विशेषण की परिभाषा, अर्थ, भेद, उदाहरण एवंम विशेषताएँ

विशेषण(Adjective)-(एडजेक्टिव)

 

विशेषण की परिभाषा

विशेषण वे शब्द है। जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने का कार्य करते है।

जैसे —‘पीला आम’  में “पीला “शब्दआम’ संज्ञा की रंग संबंधी विशेषता को बता रहा है।
इस शब्द से पता चल रहा है कि ‘आम का रंग पीला’

विशेषण जिस शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है। उसे विशेष्य कहते है। उक्त उदहारण में ‘आम ‘विशेष्य है।

सरल शब्दों में कह सहते है।—जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने का कार्य करते हैं; ‘विशेषण कहलाते है।

जैसे

  • बडा —छोटा, सुंदर, कायर,निडर ,हल्का, भारी, बुरा, लम्बा, मोटा टेढ़ा–मेढ़ा, खट्टा आदि विशेषण शब्दों के कुछ उदाहरण हैं।

दूसरे शब्दों में — ऐसे विकारी शबद जो प्रत्येक परिस्थिति में संज्ञा /सर्वनाम की विशेषता को प्रकट ​करते है। वे शब्द विशेषण कहलाते है।जैसे :—

  • काला कुत्ता; भूरी गाय ।

उपयुक्त वाक्यों में ‘काला’ और ‘भूरी’ शब्द” कुत्ता और गाय “(संज्ञा )की विशेषता बता रहे है। इसलिए ये शब्द विशेषण है।

विशेषण को निम्नलिखित उदहारणें के द्वारा समझते है।

  • मै गरम दूध पीता हूॅ।
  • मै ठंडा पानी पीना चाहता हूॅ
  • चार किलो आम दिजिए
  • रवि के पास सात किताबें है।
  • पेड की हरी पत्त्यिॉ मत तोडो।
  • गिलास में कुछ पानी है।
  • घर में आठ आदमी है।
  • वे मीठे आम लाए है।
  • मुझे तीन लीटर दूध चाहिए।
  • प्रंधानमंत्री गंभीर समस्याओं पर विचार कर रहे है।

उपर्युक्त वाक्य में—

गरम ,ठंडा ,हरी, कुछ, मीठे ,गंभीर,आठ —आगे आने वाले संज्ञा शब्दों —दूध, पानी, आम, दूध, समस्याओं की विशेषता बता रहे हैं।

 

  • इनमें गरम मीठे गंभीर अपनी अपनी संज्ञाओं के गुण बता रहे हैं।
  • कुछ और तीन लीटर वस्तु का परिणाम मात्रा बता रहे हैं।
  • आठ आदमियों ​की संख्या को बता रहे है।

व्याकरण में काले रेखांकित किए गए शब्द विशेषण है। जो विशेषण की विशेषता को दर्शा रहे है।

विशेषण का अर्थ(Meaning of Adjective)

अर्थ—विशेषण की विशेषता को सूचित /प्रकट करने वाला शब्द।

 

दूसरे शब्दों में— ऐसे शब्द जो वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता प्रकट करते है या दर्शाते है।उन्हें विशेषण कहते है। अर्थात

सरल शब्दों में—संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द विशेषण कहलाते है।

जैसे :—

  • मोटा लडका
  • सुंदर बच्ची
  • राधा गोरी
  • ईमानदार आदमी आदि।

अन्य शब्दों में —ऐसे शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम की जैसे—गुण धर्म दोष दशा भाव रूप रंग आकार आदि की विशेषता बताते है। उन्हें विशेषण कहते है।अर्थात

हम कह सकते है कि–जिस विकारी शब्द से संज्ञा की व्याप्ति मर्यादित होती है, उसे भी विशेषण कहते हैं।
जैसे-

  • मेहनती विद्यार्थी सफलता पाते हैं।
  • दिल्ली ऐतिहासिक नगर है।
  • यह पीला है।
  • ऐसा आदमी कहाँ मिलेगा?

इन वाक्यों में मेहनती,ऐतिहासिक , पीला और ऐसा शब्द विशेषण हैं। जो क्रमशः विद्यार्थी,दिल्ली , यह और आदमी की विशेषता बताते हैं।

विशेष्य

विशेषण पद जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है उसे विशेष्य कहते है।
नीचे इस संबंध को और स्पष्ट रूप में सम​िझए—

विशेषण विशेष्य

  • काला घोडा
  • दो किलो चीनी
  • तीन केले
  • लंबी मेज

विशेषण के बारे में जानने योग्य कुछ अन्य बातें

 

क. उददेश्य विशेषण और विधेय विशेषण

 

उददेश्य विशेषण:— विशेष्यों के पूर्व लगने वाले विशेषणों को उददेश्य विशेषण कहते है—

जैसे

  • अच्छा लडका—–अच्छी लडकी
  • सुंदर बालक——सुंदर बालिका
  • मोटा लडका—–मोटी लडकी ।

विधेय विशेषण:— विशेष्य संज्ञा सर्वनाम आदि के बाद में प्रयुक्त होने वाले विशेषण कहलाते है—

जैसे

  • वह लडका कितना सुंदर है।
  • ये फल मीठे है।
  • उसकी कमीज नीली है।

 

नोट

  • विशेषण विशेष्य से पहले भी आ सकता है और बाद में भी।

विशेष्य से पूर्व आने वाले विशेषण उददेश्य विशेषण कहलाते हैं तथा विशेष्य के बाद आने वाले विशेषण विधेय विशेषण कहलाते है।

दोनों के उदहारण देखो और समझो—

  • चतुर बालक काम करते है। ——उददेश्य विशेषण
  • यह बालक चतुर है।————— विधेय विशेषण


विधेय विशेषण के कुछ उदहारण —

 

  • यह पानी ठंडा है।
  • यह फूल लाल है।
  • यह मकान उॅचा है।


विशेषण चाहे उददेश्य हो चाहे विधेय विशेषण दोनों ही स्थिति में उनका रूप संज्ञा या सर्वनाम के अनुसार बदलता है जैसे

उददेश्य विशेषण के रूप

  • तली युवती खेल रही है। —–विशेषण और विशेष्य दोनों स्त्री—एकवचन
  • पतली युव​तियों खेल रही है। —–स्त्रीलिंग विशेषण अपरिवर्तित रहता है।
  • पतला लडका जा रहा है। ——— विशेषण— विशेष्य दोनों पु0 एकवचन
  • पतले लडके जा रहे है।———— विशेषण— विशेष्य दोनों पु0 बहुवचन

 

विधेय विशेषणों के रूप

  • ह लडका पतला है। —— विशेषण— विशेष्य दोनों पु0 एकवचन
  • वह लडके पतले हैं——— विशेषण— विशेष्य दोनों पु0 बहुवचन
  • वह लडकी लंबी है।——— विशेषण— विशेष्य दोनों स्त्री बहुवचन
  • वे लडकियॉ लंबी हैं।——— स्त्री विशेषण अपरिवर्तित रहता है।

 

दूसरे शब्दों में विशेषण जिन शब्दों की विशेषता बताते हैं वे विशेष्य कहलाते है।

जैसे:—

  • हाथी बलवान जानवर है।———— हाथी कैसा जानवर है—( बलवान)
  • बलवान शब्द विशेषता बता रहा है इसलिए विशेष्य है।
  • बलवान कौन है?—— हाथी। हाथी शब्द विशेष्य है।

