:-
वाक्य के विभिन्न अंगों को अलग.अलग किये जाने की प्रक्रिया को वाक्य.विग्रह कहते हैं। इसे  वाक्य विभाजन या वाक्य विश्लेषण भी कहा जाता है।
सरल वाक्य का विग्रह करने पर एक उद्देश्य और एक विद्येय बनते है। संयुक्त वाक्य में से योजक को हटाने पर दो स्वतंत्र उपवाक्य यानी दो सरल वाक्य बनते हैं। मिश्र वाक्य में से योजक को हटाने पर दो अपूर्ण उपवाक्य बनते है।
 1).सरल वाक्य:-   1उद्देश्य + 1 विद्येय
2). संयुक्त वाक्य:- सरल वाक्य+  सरल वाक्य
3) मिश्र  वाक्य :- प्रधान उपवाक्य + आश्रित उपवाक्य

 वाक्य के अनिवार्य तत्व

वाक्य में निम्नलिखित छ तत्व अनिवार्य है.
  •  सार्थकता
  • योग्यता
  • आकांक्षा
  • निकटता
  • पदक्रम
  • अन्वय
1). सार्थकता:-  वाक्य का कुछ ना कुछ अर्थ अवश्य होता है। अतः इसमें सार्थक शब्दों का प्रयोग होता है। लेकिन कभी कभी वाक्य में निरर्थक शब्दों के कहीं कहीं प्रयोग की अभिव्यक्ति के कारण  वाक्यों का गठन कर बैठते है। जैसे.
  •  तुम बहुत बक.बक कर रहे हो।
  • चुप भी रहोगे या नहीं
इस वाक्य में  बक-बक निरर्थक-सा लगता है, परन्तु अगले वाक्य से अर्थ समझ में आ जाता है कि क्या कहा जा रहा है।
2).योग्यता –  इसका अर्थ है— क्षमता । 
शब्दों का सार्थक होने के साथ साथ प्रसंगानुसार अर्थ देने की क्षमता भी होनी चाहिए।
वाक्य में कई शब्द पद होते है। इन शब्दों के अपने अपने अर्थ होते है। इन शब्दों को जब वाक्य में प्रयुक्त किया जाता है। तो ये शब्द अपने अपने अर्थ प्रकट करते है। इससे वाक्य अपनी संपूर्णता एक ईकाइ के रूप में प्रकट करता है।
वाक्य में प्रयुक्त होने वाले शब्दों में अपने अर्थ प्रकट करने की योग्यता आवश्यक होती है। यदि शब्दोंमें यह योग्यता नहीं होती तो वाक्य अपने अर्थ स्पष्ट नहीं कर सकते जैसे:—
  •  चाय खाई  यह वाक्य नहीं है।- क्योंकि चाय खाई नहीं जाती है। पी जाती है।
  • नाव पानी में उड रही है।(यह वाक्य नहीं है)-
  • रजनी पट्रोल से स्नान कर रही है।(यह वाक्य नहीं है)-

इन वाक्य में आए शब्द सार्थक है। इनके प्रयोग के कारण अर्थ् स्पष्ट हो जाने चाहिए ऐसा नहीं हुआ
नाव पानी में चलती है.उडती नहीं इसी प्रकार पट्रोल से स्नान नहीं किया जाता जल से किया जाता है। अत: इन वाक्यों के शुद्ध रूप होंगें

  • नाव पानी में चल रही थी
  • रजनी जल से स्नान कर रही थी
3).आकांक्षा:- आकांक्षा का अर्थ है. इच्छा।    वाक्य अपने आप पूरा होना चाहिए उसमें किसी ऐसे  शब्द अर्थ की कमी नही होनी चाहिए जिसके कारण अर्थ की अभिव्यक्ति में अधूरापन लगे। जैसे-
  • पत्र लिखता है, इस वाक्य में क्रिया के कर्ता को जानने की इच्छा होगी । अतः पूर्ण वाक्य इस प्रकार होगा -राम पत्र लिखता है।

अन्य शब्दों में कह सकते है:—वाक्य में एक से अधिक शब्द पद होते है। प्रत्येक शब्द के पश्चात उससे अगले शब्द को जानने की इच्छा या उत्सुकता बनी रहती है। यह उत्सुकता आवश्यक होती है। इसी उत्सुकता को आकांक्षा कहते है।
आकाक्षा का समान्य अर्थ इच्छा से होता है।