क) अकारांत पुल्लिंग विशेषण बहुवचन में एकारांत हो जाते हैं— जैसे

  • अच्छा—— अच्छी
  • हरा——– हरे
  • बडा—— बडें

ख) विशेष्य के साथ परसर्ग लगने पर अकारांत विशेषण एकवचन में भी एकारांत हो जाता है। जैसे—

  • अच्छे —–लडके ने
  • हरा——- हरे
  • बडा—— बडे।

ग) कुछ विशेषण में लिंग और वचन के अनुसार परिवर्तन नहीं होता:

जैसे

  • बढिया ,उम्दा, ज्यादा, सुखी ,सुंदर, उतम।


ड)
ईकारांत स्त्रीलिंग विशेषण एकवचन तथा बहुवचन दोंनों के रूप में और विशेष्य के साथ परसर्ग लगने पर भी ईकारांत ही रहते है

जैसे—

  • काली बकरी— काली बकरियों ने
  • बडी कलम से — बडी कलमों से
  • बडों का कहना मानना चाहिए

च) विशेष्य के बिना कुछ विशेषण संज्ञा की भॉति प्रयुक्त होते है—

जैसे—

  • यहॉ हरी भरी घास दिखाई देती है।
  • छोटे—— छोटे लडके सुंदर लग रहे है।


ज)
  दो या दो से अधिक विशेष्यों के गुणों की तुलना करने के लिए विशेषण से पहले से की तुलना में की अपेक्षा आदि का प्रयोग होता है।

जैसे—

  • मेरा स्कूल उसके स्कूल से अच्छा है।
  • मेरा घर उसके घर की तुलना में सुंदर है।
  • मेरा बैग उसके बैग की तुलना अपेक्षा मजबूत है।

प्रविशेषण

विशेषण शब्द संज्ञा तथा सर्वनाम शब्दों की विशेषता तो बताते ही है। इनके साथ साथ विशेषण अन्य विशेषण शब्दों की भी विशेषता बता सकते है।

विशेषणों की विशेषता बताने के लिए ये विशेषण से पहले लगते हैं जैसे —” लाल फूल” में “लाल” शब्द विशेषण है

​लेकिन यदि कहें तीन लाल फूल तो इस पद में तीन संख्यावाचक विशेषण लाल विशेषण के पहले लगकर उसकी विशेषता बता रहा है।

विशेषणों के पूर्व लगकर उनकी विशेषता बताने वाले विशेषण प्रविशेषण कहे जाते हैं निम्नलिखित वाक्यों के सभी स्थूल पद प्रविशेषण है।

जैसे—

  • मेरा बडा भाई जर्मनी में रहता है।
  • पुरानी लकडी की कुरसी टुट गई।
  • उस छोटे बच्चे ने यह चित्र बनाया है।
  • ​​पिताजी ने नई कार खरीदी।
  • बासी रोटी मै नही खा सकता


सरल शब्दों में
— प्रविशेषण उन विशेष्णात्मक शब्दों को कहते है जो विशेषण को भी प्रकट करते है।

जैसे—

  • गंगा सबसे लम्बी नदी है।
  • मेरी अध्यापिका सबसे अच्छी है।
  • मेरा भाई अत्यंत ही कुशल अधिकारी है।
  • मेरी अध्यापिका सबसे अच्छी है।
  • सुनीला बहुत मोटी महिला है।
  • पूजा अधिक आलसी लडकी है।


इन वाक्यों में आए शब्द
— सबसे, सबसे, अधिक, बहुत ,और अत्यंत शब्द प्रविशेषण हैं।


ये शब्द प्रविशेषण शब्द
—लम्बी ,अच्छी ,कुशल, मोटी, आलसी से पहले लगकर इनकी विशेषता प्रकट कर रहें है।


अर्थात हम कह सकते है
— कि जो शब्द विशेषण शब्दों की विशेषता प्रकट करतें है। उन्हें प्रविशेषण कहते है।


दूसरे शब्दों में
— विशेषण की भी विशेषता प्रकट करने वाले शब्दों को प्रविशेषण कहते है।

जैसे—

  •  वह बडा भोला है।
  • मोहन बहुत चतुर है।
  • सोहन बडा परिश्रमी है।
  • वहॉ लगभग बीस छात्र थे ।
  • ​राम अब बिल्कुल स्वस्थ है।

समान्य:प्रचलित प्रविशेषण निम्लिखित है

बहुत, बहुत,अधिक, अत्यधिक, अंत्यत ,बडा, खूब, बिल्कुल, थोडा ,कम, ठीक, पूर्ण लगभग।

विशेष्य प्रविशेषण और विशेषण में सम्बन्ध

विशेष्य:— जिसकी विशेषता बताई जा रही है। उसे विशेष्य कहते है।
  • जो विशेषण संज्ञा और  सर्वनाम की विशेषता बताते है,उसे विशेष्य कहते हैं। अर्थात
  • वाक्य में जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतायी जाती है उन्हें विशेष्य कहते हैं।
वाक्य में विशेषण का प्रयोग दो प्रकार से होता है- कभी विशेषण विशेष्य के पहले आता है और कभी विशेष्य के बाद।
प्रविशेषण – जो शब्द विशेषण की विशेषता बताते है, वे प्रविशेषण कहलाते है

विशषणों के पूर्व लगकर उनकी विशेषता बताने वाले विशेषण प्रविशेषण कहे जाते है। जैसे-

  •  पिताजी ने एक नई कार खरीदी।
  • मेरा भाई बनारस में रहता है।
  • यह लड़की बहुत अच्छी है।

विशेषण:—-जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने का कार्य करते हैं; ‘विशेषण कहलाते है।

जैसे

  • बडा —छोटा, सुंदर, कायर,निडर
प्रयोग की दृष्टि से विशेषण के भेद 
प्रयोग की दृष्टि से विशेषण के दो भेद है-
  •  विशेष्य-विशेषण
  • विधेय-विशेषण
(1)विशेष्य-विशेष– जो विशेषण विशेष्य से  पहले आकर उसकी विशेषता बताते है। उसे विशेष्य-विशेषण कहते है तथा वह विशेष्य-विशेष होता हैं।
जैसे-
  • रमेश ‘नटखट’ बालक है। अनीता ‘गम्भीर’ लड़की है।
इन वाक्यों में ‘रमेश’ और ‘अनीता’ क्रमशः बालक और लड़की के विशेषण हैं, जो संज्ञाओं (विशेष्य) के पहले आये हैं।
(2) विधेय-विशेषण- जो विशेषण विशेष्य और क्रिया के बीच आकर उसकी विशेषता बताते है,उसे विधेय-विशेषण कहते है तब  वहाँ  पर विधेय-विशेषण होता हैं।
जैसे-
  • मेरा घोडा ‘काला’ हैं। मेरा दामाद ‘आलसी’ है। इन वाक्यों में ‘काला’ और ‘आलसी’ ऐसे विशेषण हैं,
जो क्रमशः ‘घोडा'(संज्ञा) और ‘है'(क्रिया) तथा ‘दामाद'(संज्ञा) और ‘है'(क्रिया) के बीच आये हैं।
 ध्यान रखने योग्य बातें ———
 (क) विशेषण के लिंग, वचन आदि विशेष्य के लिंग, वचन आदि के अनुसार होते हैं।
जैसे-
  • अच्छे बच्चे पढ़ते हैं।
  • रानी भोली लड़की है।
  • राजू बुरा लड़का है।
(ख) यदि एक ही विशेषण के अनेक विशेष्य हों तो विशेषण के लिंग और वचन समीपवाले विशेष्य के लिंग, वचन के अनुसार होंगे;
जैसे-
  • नये पुरुष और नारियाँ, नयी धोती और कुरता।

विशेषण की विशेषता और उसके कार्य

 

विशेषण के निम्नलिखित विशेषता और प्रमुख कार्य हैं-
  • यह एक विकारी शब्द है।:—
  • विशषण के द्वारा किसी भी वाक्य का स्वरूप स्पष्ट किया ता सकता है।
  • विशेषण के प्रयोग के द्वारा वस्तु को सजीव व मूर्तिमय रूप प्रदान करता है।
  • विशेषणों के द्वारा हमें प्रश्नों के उत्तर प्राप्त होते है। जैसे मम्मी ने कितनी चॉकलेट दी।
  • विशेषण के द्वारा किसी व्यक्ति या वस्तु की विशेषता बताई जाती है। जैसे-राधा सुंदर लडकी है। है। यहाँ ‘सुन्दर’ राधा की विशेषता बताता है।
  • विशेषण किसी की हीनता भी बताता है। जैसे- वह लड़का शैतान है। यहाँ ‘शैतान’ लड़के की हीनता बताता है।
  • विशेषण द्वारा अर्थ को सीमित रूप प्रदान  किया जा सकता है। जैसे- काला कुत्त । यहाँ’काला’ शब्द कुत्ता के एक विशेष प्रकार का अर्थबोध कराता है।
  • विशेषणों के द्वारा  संख्या निर्धारित की जा सकती है तथा संख्या के दोनो रूपों  निश्चिता और  अनिश्चिता का बोध  कराते है। है
  • जैसे- एक आम दो। यहाँ ‘एक’ शब्द से आम की संख्या निर्धारित होती है।
  • विशेषणों  के द्वारा निश्चित  और  अनिश्चित परिणाम या मात्रा  के दोनों  रूपों को जाना जा सकता है।। जैसे- पाँच सेर दूध। यहाँ ‘पाँच सेर’ से दूध की निश्र्चित  मात्रा का अर्थबोध होता है।

विशेषण के प्रकार

 

विशेषणों को अलग अलग मतों के द्वारा भिन्न् भिन्न् प्रकार बताये गए है। लेकिन विशेष रूप से मूलत: चार प्रकार होते है।

विशेषण निम्नलिखित प्रकार के होते है –

  • गुणवाचक विशेषण (Qualitative Adjective)
  • संख्यावाचक विशेषण ((Numeral Adjective)
  • परिमाणवाचक विशेषण (Quantitative Adjective)
  • संकेतवाचक या सार्वनामिक विशेषण (Demonstrative Adjective)
  • नामिक विशेषण (Nominal Adjective)
  • व्यक्तिवाचक विशेषण (Proper Adjective)
  • संबंधवाचक विशेषण(Relative Adjective)


(1)गुणवाचक विशेषण (Qualitative Adjective)
:-

जो विशेषण अपने विशेष्य के गुण—दोष्, रूप—रंग, आकार—प्रकार, स्वभाव आदि से संबधित विशेषताओं के बारे में सकेंत करते है। गुणवाचक विशेषण कहलाते है।


दूसरे शब्दों में—
वे विशेषण शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम शब्द के गुण-दोष, रूप-रंग, आकार, स्वाद, दशा, अवस्था, स्थान आदि की विशेषता प्रकट करते हैं, गुणवाचक विशेषण कहलाते है।


सरल शब्दों में
—जो विशेषण हमें संज्ञा या सर्वनाम के रूप, रंग आदि का बोध कराते हैं वे गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं।-

  • गुण- वह लडका अच्छा है, वह प्यारी लडकी है।
  • रंग- काला घोडा दौड रहा है, राम ने लाल टोपी पहनी है।
  • आकार- बडा पेड टूट गया ,उसका चेहरा गोल है।
  • अवस्था- भूखे पेट भजन नहीं होता, वह कमजोर है

 

विशेष:-

 

संज्ञा विशेष्य पर कैसा/ कैसी/ कैसे शब्दों से प्रशन किए जाते है तथा इन प्रश्नों के उत्तर में जो शब्द मिलते है। वे गुणवाचक विशेषण होते है। 

–सरल शब्दों में —गुणवाचक वे विशेषण है जिसमें विशेष्य के साथ कैसा/कैसी लगाकर प्रश्न करने पर उत्तर प्राप्त किया जाता है,वह उत्त्रर ही  विशेषण होता है।विशेषणों में इनकी संख्या सबसे अधिक है।

–गुणवाचक विशेषण अनेक प्रकार के हो सकते है।तथा गुणवाचक विशेषणों के द्वारा संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की
निम्नलिखित विशेषताओं का बोध होता है।

 

-गुण बोधक—  योग्य, परिश्रमी,उदार,निश्छल सहासी दयालु सच्चा समझदार श्रेष्ठ  भला, उचित, अच्छा, ईमानदार, सरल, विनम्र, बुद्धिमानी, सच्चा, दानी, न्यायी, सीधा, शान्त आदि।

दोषबोधक
बुरा,छली,कपटी,अन्यायी,क्रोधी,कृपण,कंजूस,अनुदार,निर्दयी,दुस्साहसी,आलसी,मूर्ख,बुरा,कामचोर,कुटिल,तुच्छ,कायर अनुचित, झूठा, क्रूर, कठोर, घमंडी, बेईमान, पापी, दुष्ट आदि।

 

-रूप/रंग बोधक– काला, गोरा, सॉवला,आकर्षक, सुंदर , लाल, पीला, नीला, हरा, सफेद, काला, बैंगनी, सुनहरा, चमकीला, धुँधला, फीका।

 

-आकार/प्रकार बोधक — खुरदरा,टेढा,बेढंगा,चौरस,आयताकार,  गोल, चौकोर, सुडौल, समान, पीला, सुन्दर, नुकीला, लम्बा, चौड़ा, सीधा, तिरछा, बड़ा, छोटा, चपटा, ऊँचा, मोटा, पतला आदि।

 

-स्वादबोधक-  फीका,मधुर कसैला,तीता,मीठा, कड़वा, नमकीन, तीखा, खट्टा, सुगंधित आदि

-अवस्था/दशा बोधक —अधेड,युवा,बाल्य,प्रौड, ​धनी—निर्धन,अमीर— गरीब,दुबला, पतला, मोटा, भारी, पिघला, गाढ़ा, गीला, सूखा, घना, , उद्यमी, पालतू, रोगी, स्वस्थ, कमजोर, हल्का, बूढ़ा आदि।

 

-स्थानबोधक-  बिहारी,झारखंडी,छतीसगढी,लुधियानवी,जालंधरी, पंजाबी, अमेरिकी, भारतीय, विदेशी, ग्रामीण, शहरी,पहाडी,चीनी,जापानी,उजाड़, चौरस, भीतरी, बाहरी, उपरी, सतही, पूरबी, पछियाँ, दायाँ, बायाँ, स्थानीय, देशीय, क्षेत्रीय,  आदि।

 

-कालबोधक– दैनिक,साप्ताहिक,पाक्षिक,मासिक,वार्षिक,नवीन,समकालीन,अर्वाचीन, नया, पुराना, ताजा, बासी, भूत, वर्तमान, भविष्य, प्राचीन, अगला, पिछला, मौसमी, आगामी, टिकाऊ, , सायंकालीन, आधुनिक, , मासिक आदि।