सरल शब्दों में कह सकते है:-   एक पद को सुनने के बाद दूसरे पद को जानने की इच्छा  आकांक्षा ही  है।
 यदि वाक्य में आकांक्षा शेष रहा जाती है  “खाता है” तो स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि क्या कहा जा रहा है. किसी के भोजन करने की बात कही जा रही है या (bank) के खाते के  बारे में
 4).निकटता /आसक्तिः- आसक्ति का तात्पर्य है -वाक्यों में प्रयुक्त किए जाने वाले जाने वाले शब्दों की एक- दूसरे से निकटता।
वाक्यों में आने वाले शब्दों का उच्चारण साथ- साथ होता है। एक शब्द के पश्चात दूसरे शब्द को दूरी पर लिखने वाक्यों के अर्थ स्पष्ट नहीं होते है। जैसे:-
  • अपराधी…………..चुनाव जीतकर…………………..विधानसभाओं ……..और संसद………… .में……..पहुॅच जाते…हैं।
इस वाक्य में आए शब्दों में आक्ति नहीं हैं। इस वाक्य को पढते समय प्रत्येक शब्द को रूक रूककर पढना पडता है
इससे अर्थ ग्रहण में रूकावट आती है।
इस वाक्य का शुद्ध रूप होगा :— अपराधी चुनाव जीतकर विधानसभाओं और संसद में पहुॅच जाते हैं। 
 5).पदक्रम :- वाक्य शब्दों या पदों का मात्र समूह नहीं होता है। प्रत्येक पद किसी-ना किसी संबंध से परस्पर जुडा रहता है। यह संबंध ही पदो ंके समूह को वाक्य का रूप प्रदान करता है।
वाक्य में पदों का एक निश्चित क्रम होना चाहिए। ‘सुहावनी है रात होती चाँदनी’ इसमें पदों का क्रम व्यवस्थित न होने से इसे वाक्य नहीं मानेंगे। इसे इस प्रकार होना चाहिए- ‘चाँदनी रात सुहावनी होती है’।
6). अन्वय :- अन्वय का अर्थ है. मेल। किसी वाक्य में प्रयुक्त शब्दों का लिंग,वचन, कारक और पुरूष आदि की दृष्टि से मेल अन्वय कहलाता है। यदि वाक्यों के शब्दों में अन्वय नहीं होगा तो उनके अर्थ स्पष्ट नहीं होगें जैसे:-
  •  इला ,गीता और कांता को मिलकर गाना गाई।
  •  सरोज भाई में राखी बांधने गया।
  • इन वाक्यों में लिंग,वचन और कारक में न अन्वय न होने से अर्थ स्पष्ट नहीं होते है।
इन वाक्यों का शुद्ध रूप है।
1. इला ,गीता और कांता ने मिलकर गाने गाए।
2. सरोज भाई को राखी बॉधने गई।
वाक्य में लिंग, वचन, पुरुष, काल, कारक आदि का क्रिया के साथ ठीक-ठीक मेल होना चाहिए; जैसे- ‘बालक और बालिकाएँ गई’, इसमें कर्ता क्रिया अन्वय ठीक नहीं है। अतः शुद्ध वाक्य होगा ‘बालक और बालिकाएँ गए’।