 

-स्थिति/दिशाबोधक-अगला ,पिछला ,बाहरी, निचला, ऊपरी, उत्तरी, पूर्वी पश्चिमी,दक्षिणी,पूर्वोतरी,पश्चिमोतरी  आदि।

 

-स्पर्शबोधक-चिकना,कठोर,स्निग्ध,मुदुल, मुलायम, सख्त, ठंड, गर्म, कोमल, ख़ुरदरा आदि।

 

-स्वभाव बोधक – हॅसमुख,खुशमिजाज, चिड़चिड़ा, मिलनसार आदि।

 

-गंध बोधक–   खुशबुदार,सुवासित,गंधमय,दुर्गंधमय,बदबूदार, सुगंधित,  दुर्गंधपूर्ण आदि।

 

-व्यवसाय बोधक– व्यापारी, औद्योगिक, शौक्षणिक, प्राविधिक आदि।

 

-पदार्थ बोधक– सूती, रेशमी, ऊनी, कागजी, फौलादी, लौह आदि।

 

-समयबोधक– अगला, पिछला, बौद्धकालीन, प्रागैतिहासिक, नजदीकी आदि।

 

-तापमानबोधक- ठंडा, गरम, कुनकुना आदि।

 

-ध्वनिबोधक– मधुर, कर्कश आदि।

-भारबोधक– हल्का, भारी आदि।

-द्रष्टव्यबोधक– गुणवाचक विशेषणों में ‘सा’ सादृश्यवाचक पद जोड़कर गुणों को कम भी किया जाता है।

  • जैसे- बड़ा-सा, ऊँची-सी, पीला-सा, छोटी-सी।

(2)संख्यावाचक विशेषण((Numeral Adjective)

जिन विशेषण शब्दों से संख्या का बोध हो उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।

उदहारण के लिए—

  • सात लोग, चार गाय, तीसरी कक्षा,दस कमरे,


सरल शब्दों में
— ऐसे  विशेषण शब्द जिनसे संज्ञा अथवा सर्वनाम की संख्या की विशेषता का  बोध होता हैं,उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे—

  • चौथी मंजिल,कुछ लोग,ढाईसौ छात्र, सारे पेड बहुत जानवर आदि।


दूसरे शब्दों में
– वह विशेषण, जो अपने विशेष्यों की निश्चित या अनिश्चित संख्याओं का बोध कराए, ‘संख्यावाचक विशेषण’ कहलाता है। उदहारण के लिए—एक, दो,तीसरा,चौथा, दुगुना आदि।

जैसे-

  • राम का पहला पुत्र डॉक्टर है।
  • सोहन दसवीं कक्षा में पढता है।
  • हमारी कालोनी में सोलह मकान है।

इन वाक्यों में ‘पहला’,’दसवीं ‘औा ‘सोलह’संख्यावाचक विशेषण हैं,

अन्य शब्दों में—जो विशेषण अपने विशेष्य की संख्या—संबंधी विशेषता का बोध कराते है। संख्यावाचक विशेषण’ कहलाता है।

जैसे-

  • ‘पाँच’ घोड़े दौड़ते हैं।
  • सात विद्यार्थी पढ़ते हैं।

इन वाक्यों में ‘पाँच’ और ‘सात’ संख्यावाचक विशेषण हैं, क्योंकि इनसे ‘घोड़े’ और ‘विद्यार्थी’ की संख्या संबंधी विशेषता का ज्ञान होता— है।

संख्यावाचक विशेषण के भेद

संख्यावाचक विशेषण के दो भेद होते है-

  1. निश्चित संख्यावाचक विशेषण
  2. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण


(i)निश्चित संख्यावाचक विशेषण :
जो  विशेषण संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की संख्या  संबंधी- निश्चित विशेषता का बोध कराते है।उन्हें निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।


दूसरे शब्दों में
—वे विशेषण शब्द जो विशेष्य की निश्चित संख्या का बोध कराते हैं,निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।


सरल शब्दों में
– जिन विशेषण शब्दों से  किसी भी निश्र्चित संख्या का ज्ञान/बोध होता है।, वह निश्चित संख्यावाचक विशेषण होते  है।

जैसे-

  • एक, दो आठ,  पॉच,तीगुना,चौगुना, सातवाँ आदि।

अन्य उदाहरण-

  • मेरी कक्षा में चालीस छात्र हैं।
  • कमरे में एक पंखा घूम रहा है।
  • डाल पर दो चिड़ियाँ बैठी हैं।
  • प्रार्थना-सभा में सौ लोग उपस्थित थे।

इन सभी वाक्यों में विशेष्य की निश्चित संख्या का बोध हो रहा हैं। जैसे- कक्षा में कितने छात्र हैं?- चालीस, कमरे में कितने पंखे घूम रहे हैं?- एक, डाल पर कितनी चिड़ियाँ बैठी हैं?- दो तथा प्रार्थना-सभा में कितने लोग उपस्थित थे?- सौ।

निश्चित संख्यावाचक विशेषणों से संज्ञा या सर्वनाम की निम्नलिखित  विशेषता या प्रकार का बोध होता हैं-

 

(क) गणनासूचक/बोधक विशेषण-  जिन  विशेषणों से गिनती/गणना और अकों का बोध कराएँ।

  • जैसे-  तीन, सात ,तेरह, सवा, अढाई,डेढ सौ,एक, दो, दस, बीस आदि।

उदहारण

  • राम के दो बेटे है।
  • नौकर ने सवा सौ रूपए लिए।
  • कक्षा में पॉच छात्र है।

 

इसके भी दो प्रभेद होते हैं-

(1) पूर्णांकबोधक विशेषण- इसमें पूर्ण संख्या का प्रयोग होता है।

  • जैसे- चार छात्र, आठ लड़कियाँ।

(2) अपूर्णांकबोधक विशेषण- इसमें अपूर्ण संख्या का प्रयोग होता है।

  • जैसे- सवा रुपये, ढाई किमी. आदि।

 

(ख) क्रमसूचक/बोधक विशेषण– जो विशेषण क्रम का बोध कराएॅ अर्थात  वे विशेषण जो वस्तुओं या व्यक्तियों के क्रम (order) का बोध कराएँ। क्रमसूचक/बोधक विशेषण  है।

  • जैसे-  छठा,सातवीं,सौवी, आठवी,अठाहरवॉ,दूसरी,पाँचवाँ, बीसवाँ आदि।

 

उदहारण:—

  • हम आठवी मंजिल पर रहते है।
  • रीना की दूसरी बहन दिल्ली में है।

(ग) आवृत्तिसूचक/बोधक विशेषण- जो विशेषण संख्या के गुणन का बोध कराएँ।

  • जैसे- दुगने छात्र, ढाई गुना लाभ आदि।

उदहारण:—

  • राधा चतुर से ​तिगुनी तनख्वाह पाती है।
  • लोगों को तुम्हारे दोहरे व्यक्तित्व का पता चल ही गया।

(घ) संग्रह सूचक/बोधक विशेषण– यह अपने विशेष्य की सभी इकाइयों का संग्रह बतलाता है।

  • जैसे- चारो आदमी, आठो पुस्तकें आदि।

उदहारण:—

  • राधा के चारो बेटे मूर्ख है।
  • सुधा ने आठों धामों के दर्शन कर लिए

(ड़) समुदाय/समुच्चयसूचक/बोधक विशेषण– यह वस्तुओं की सामुदायिक संख्या को व्यक्त करता है।