कर्म और क्रिया का अन्व

1. यदि वाक्य में कर्ता विभक्ति सहित हो- कर्म विभक्ति रहित हो तो -क्रिया का लिंग वचन और पुरूष कर्म के अनुसार होगें
  •  नीतू ने गाना गाया । एकवचन
  • राम ने पुस्तक पढी।
  • आशा ने पुस्तक पढ़ी।
  • हमने लड़ाई जीती।
  • उसने गाली दी। मैंने रूपये दिये।
  •   तुमने क्षमा माँगी।
2. यदि कर्ता और कर्म दोनों के साथ विभक्ति हो तो क्रिया एकवचन पुल्लिंग व अन्य पुरूष होता है।
  • मोहन ने चोर को पकडा।
  • राहुल ने सीमा को देखा ।
  • मैंने कृष्ण को बुलाया।
  • तुमने उसे देखा।
  • स्त्रियों ने पुरुषों को ध्यान से देखा।
 3. यदि वाक्य में भित्र.भित्र लिंग के अनेक प्रत्यय कर्म आयें  और वे ‘और’ से जुड़े हों, तो क्रिया अन्तिम कर्म के लिंग और वचन में होगी। जैसे
  • . मैंने मिठाई और पापड़ खाये।
  • उसने दूध और रोटी खिलाई।
4. यदि कर्ता के साथ विभक्ति ने लगी हो और वाक्य में दो कर्म हो तो क्रिया अन्तिम कर्म के अनुसार लगती है।
  • . सुनील ने विभक्ति रबड और पेंसिल खरीदी । स्त्रालिंग एकवचन
  • समय ने मिठाई और फल खरीदे । पुल्लिंग
  • मैंने एक गाय और एक भैंस खरीदी।
  • सोहन ने एक पुस्तक और एक कलम खरीदी।
  • मोहन ने एक घोड़ा और एक हाथी बेचा।

2. कर्ता और क्रिया का अन्वय

 1. वाक्य में कर्ता के परसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ तो क्रिया का लिंग वचन और पुरूष कर्ता के अनुसार होता है।
  • राधा गाना गाती है।
  • मोहन गाना गाती है।
  • करीम किताब पढ़ता है।
  • सोहन मिठाई खाता है।
  • रीता घर जाती है।
2  वाक्य में विभक्ति रहित एक ही लिंग वचन पुरूष के कर्ता हो अर्थात एक से अधिक कर्ता हो तो क्रिया उसी लिंग में बहुवचन में होगी ।
  • .राकेश सोहन अमन खाना खा रहे है।
  • राधा रेखा प्रिया गाना गा रही है।
3. यदि उत्तमपुरुष, मध्यमपुरुष और अन्यपुरुष एक वाक्य में कर्ता बनकर आयें तो क्रिया उत्तमपुरुष के अनुसार होगी।
जैसे.
  • वह और हम जायेंगे।
  • हरि ,तुम और हम सिनेमा देखने चलेंगे।
  • वह, आप और मैं चलूँगा।
गुरूजी का मत है कि वाक्य में पहले मध्यमपुरुष प्रयुक्त होता हैए उसके बाद अन्यपुरुष और अन्त में उत्तमपुरुष।
जैसे.
  • तुम, वह और मैं जाऊँगा।
4. आंसू हस्ताक्षर होश भाग्य शब्दों का प्रयोग सदैव बहुवचन में होता है।
  • उसने प्राण त्याग दिए ।
  • मेरी आखों में आंसू आ गए।
  • राधा की सुंदरता को देख कर होश उड गए ।
  • उसका भाग्य अच्छा है।
5.यदि वाक्य में अनेक कर्ताओं के बीच विभाजक समुच्चयबोधक अव्यय श्याश् अथवा श्वाश् रहे तो क्रिया अन्तिम कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार होगी।जैसे.
  • घनश्याम की पाँच दरियाँ वा एक कम्बल बिकेगा।
  • हरि का एक कम्बल या पाँच दरियाँ बिकेंगी।
  • मोहन का बैल या सोहन की गायें बिकेंगी।
6. कर्ता का लिंग अज्ञात होने पर क्रिया पुल्लिंग होती है।
  • कौन आया है।
  • वहॉ कोई खडा है।
  • कहॉ जाना है।
7  जहॉ आदर या सम्मान का भाव  दर्शाया जाता है वहॉ एकवचन कर्ता के साथ भी क्रिया का बहुवचन में प्रयोग होता है।
  • चाचा जी कल आ रहे है।
  •   पिताजी खाना खा रहें है।
8. एक से अधिक कर्ता विभक्ति रहित हो और अंत में समूहवाचक शब्द हो तो क्रिया बहुवचन में होगी
  • राम राधा श्याम सब जा रहे है।
  • पूनम रीना परिवार में रहतें है।विशेषण और विशेष्य का  अन्वय
1 अगर वाक्य में एक से अधिक विशेष्य हो तो विशेषण अपने निकट विशेष्य के अनुसार होगा
  •  काली गाय सफेद दूध  लाओ।
  • सफेद दूध काली गाय लाओ।
  • काली साडी लाल कुर्ता लाओ।
  • लाल कुर्ता  काली साडी लाओ।
2. अकारांत विशेषण विशेष्य के लिंग वचन के अनुसार बदलते है
  •  तुम सफेद धोती या पजामा पहनो।
  • आप काली साडी पहनो।