  • जैसे- दर्जन, कौडी, सैंकडा ,सतसई,शतक, चौका, पंसेरी, दुक्की, छक्का तिग्गी आदि।

उदहारण:—

  • रेखा ने जोड़ी चप्पल खरीदी।
  • गोपाल पाँच दर्जन कॉपियाँ  लाया।।
  • पूजा ने दर्जन केले खरीदे।
  • शयाम ने चार दस्ते का रजिस्टर बनाया।

(च) वीप्सासूचक/बोधक विशेषण- व्यापकता का बोध करानेवाली संख्या को वीप्सावाचक कहते हैं

यह दो प्रकार से बनती है– संख्या के पूर्व प्रति, फी, हर, प्रत्येक इनमें से किसी के पूर्व प्रयोगसे या संख्या के द्वित्व से।जैसे

  •  प्रत्येक तीन घंटों पर यहाँ से एक गाड़ी खुलती है।
  • पाँच-पाँच छात्रों के लिए एक कमरा है।


(ii)अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण :-
जो  विशेषण संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की संख्या संबंधी- निश्चित विशेषता का बोध  नहीं कराते है।उन्हें अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं,जैसे:—

  • सुनामी में बहुत सारे लोग मारे गए।
  • लंका में अनेक महल जल गए।
  • बम के भय से कुछ लोग बेहोश हो गए।


सरल शब्दों में
:—वे विशेषण शब्द जो विशेष्य की निश्चित संख्या का बोध न कराते हों, वे अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।

जैसे:—

  • सारे आम सड़ गए।
  • पुस्तकालय में असंख्य पुस्तकें हैं।
  • कक्षा में बहुत कम छात्र उपस्थित थे।
  • कुछ फल खाकर ही मेरी भूख मिट गई।


दूसरे शब्दों में
– जिस विशेषण से संख्या निश्चित रूप से नहीं जानी जा सके, वह अनिश्चित विशेषण है।जैसे-

  • कई, कुछ, सब, थोड़, सैकड़ों, अरबों आदि।

अन्य उदाहरण

  • वह कुछ महीने से गायब है।
  • मुझे थोडे रूपये चाहिए।
  • इस अस्पताल में बहुत मरीज है।
  • तुम उसे सभी दिशाओं में ढूढों
  • पिताजी ने बहुत केले खरादे
  • वह इस घडी की बहुत कीमत मॉग रहा है।
  • चुनावों में कई गुंडे भी खडे थे।

इन सभी वाक्यों में विशेष्य की निश्चित संख्या का बोध नहीं हो रहा है? क्योकि कुछ, थोडे ,बहुत,सभी ,कई आदि ये सभी शब्द अनिश्चित संख्या का बोध करा रहे है।

(3)परिमाणवाचक विशेषण(Quantitative Adjective) :-

परिमाण शब्द का अर्थ है—मात्रा
अन्य शब्दों में —जो विशेषण अपने विशेष्य की मात्रा या परिणाम संबंधी विशेषता का बोध कराते है,वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
  • जैसे- ‘सेर’ भर दूध, ‘तोला’ भर सोना,आदि।
सरल शब्दों में —जिन विशेषण शब्दों से किसी वस्तु पदार्थ के माप या नाप-तोल का बोध होता है, वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
दूसरे शब्दों में- ऐसे विशेषण शब्द जिनसे संज्ञा और सर्वनाम शब्दों की नाप तौल संबंधी विशेषता का बोध होता है,उन्हें  परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। अर्थात
हम कह सकते है कि—जो विशेषण  अपने विशेष्यों की निश्चित अथवा अनिश्चित मात्रा (परिमाण) का बोध कराए, परिमाणवाचक विशेषण कहलाता है।
जैसे—
  • पॉच किलो चीनी, डेढ लीटर दूध, बहुत सामान, थोडी मिठाई, इतना विश्वास, इतनी हिम्मत, सौ टन लोहा आदि।
इन वाक्यों में  “डेढ लीटर,पॉच किलो,सौ टन” आदि से माप तोल का पता चलता है। इसलिए परिमाणवाचक विशेषण  हैं।
परिणाम विशेषण उन संज्ञा शब्दों की विशेषता बताते हैं जिन्हें गिना नहीं जा सकता है अर्थात वे द्रव्यवाचक संज्ञा शब्द होते है।जैसे —
  • कुछ चावल ,अधिक अनाज, थोड़ा’ पानी, ‘कुछ’ पानी, ‘सब’ धन, ‘और’ घी लाओ, ‘ ‘बहुत’ चीनी इत्यादि।
संख्यावाचक विशेषणों की ही तरह परिणाम विशेषण भी अपने विशेष्य के निश्चित तथा अनिश्चित परिणाम के बारे में बताते हैं। अत:इनके भी दो उपभेद किए जाते हैं
परिमाणवाचक विशेषण के भेद

परिमाणवाचक विशेषण के दो भेद होते है-
  1. निश्चित परिमाणवाचक विशेषण
  2. अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
(i) निश्चित परिमाणवाचक:– निश्चित परिमाणवाचक विशेषण किसी संज्ञा या सर्वनाम के निश्चित परिणाम का बोध कराते है।
सरल शब्दों में कह सकते है कि— जो  विशेषण संज्ञा या सर्वनाम शब्दों  की परिणाम संबंधी निश्चित विशेषता का बोध कराते है। वे निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है।
जैसे-
  • चार गज कपडा,दस लीटर दूध, एक क्विंटल गेंहू बीस ग्राम सोनाआदि।
वाक्य प्रयुक्त अन्य उदहारण:—
  • राधा एक किलो चावल लाई।
  • रोहन ने आधा लीटर दूध पी लिया ।
  • सीमा ने तीन मीटर तार खरीदी।
इन वाक्यों में आए ” एक किलो,आधा लीटर ,तीन मीटर” निश्चित परिमाणवाचक विशेषण है।
(ii)अनिश्चित परिमाणवाचक :– जिस अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण से किसी संज्ञा या सर्वनाम के निश्चित परिणाम का बोध  न हो, उन्हें अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते है।
जैसे
  • कुछ आम, थोडा दूध, बहुत घी, कम चीनी, थोडा पानी आदि।
सरल शब्दों में कह सकते है कि —जो विशेषण शब्द किसी वस्तु की निश्चित मात्रा अथवा माप-तौल का बोध नहीं कराते हैं, वे अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है।
जैसे-
  •  कुछ आम, बहुत घी, कम चीनी,थोडा पानी ‘सब’ धन, ‘कुछ’ दूध, ‘बहुत’ पानीआदि।
वाक्य प्रयुक्त अन्य उदहारण:—
  • राम चावल ले आया।
  • चाय में थोडी—सी चीनी और डाल दो।
  • दाल में ज्यादा नमक पड गया है।

संकेतवाचक या सार्वनामिक विशेषण (Demonstrative Adjective)

जब सर्वनाम शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर किसी संज्ञा की विशेषता बताने का प्रकार्य करने लगते हैं तो वे सार्वनामिक विशेषण कहलाते है।
दूसरे शब्दों में —ऐसे सर्वनाम शब्द जो संज्ञा शब्दों के पहले आकर विशेषण का कार्य करते हैं या जानकारी देते है,उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते है।

सरल शब्दों में— यदि कोई सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्द से पहले लगकर अपना संबंध दर्शाए ,तब वे सार्वनामिक विशेषण कहलाते है।

उदहारण के लिए

  • वह बंदर शैतान हैं।
  • यह मेज  टूट गई है।
  • उसकी बहन अभिनेत्री है।
  • वहॉ कौन आदमी जा रहा है।
  • हमारा परिवार ह​​रियाणा में है।
  • इस कमरे को साफ कर दो।
  • किसी लडके को बुला दो।
इन वाक्यों में आए सार्वनामिक विशेषण है—वह, यह, कौन, उसकी ,हमारा, उस, किसी,इस आदि ये शब्द संज्ञा शब्दों से पहले लगकर उनकी विशेषता प्रकट कर रहें है।

विशेष

  • सर्वनाम  शब्द संज्ञा से पहले लगते है और उसकी विशेषता प्रकट करते है।
  • ऐसे सर्वनाम जो संज्ञा से पूर्व प्रयुक्त होकर उसकी ओर संकेत करते हुए विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं, ‘संकेतवाचक विशेषण’ कहलाते हैं।
  • जब सर्वनाम शब्द अपना प्रकार्य छोडकर किसी संज्ञा की विशेषता बताने का प्रकार्य करने लगते हैं तब वे विशेषण बन जाते हैं।
  • मेरा,तेरा,आपका,उसका,इसका,इनका,उनका,यह,वह,किसक,जिसका,आदि शब्द मूलत: विशेषण बन जाते हैं
  • जब ये संज्ञा शब्दों की विशेषता बताने लगते है। तब उनका सदंर्भ विशेषण बन जाता है। जैसे—यह मेज,वह कुरसी,आपका बेटा,  उनकी दुकान,मेरा घर ,अपना देश किसकी किताब आदि।
जिन सर्वनाम शब्दों से किसी के विषय में सकेंत पाया जाए, उन्हें  सार्वनामिक,संकेतवाचक या निर्देशक भी कहते है,
जैसे
  • यह घर हमारा है।—-निश्चय वाचक
  • यह बालक अच्छा है। — सार्वनामिक
  • उस श्रेणाी में बहुत शोर हो रहा है।—— निश्चय वाचक
  • तुम किस गली में रहते हो? ————प्रश्नवाचक
  • यहीं,यह,वह,उस,तथा किस संकेत वाचक विशेषण है।—- सार्वनामिक
पुरूषवाचक और निजवाचक सर्वनामों को छोड़ बाकी सभी सर्वनाम संज्ञा के साथ प्रयुक्त होकर सार्वनामिक विशेषण बन जाते हैं।
(मैं, तू, वह ) के सिवा अन्य सर्वनाम जब किसी संज्ञा के पहले आते हैं, तब वे ‘संकेतवाचक’ या ‘सार्वनामिक विशेषण’ बन जाते हैं।
सार्वनामिक विशेषण के अनेक रूप हो सकते है।
निश्चयवाचक/संकेतवाचक सार्वनामिक विशेषण———
  • उस किताब को यहॉ ले आओ।
  • क्या यह कलम तुम्हारी है।
अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण———
  • कोई सज्जन आए हुए हैं।
  • घर में खाने को कुछ चीज नहीं है।
प्रश्नवाचक सार्वनामिक विशेषण——
  • कौन आदमी आया है?
  • किस लडके ने तुम्हें मारा है?
  • कौन सी किताबें तुम्हें चाहिए?
संबंधवाचक सार्वनामिक विशेषण———
  • जो आदमी कल आया था वह आदमी बहार बैठा है।
  • वह बालक सामने जा रहा है जिसने तुम्हारी किताब फाडी थी ।


सार्वनामिक विशेषण के भेद


व्युत्पत्ति के अनुसार सार्वनामिक विशेषण के भी दो भेद है
  1.  मौलिक सार्वनामिक विशेषण
  2. यौगिक सार्वनामिक विशेषण
(i) मौलिक सार्वनामिक विशेषण– जो सर्वनाम बिना रूपान्तर के मैलिक रूप में संज्ञा के पहले आकर उसकी विशेषता बतलाते हैं।    मौलिक सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं,उन्हें इस वर्ग में रखा जाता है।
जैसे-
  •  यह घर मेरा है।
  • वह लड़का सोहन है।
  • यह किताब फटी हुई है।
  • कोई आदमी रो रहा है।
  • कोई नौकर  काम के लिए है।इत्यादि।
(ii) यौगिक सार्वनामिक विशेषण– जो मूल सर्वनाम रूपान्तरित होकर संज्ञा शब्दों की विशेषता बतलाते है।उन्हें  यौगिक सार्वनामिक विशेषण कहा जाता है।
जैसे-
  • ऐसा आदमी नहीं देखा
  • कैसा घर  चाहिए
  • जैसा देश  वैसा भेष आदि।

नामिक विशेषण (Nominal Adjective)

​जिस तरह सर्वनाम शब्द वाक्य में प्रयुक्त होहर संज्ञा की विशेषता बताते है,उसी तरह संज्ञा शब्द अन्य शब्दों की विशेषता बता सकते है। जैसे:—
  • सोने के गहने,प्लास्टिक के बरतन , सिलाईकी मशीन,कूडे का ढेर,मावे की बरफी,गन्ने का रस,बैंगन का भरता, मक्के की रोटी,भिंडी की सब्जी,रबर की चप्पल,आम का वृक्ष,सुरेश की बहन,पिताजी का कमरा आदि।
इन उदहारणों में समस्त स्थूल संज्ञा अपने अपने संज्ञा पदों की विशेषता बता रहे हैं।
अर्थात हम कह सकते है कि जो संज्ञा शब्द किसी अन्य संज्ञा की विशेषता बताने का प्रकार्य करते हैं। उन्हें  नामिक विशेषण कहते है।
उदहारण के लिए
  • कल रीना की शादी है।
  • इन दिनों बच्चों के स्कूल बंद हैं।
  • गंगा की सफाई बहुत जरूरी है।
  • असम की नदियों में बाढ आ गईहै।
  • पुलिस ने चोर की पिटाई की।

(ड) व्यक्तिवाचक विशेषण (Proper Adjective)

व्यक्तिवाचक विशेषण वह विशेषण है जो संज्ञा से बनकर/प्रयुक्त् होकर अन्य संज्ञा व सर्वनाम की विशेषता बताते है । वे व्यक्तिवाचक विशेषण कहलाते हैं।  जैसे-
  •  जोधपुरी जूती,काशमीरी सेव, बीकानेरी भुजिये
दूसरे शब्दों में– ऐसे शब्द जो संज्ञा के असल या विशेष रूप व्यक्तिवाचक संज्ञा में प्रयुक्त् हुए होते है, या बनते  हैं , वे व्यक्तिवाचक विशेषण कहलाते हैं। जैसे-
  • यथा- वह राम ही है, जो कल वहां खड़ा था
सरल शब्दों में ——व्यक्तिवाचक संज्ञा शब्दों से बने विशेषणों  को व्यक्तिवाचक विशेषण कहते हैं। एवं विशेषण शब्दों की रचना भी करते हैं।जैसे-
  • इलाहाबाद से इलाहाबादी
  • जयपुर से जयपुरी
  • बनारस से बनारसी
  • लखनऊ से लखनवी आदि।
उदाहरण-
  • ‘इलाहाबादी’ अमरूद मीठे होते है।
  • भरत जोधपुरी जूती पहनता हैं।
इस वाक्य में जोधपुर व्यक्तिवाचक संज्ञा शब्द है जो जोधपुरी में बदलकर व्यक्तिवाचक विशेषण हो गया है और जो जूती(जातिवाचक संज्ञा) की विशेषता बता रहा है।जैसे :-
  • इलाहबाद से इलाहाबादी ,
  • जयपुर से जयपुरी ,
  • बनारस से बनारसी , लखनऊ से लखनवी आदि।
व्यक्तिवाचक विशेषण के  कुछ अन्य उदाहरण
मुझे  खाने में भारतीय खाना बहुत पसंद है