वचन  और लिंग का अन्वय

क संबंध कारक रूप का लिंग,वचन संबंधी के अनुसार होता है। जैसे-
  • यह मेरी कमीज है।
  • वह सोहन की पत्नी है।
  • यह श्याम का बेटा है।
  • जॉन का खिलौना टूट गया ।
यदि एक ही वाक्य में भिन्न भिन्न लिंग और वचन के अनेक संबंधी हों तो क्रिया पुलि्ंलग और बहुवचन में होती हैं, जैसे
  •  मेरी बहन के पुत्र, पुत्री, और पुत्रवधू मुबंई गए हुए है।
  • आजकल मेरे भाई की बेटी और दामाद आए हुए हैं।

4.संज्ञा और सर्वनाम का अन्वय

1-वाक्य में सर्वनाम का वचन उस संज्ञा के वचन के अनुसार होता है। जिस के स्थान पर वह प्रयुक्त हुआ है।
  • रोहन ने कहा मै। पत्र लिखूंगा।ः- एकवचन
  • छात्रों ने कहा हम खेल खेलेंगें -ः बहुवचन
2- सर्वनाम में उसी संज्ञा के लिंग और वचन होते हैंए जिसके बदले वह आता हैय परन्तु कारकों में भेद रहता है।
  • रोहन  ने कहा कि मैं कल जाऊँगा।
  • राधिकाने कहा कि मैं यहीं रूकूँगी।
 3.संपादकए ग्रंथकारए किसी सभा का प्रतिनिधि और बड़े.बड़े अधिकारी अपने लिए श्मैंश् की जगह श्हमश् का प्रयोग करते हैं।
  • हम प्रधानमंत्री जी द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करेंगें।
  • .हम सभी मोदी जी का  सर्मथन करते है।
  • देश में आए संकटों का सामना हम सभी मिलकर करेंगें।
 4. संज्ञाओं के बदले का एक सर्वनाम वही लिंग और वचन लेगा जो उनके समूह से समझे जाएँगे।
  • रोहन और राधिका पार्क खेलने गए है लेकिन वे जल्दी ही आएॅगे
  • .देशवासियों ने जो मेहनत की है। उसका वर्णन नही किया जा सकता है।
5.  तु का प्रयोग अनादर और प्यार के लिए होता है।
जैसे.
रे नृप बालक, कालबस बोलत तोहि न संभार। धनुही सम त्रिपुरारिधनु विदित सकल संसार।।
गोस्वामी तुलसीदासद तोहि. तुझसे
  • अरे मूर्ख ! तू यह क्या कर रहा है -अनादर के लिए
  • अरे बेटा, तू मुझसे क्यों रूठा है -प्यार के लिए
  • तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूँ।
 मध्यम पुरुष में सार्वनामिक शब्द की अपेक्षा अधिक आदर सूचित करने लिए किसी संज्ञा के बदले ये प्रयुक्त होते हैं.
  •  पुरुषों के लिए – महाशय, महोदय, श्रीमान्, महानुभाव, हुजूर, हुजुरवाला, साहब, जनाब इत्यादि
  • स्त्रियों के लिए – श्रीमती, महाशया, महोदया, देवी, बीबीजी आदि।
 आदरार्थ अन्य पुरुष में”आप” के बदले ये शब्द आते हैं.
  •  पुरुषों के लिए – श्रीमान्, मान्यवर, हुजूर आदि।
  • स्त्रियों के लिए – श्रीमती, देवी आदि।

वाक्य -रचना :-

वाक्य शब्दों या पदों का मात्र समूह नहीं होता है। प्रत्येक पद किसी-ना किसी संबंध से परस्पर जुडा रहता है। यह संबंध ही पदो ंके समूह को वाक्य का रूप प्रदान करता है।
इस संबंध  को दो प्रकार से समझा जा सकता है-
1 पदक्रम
2 अन्विति

पदक्रम (ORDER )

वाक्य में कर्ता, कर्म, पूरक, क्रिया, क्रिया-विशेषण आदि पद स मान्य रूप से जिस क्रम में आते है, उसकी पदक्रम कहते है।
किसी वाक्य के सार्थक शब्दों के स्थान रखने की क्रिया को क्रम अथवा पदक्रम कहते हैं। इसके कुछ सामान्य नियम इस प्रकार हैं.
1. पदक्रम सभी भाषाओं में एक जैसा नहीं होता है।हिंदी भाषा में समान्य पदक्रम -कर्ता, कर्म, क्रिया है। अर्थात पहले कर्ता आता है, फिर कर्म और अंत में क्रिया पद आता है।
  • उदहारण के लिएः- सचिन पत्र लिखता है।
उपयुर्क्त वाक्य में सचिन कर्ता,है। पत्र कर्म है, और लिखता है क्रिया पद है।
2. हिंदी वाक्य रचना में  पदक्रम का बडा ही महत्व है।पदक्रम में थोडा सा परिवर्तन हो जाने पर अर्थ का अनर्थ होने की सम्भावना रहती  है।
  • उदहारण के लिएः- रवि कमल को पीटता है।
उपयुर्क्त वाक्य में संज्ञापदों का क्रम उलट देने पर वाक्य बनेगा -कमल  रवि को पीटता है।
इससे मूल वाक्य का अर्थ ही बदल जाएगा इसी प्रकार पीटता है कमल को रवि यह वाक्य अस्पष्ट है। और कोई अर्थ नहीं है। इसलिए वाक्य रचना में उचित पदक्रम का  विशेष ध्यान रखना चाहिए .
3. उद्देश्य या कर्ता के विस्तार को कर्ता के पहले और विधेय या क्रिया के विस्तार को विधेय के पहले रखना चाहिए।
  • जैसे. अच्छे लड़के धीरे.धीरे पढ़ते हैं।
4. जिन वाक्य में दो कर्म होते है। उनमें प्रायः पहले गौण कर्म या सम्प्रदान और बाद में मुख्य कर्म आता है।
जैसे
  • -गीता ने राम को पत्र लिखा।
इस वाक्य में राम गौण कर्म तथा पत्र मुख्य कर्म है।
5. सबोधन तथा और विस्मयसूचक शब्द वाक्य से पहले प्रयुक्य होते है।
जैसे –
  • 1. आह कितना सुंदर फूल है।
  • 2. भाईयों आपकी दशा सुधार दूॅगा ।
6. कई बार पदक्रम में परिवर्तन करने से अर्थ तो नहीं बदलता किंतु वाक्य के जिस अंश पर हम बल देना चाहते है वह थोडा बदल जाता है। अतः वाक्य के किसी पद पर विशेष बल देने के लिए हम हिंदी में कभी कभी उस पद को पहले स्थान पर ले आते है या पद क्रम में थोडा थोडा हेर फेर कर देते है।
अन्य शब्दों में यह कह सकते हैकि यदि “न” क्या का अर्थ व्यक्त करे तो अंत में प्रश्नवाचक चिह्न का प्रयोग करना चाहिए और ” न” वाक्यान्त में होगा। जैसे :-
  • 1. आपको कहॉ जाना है?
  • 2. कहॉ जाना है आपको ?
7.  विशेषण विशेष्य या संज्ञा के पहले आता है।  जैसे.
  • मेरा सफेद घोडा कहीं चला गया है।
8. क्रियाविशेषण क्रिया के पहले आता है।जैसे
  • वह तेज चलता है।
9.  पदक्रम में अधिकतर अशुद्धिया विशेषणों के प्रयोग में होती है।
  • 1क).. यहॉ शुद्ध गाय का दूध मिलता है।- अशुद्ध
  • ख.) यहॉ गाय का शुद्ध दूध मिलता है।-शुद्ध
  • 2 क. मुझे एक चाय का पैकेट चाहिए।- अशुद्ध
  • ख. मुझे चाय का एक पैकेट चाहिए।- शुद्ध
10. क्रम संबंधी कुछ अन्य नियम
 कर्ता के बाद कर्म आता है। जैसे.
  • मोहन जाता है।   मोहन कर्ता जाता है क्रिया
ऽ कर्म अथवा पूरक, कर्ता और क्रिया के बीच में आता है। जैसे.
  • राम ने पत्र लिखा।  पत्र कर्म
ऽ दो कर्म प्रधान हों तो गौण कर्म का स्थान मुख्य कर्म से पहले आता है। जैसे.
  • सोहन ने मोहन को गौण कर्म आम खिलाया ।
ऽ यदि पूरा वाक्य ही प्रश्नवाचक हो तो ऐसे शब्द ;प्रश्नसूचक- वाक्यारंभ में रखना चाहिए।जैसे.
  • क्या आपको यही बनना था घ्
ऽ यदि वाक्य में एक कर्म और एक पूरक हो तो पूरक बाद में आता है। जैसे.
  • राकेश ने रस्सी कर्म को सॉप पूरक समझा
ऽ संबंध वाचक पद संबंधित विशेषण से पहले आता है। जैसे.
  • मेरा छोटा भाई नवीं कक्षा में पढता है।
ऽ क्रिया विशेषण का स्थान प्रायः संबंधित किया से पहले से किया जाता है।जैसे.
  • राम आज आ गया
  • वह तेज दौडता है।
ऽ समुच्चयबोधक अव्यय जिन शब्दों या वाक्यों को जोडते हैं,उनके बीच में आते है। जैसे.
  • अर्जुन तो आ गया पर भीम नहीं आया ।
  • राम और श्याम पढ रहे है।
ऽ सबोधन और विस्मयदिबोधक पद प्रायः वाक्य के आंरभ में आते है। जैसे.
  • अरे आप कब आए।
  • अहा  कैसा सुंदर दृश्य है।
  • सचिन तुमसे  आशा न थी
ऽ निपात उन्हीं शब्दों के बाद आते हैं जिन पर बल देना हो। जैसे.
  • मै घर ही गया था।
  • मैं ही घर गया था।
  • उसने कुछ भी नहीं दिया।
  • उसने भी कुछ नहीं दिया।