ऊपर दिए गए उदाहरण में आप देख सकते हैं भारतीय शब्द असल में तो व्यक्तिवाचक संज्ञा से बना भारत शब्द लेकिन अब भारतीय शब्द विशेषण की रचना कर रहा है। इस वाक्य में यह शब्द खाने कि विशेषता बता रहा है। अतः यह उदाहरण व्यक्तिवाचक विशेषण के अंतर्गत आयेंगे।

  मुझे गुजराती साडी सभी साड़ियों में से सबसे ज्यादा पसंद है

जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं कि गुजराती शब्द का प्रयोग किया गया है। यह शब्द  गुजरात शब्द से बना है जो एक व्यक्तिवाचक संज्ञा है लेकिन अब यह बनारसी बनने के बाद यह विशेषण कि तरह प्रयोग हो रहा है। अतः यह उदाहरण व्यक्तिवाचक विशेषण के अंतर्गत आएगा।

• हमारी दूकान पर जयपुरी जूतियॉ मिलती हैं।
ऊपर दिए गए उदाहरणों में जैसा कि आप देख सकते हैं जयपुरी शब्द का इस्तेमाल किया गया है। यह शब्द जयपुर शब्द से बना है जो कि एक व्यक्तिवाचक संज्ञा है।
यह शब्द जयपुरी बनने के बाद विशेषण बन जाता हैं एवं अब इस वाक्य में जूतियों  कि विशेषता बता रहा है। अतः यह उदाहरण व्यक्तिवाचक विशेषण के  है।
जैसे: –
  • आपका यह लखनवी अंदाज़ मुझे अच्छा लगा।
  • हमारी दूकान पर जयपुरी मिठाइयां मिलती हैं।

संबंधवाचक विशेषण(Relative Adjective)

 

संबंधवाचक विशेषण की परिभाषा
संज्ञा,सर्वनाम, क्रिया, क्रिया विशेषणों में विशेषण शब्दों  आदि का प्रयोग करके किसी एक वस्तु या व्यक्ति का संबंध दूसरी वस्तु या व्यक्ति के साथ बताया जाता है। तो वह संबंधवाचक विशेषण कहलाता है।
जैसे:
  • पढाकू’ यह शब्द ‘पढना‘ शब्द से बना है जो एक क्रिया विशेषण है।
  • भीतरी : यह शब्द “भीतर” शब्द से बना है।
  • कटाई: यह शब्द “काटना” शब्द से बना है।
अन्य शब्दों में कह सकते है कि——ऐसे विशेषण शब्द जो किसी एक वस्तु की विशेषता को दूसरी वस्तु के साथ जोडते या संबंध  बताते है, उन्हें संबंधवाचक विशेषण कहते हैं।
इस तरह के विशेषण संज्ञा, क्रियाविशेषण तथा क्रिया से बनते हैं। जैसे-
  • आनन्द   से   आनन्दमय (‘आनन्द’ संज्ञा से)
  • बाहरी    से    ” बाहर’    (क्रियाविशेषण से),
  • खुला     से     “खुलना’   (क्रिया से)।
कुछ अन्य उदहारण
  • वह दयामय है|
  • बरामदा बाहर है|
  • वह गला हुआ है|

प्रश्नवाचक विशेषण(Question Adjective )

 

जिन शब्दों  के द्वारा  किसी भी संज्ञा या  सर्वनाम से सम्बधित जानकारी प्राप्त करने के लिए  प्रश्न/उत्तर पुछे या किए जाते है। वे प्रश्नवाचक विशेषण  कहलाते है।
जैसे :-
  • कौन सी पुस्तक है , कौन आदि आया था , वह क्या है ? आदि।
सरल शब्दों में—— ऐसे विशेषण शब्द जिनका प्रयोग करके हमें संज्ञा या सर्वनाम के बारे में अधिक से अधिक (सम्पूर्ण) जानकारी मिल जाती है,या प्राप्त हो जाती है।  ऐसे शब्द प्रश्नवाचक विशेषण  कहलाते है।
जैसे
  • कौन, क्या ,किसे, किसको, किसलिए आदि।

 

प्रश्नवाचक विशेषण के अन्य उदहारण

  • व्यक्ति कौन है ?,
  • ह चीज़ क्या है ? वे शब्द प्रश्नवाचक विशेषण कहलाते हैं।
  • विकास के साथ कहाँ गए थे तुम ?
  • मेरे जाने के बाद घर कौन आया था ?
  • तुम कौन सी किताब के बारे में बात कर रहे हो?

विशेषण  की रूप—रचना

विशेषण  की रूप—रचना संज्ञा की रूप रचना से पर्याय मिलती है।दोनों में रूपावली वर्ग निर्धारण लिंग पुल्ल्गि व स्त्रीलिंग और ध्वन्यात्मक स्वरूप अकारांत ईकारांत आदि पर होता है तथा रूपावली वचन एकवचन बहुवचन तथा विभक्ति मूल परसर्ग रहित,तिर्यक परसर्ग सहित के अनुसार चलती है।
नीचे विशेषणों की रूपावलीयों /तालिका  के द्वारा समझाया गया है।

रूपावली वर्ग—1 पुल्ल्गि (अकारांत)

 

  • विभक्ति                    एकवचन            बहुवचन
  • मूल परसर्ग  रहित —    अच्छा लडका—      अच्छे लडके
  • तिर्यक परसर्ग सहित—    अच्छे लडके को—  अच्छे लडकों को

संज्ञा की रूपावली वर्ग—1 में यह ध्याान रखना है कि यह संज्ञा तिर्यक बहुवचन में ओ’ विभक्ति लगता है।  यहॉ ‘ए’। ये प्रत्यय मात्रा के रूप  में ो लगते है।

रूपावली वर्ग—2 पुल्ल्गि अकारांत से भिन्न
  • विभक्ति         एकवचन             बहुवचन
  • मूल            सुंदर घर             सुंदर घर
  • तिर्यक          सुंदर घर, में          सुंदर घरों में
स्त्रीलिंग विशेषण
  • विभक्ति         एकवचन             बहुवचन
  • मूल           अच्छा/सुंदर लडकी—     अच्छी/सुंदर लड​कियॉ
  • तिर्यक          अच्छा/सुंदर लडकी ने    अच्छी/सुंदर लड​कियॉ ने