अन्विति

जब वाक्य कें किसी एक सज्ञांपद के लिंग , वचन , कारक आदि के अनुसार किसी दूसरे पद में समान परिवर्तन हो जाता है। तो उसे अन्विति कहते है।
हिंदी वाक्य में कर्ता,कर्म के साथ क्रिया का , संज्ञा या सर्वनाम के साथ विशेषण का तथा संबंध कारक का संबंधी सं अन्वय होता है।

कर्ता और कर्म तथा क्रिया के बीच अन्विति

क…. कर्ता  — क्रिया अन्विति
1.-यदि कर्ता और  कर्म के बाद किसी परसर्ग का प्रयोग न हुआ हो तो क्रिया की अन्विति कर्ता के लिंग , कारक, वचन, और पुरूष के अनुसार होता है।  जैसे :-
  •  शंशाक दूध पीता है।
  • 2. नीरजा दूध पीती है।
  • 3.लडके दूध पीते है।
  • 4. लडकियां दूध पीती े है।
2.- यदि वाक्य में कर्ता के बाद परसर्ग कारक चिह्न का प्रयोग न हुआ हो और कर्म के बाद परसर्ग का प्रयोग हो तब भी क्रिया की अन्विति कर्ता के लिंग- वचन पंरूष आदि के अनुसार होगी।
  • 1. मोहन गीता को डांटता है
  • 2.गीता कुत्ते को डराती है।
  •  3. लडकियॉ बिल्ली को भगा रही है।
  • 4. लडके कुत्ते को मार रहे है।
 ख-कर्म . क्रिया अन्वितिः-
यदि कर्ता के बाद ने अथवा कोई और परसर्ग हो तो क्रिया की अन्विति कर्ता के साथ नहीं होती। इस स्थ्ति में कर्म या पूरक के बाद किसी परसर्ग का प्रयोग न हुआ हो तो क्रिया की अन्विति कर्म या पूरक के लिंग, वचन, पुरूष आदि के अनुसार होगी, जैसे :-
  •   अहमद ने रोटी खाई।  -कर्म क्रिया
  •   सलमा ने दूध पिया।–कर्म क्रिया
  •  थॉमस ने चिळयॉ लिखी।-कर्म क्रिया
  •  मेरी ने सभी फल खाए -कर्म क्रिया   ख
  •  बच्चों को तेज बुखार था -पूरक क्रिया
  • . मुझको नींद आ रही -पूरक क्रिया
  • बच्चों और मुझ के साथ लगने पर भी दोनों ही  -कर्ता कारक है
ग- निरपेक्ष अन्विति :-
यदि वाक्य में कर्ता और कर्म दोनों के बाद परसर्ग हो तो क्रिया की अन्विति न तो कर्ता के साथ होगी और न ही कर्म के साथ होगी इस स्थिति में क्रिया  हमेशा एकवचन पुलि्र्ंग में होती है।  यही अन्विति निरपेक्ष है। उदहारण के तौर पर
  •  रीना ने नौकर को डॉटा
  • . मैंने रीना को डराया
  •  अध्यापक ने सभी छात्रों को डराया
  •  कुत्तों ने बिल्लियों को भगाया
संज्ञा. सर्वनाम अन्विति
वाक्य  में प्रयुक्त सर्वनामों के लिए वचन उन्हीं सज्ञाओं के अनुसार होता है। जिनके स्थान पर सर्वनाम का प्रयोग होता है।  जैसे
  • मोहन मेरा भाई है। वह मेरे स्कूल में पढता है।
  • मेरी बहन दिव्या है। वह आज स्कूल नहीं आई।
विशेषण-विशेष्य अन्विति
1 यदि विशेष्य संज्ञा  के पहले या बाद में विशेषण का प्रयोग हो तो आकारांत विशेषण विशेष्य के लिंग , वचन , के अनुसार प्रभावित होगा, जैसं – काला घोडा, काली बकरी , बडे लडके बडा लडका, बडी लडकी।
2. अन्य सभी विशेषण विशेष्य के लिंग वचन आदि के अनुसार न बदलकर एक समान ही रहेगें। जैसे – सुंदर लडका, सुंदर लडकी, सुंदर लडके, सुंदर लडकियॉ।

वाक्य के घटक

वाक्य के प्रमुख घटक कर्ता और क्रिया है।  जिसमें लघुत्तम सरल वाक्य में भी क्रिया और कर्ता दो आवश्यक घटक होते है।  जैसेः-
  • रविकांत सो रहा है।
  • रविकांत सेब खा रहा है।

वाक्य में सोना क्रिया और सोने वाले व्यक्ति रविकांत की भूमिका अनिवार्य है।

इसी प्रकार वाक्य में खाना क्रिया के साथ खाने वाले व्यक्ति रविकांत तथा खाई जाने वाली वस्तु सेब दोनो की भूमिका अनिवार्य है।अतः खाना क्रिया से बने वाक्य में क्रिया के अतिरिक्त कर्ता और कर्म अनिवार्य  घटक है।

इस प्रकार वाक्य में जिन घटकों के न रहने से वाक्य अधूरा होता है। और भाव रूपष्ट नहीं होता है,वह अनिवार्य घटक कहलाता है।वाक्य में अनिवार्य घटक के अलावा कुछ ऐसे घटक भी घटक होते  है। जिनके वाक्य में होने से अर्थ अधिक स्पष्ट हो जाता है। किंतु इनके न होने पर वाक्य व्याकवरणिक दृष्टि से अधूरा नहीं माना जाता है। ऐसे घटक को ऐच्छिक घटक कहते है। क्योंकि वाक्य में इन्हें रखना वक्ता की इच्छा पर निर्भर है, जैसे –

  • 1. राजेश्वर अमित के लिए पुस्तक लाया है।
  • 2. पूर्वी कल शाम ो सुदेश के साथ कोलकता जाएगी।
उपर्युक्त वाक्य तके अमित के लिए और कल शाम को सुदेश के साथ घटक रखना आवश्यक नहीं है। इन घटकों को हटा  देने से अधूरापन नहीं रहता। अतः ये ऐच्छिक घटक होते है।

वाक्य के लिए कुछ महत्वपूर्ण अन्य बातें या नियम

1). वचन संबंधी वाक्य नियम :-

क).-वचन संबंधी वाक्य में  कुछ शब्द एकवचन में और कुछ शब्द  केवल बहुवचन में होते है। जैसे :- प्रत्येक. किसी कोई आदि इन्हें बहुवचन में नहीं पढ सकते है।
ख).- हुये, हुए, हुयी, हुई का शुद्ध प्रयोग- मूल शब्द ‘हुआ’ है, एकवचन में। इसका बहुवचन होगा ‘हुए’; ‘हुये’ नहीं ‘हुए’ का स्त्रीलिंग ‘हुई’ होगा; ‘हुयी’ नहीं।
ग). -कुछ वाक्य में ऐसे शब्द भी है। जो दोनों वचनों में प्रयोग किए जाते है जैसे – ‘‘सब और लोग इन दोनों शब्दों में दोनों वचनों का प्रयोग किया है।
नोट :- ‘‘सब‘‘ में कभी-कभी समुच्चय रूप का प्रयोग होता  है इसलिए एकवचन  में है।
उदहारण  के लिए :-  आप अपना सब काम गलत करते है।
यदि काम की अधिकता का बोध हो तो सब  का प्रयोग बहुवचन में होगा। जैसे.
सब यही कहते हैं।
हिंदी में सब समुच्चय और संख्या. दोनों का बोध कराता है।
‘‘लोग‘‘ बहुवचन शब्द है। तथा बहुवचन में ही प्रयुक्त किया जाता है। लोग अन्धे नहीं हैं। लोग ठीक ही कहते हैं।
कभी.कभी सब लोग का प्रयोग बहुवचन में होता है।   लोग-कहने से कुछ व्यक्तियों का और सब लोग कहने से अनगिनत और अधिक व्यक्तियों का बोध होता है। जैसे.
सब लोगों का ऐसा विचार है। सब लोग कहते है कि गाँधीजी महापुरुष थे।
2. संज्ञा तथा क्रिया सम्बंधी वाक्य  नियम
क).- यदि व्यक्तिवाचक संज्ञा कर्ता है तो लिंग व वचन दोनों ही क्रिया के अनुसार होगें।
कशी सदा भारतीय संस्कृति का केन्द्र रही है।( यहाँ कर्ता स्त्रीलिंग है।)
पहले कलकत्ता भारत की राजधानी था।(यहाँ कर्ता पुंलिंग है।)
उसका ज्ञान ही उसकी पूँजी था।(यहाँ कर्ता पुंलिंग है।)
ख).- यदि भाववाचक संज्ञा है। तो भाव वाचक की क्रिया सदा अन्य पुरूष पुलि्र्लंग एकवचन में रहता है।
उदहारण के तौर पर :-
गर्मियों में छत पर सोया जाता है। -जन समाज भावाचक संज्ञा
कम्प्यूटर चला लिया जाता है।
3. समभिन्नार्थक सम्बंधी वाक्य नियम तथा शुद्ध प्रयोग
1).जिस शब्द का अन्तिम वर्ण ‘या’ है उसका बहुवचन ‘ये’ होगा। ‘नया’ मूल शब्द है, इसका बहुवचन ‘नये’ और स्त्रीलिंग ‘नयी’ होगा
उदहारण के तौर
• नए, —-नये,
• नई,— नयी

2). मूल शब्द ‘गया’ है।  नियम के अनुसार ‘गया’ का बहुवचन ‘गये’ और स्त्रीलिंग ‘गयी’ होगा।
उदहारण के लिए
• गए,—- गये,
• गई, —, गयी

3).  मूल शब्द ‘हुआ’ है, एकवचन में है  इसका बहुवचन होगा
‘हुए’; ‘हुये’  ‘हुए’ का स्त्रीलिंग ‘हुई’ होगा; ‘हुयी’ नहीं।
उदहारण के लिए
• हुये—-, हुए,
•हुयी,—- हुई

4).  किए, किये, का शुद्ध प्रयोग- ‘
किया’ मूल शब्द है; इसका बहुवचन ‘किये’ होगा।

5).-  लिए, लिये, का शुद्ध प्रयोग-
लिए, लिये दोनों  -ही शुद्ध रूप हैं।  लेकिन जहाँ अव्यय व्यवहृत होगा वहाँ ‘लिए’ आयेगा  क्रिया के अर्थ में ‘लिये’ का प्रयोग होगा; क्योंकि इसका मूल शब्द ‘लिया’ है।
उदहारण के लिए
मेरे लिए उसने जान दी।
उसने मेरे खाने के लिए मिठाई ली
6).- चाहिये, चाहिए का शुद्ध प्रयोग-
‘चाहिए’ अव्यय है। अव्यय विकृत नहीं होता। इसलिए ‘चाहिए’ का प्रयोग शुद्ध है;   ‘चाहिये’ का नहीं।