​नोट:—

  •   केवल पुल्ल्गि अकारांत विशेषणों में मूलरूप से भिन्न एक परिवर्तित रूप होता है।—–जैसे अच्छा मोटा, अच्छी मोटी
  • पुल्ल्गि अकारांत भिन्न तथा स्त्रीलिंग एक परिवर्तित रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
  • अत: यह सरल नियम बनाते है।
  • विशेषणों को ज्यों का त्यों प्रयुक्त किया जा सकता है।
  • केवल पुल्ल्गि अकारांत विशेषणों में मूल विभक्ति् एकवचन के अतिरिक्त सर्वत्र ‘ए’लगा रूप  प्रयुक्त किया जा सकता है।
  • अकारांत विशेषण के स्त्रीलिंग रूप ई लगाकर बनते है। जैसे अच्छा—अच्छी, मोटा—मोटी
  • किंतु कुछ फारसी विशेषण तथा इया शब्द उर्दू शैली में स्त्रीलिंग रूप ईकारांत रूप नहीं लेते है।
  • ये अकारांत विशेषण रूपावली वर्ग—2 के समान चलते है। न कि रूपावली वर्ग—1 के ।
हिंदी भाषा में विशेषण शब्दों की रचना संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, अव्यय आदि शब्दों के साथ उपसर्ग, प्रत्यय आदि लगाकर की जाती है।
विशेषणों की रूप-रचना निम्नलिखित अवस्थाओं में मुख्यतः संज्ञा, सर्वनाम और क्रिया में प्रत्यय लगाकर होती है-
कुछ शब्द मूल रूप से विशेषण होते है। जैसे—
  • निपुण, चतुर, सुंदर लेकिन कुछ प्रत्ययों तथा उपसर्गो्ं के लगाने से बनते है;
–संज्ञा में व्यक्तिवाचक संज्ञा से —बनारस से बनारसी,गाँधीवाद से गाँधीवादी, गुजरात से गुजराती,मुरादाबाद से मुरादाबादी, गाजीपुर से गाजीपुरी आदि।
–संज्ञा में जातिवाचक संज्ञा से———पुस्तक से पुस्तकीय, ,घर से घरेलू, ग्राम से ग्रामीण, शिक्षक से शिक्षकीय, परिवार से पारिवारिक,पहाड़ से पहाड़ी, कागज से कागजी आदि।
–सर्वनाम से
  • मैं से —मुझ—सा (सार्वनामिक विशेषण),
  • इतने—-  (संख्यावाचक विशेषण)
  • इतना — (परिमाणवाचक विशेषण)
  • उतने —  (संख्यावाचक विशेषण)
  • वैसा–    (सार्वनामिक विशेषण)
  • आप—सा – (सार्वनामिक विशेषण)
क्रिया से
  • चलना से चालू
  • भूलना से भूलक्क्ड ,
  • बेचना से बिकाउ
  • कमाना से कमाऊ,
  • भागना से भगोड़ा,
  • समझना से समझदार,
  • पठ से पठित,आदि।

अव्यय से—

  • बहार से बहारी
  • उपर से उपरी,
  • नीचे से निचला,
  • पीछे से पिछला, आदि।

विशेषणार्थकप्रत्यय से—

संज्ञा शब्दों को विशेषण बनाने के लिए जिन प्रत्ययों को जोडा जाता है। उन्हें विशेषणार्थक प्रत्यय कहते है। जैसे

  • इला,इक, ई,मान,वान, ईय आदि।
कुछ शब्द स्वंय विशेषण होते है और कुछ प्रत्यय लगाकर बनते है। जैसे
(1)’ई’ प्रत्यय से =  बोली,पारखी, सरकारी,थपकी,धमकी,टोली, जापान-जापानी, गुण-गुणी, स्वदेशी, धनी, पापी।
(2) ‘ईय’ प्रत्यय से = शासकीय, मानवीय, नारकीय,जाति-जातीय, भारत-भारतीय, स्वर्गीय, राष्ट्रीय ।
(3)’इक’ प्रत्यय से = ऐतिहासिक, मासिक, नैतिक, आर्थिक, सप्ताह-साप्ताहिक, वर्ष-वार्षिक, नागरिक, सामाजिक
(4)’इन’ प्रत्यय से =   पाप—पापिन, जोगी—जोगिन, तेली—तेलिन, माली—मालिन, कुल-कुलीन,
नमक-नमकीन, प्राचीन।
(5)’मान’ प्रत्यय से = बुद्धिमान,यजमान,वर्तमान, गति-गतिमान, श्री-श्रीमान।
(6)’आलु’प्रत्यय सेझगडालु, शर्मालु, लजालु, कृपा -कृपालु, दया-दयालु ।

(7)’वान’ प्रत्यय से =    सत्य—सत्यवान,दया —दयावान , बल-बलवान, धन-धनवान।

(8)’इत’ प्रत्यय से = नियम-नियमित, अपमान-अपमानित, आश्रित, चिन्तित ।

(9)’ईला’ प्रत्यय सेखर्च —खर्चीला,नोक—नुकीला,छवि—छबीला,रस—रसीला,चमक-चमकीला, हठ-हठीला, फुर्ती-फुर्तीला।

 

विशेषण शब्दों की रचना

हिंदी भाषा में विशेषण शब्दों की रचना संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, अव्यय आदि शब्दों के साथ उपसर्ग, प्रत्यय आदि लगाकर की जाती है।

संज्ञा शब्दों से विशेषण शब्दों का निर्माण/रचना

संज्ञा विशेषणसंज्ञाविशेषण
अंत
अतिमअभ्यास
अभ्यस्त
आदर
आदरणीय अवरोध
अवरुद्ध
विवाह
वैवाहिकआराधनाआराध्य.
दो
दूसराउत्तेजना
उत्तेजित
नगरनागरिकऋण
ऋणी
तुंदतुंदिल एकता एकआदि
प्रदेशप्रादेशिकआधार

आधारित
प्रकृतिप्राकृतिकआरम्भआरम्भिक
कथनकथिततत्त्वतात्त्विक
राधाराधेयदेव
दैविक/दैवी
गंगा
गांगेयसूर्यसौर/सौर्य
प्रसंग
प्रासंगिकहृदय
हार्दिक
पर्वतपर्वतीयक्षेत्रक्षेत्रीय
धनधनवानआदि
आदिम
दीक्षा
दीक्षितआकर्षणआकृष्ट
नियम
नियमितआयु
आयुष्मान
निषेधनिषिद्धअनुवाद
अनुदित
जटाजटिलअनुशासन
अनुशासित
इतिहासऐतिहासिकअपमानअपमानित
अंचल
आंचलिकअंक
अंकित
अपेक्षाअपेक्षित
अग्निआग्नेय
अध्यात्मआध्यात्मिकअर्थआर्थिक
उत्कर्षउत्कृष्टअधिकारअधिकारिक
उपकारउपकृत/गर्वगर्वीला
उपकारक
उपेक्षाघावघायल
काँटा
कँटीलाग्राम
ग्राम्य/ग्रामीण
उपेक्षितउपेक्षणीयग्रहणगृहीत/ग्राह्य
बुद्ध
बौद्धमृत्युमर्त्य
भूमिभौमिकमुख
मौखिक
तट
तटीयरसायनरासायनिक
परिवार
पारिवारिकराजनीतिराजनीतिक
पूजा
पूजनीयसभासभ्य
संकेत सांकेतिकइच्छाऐच्छिक
लघुलाघवईश्वर

ईश्वरीय
घरघरेलूउदयउदित
श्रद्धाश्रद्धेय/श्रद्धालुउन्नतिउन्नत
वनवन्यकर्मकर्मठ
लोभ

लुब्ध/लोभीक्रोधक्रोधालु, क्रोधी
उपयोगउपयोगी/उपयुक्तकर्मीकर्मण्य
गृहस्थ
गार्हस्थ्यसंसार
सांसारिक
गुणगुणवान/गुणीजलजलीय
चिंताचिंत्य/चिंतनीय/चिंतितअणुआणविक
जागरणजागरित/जाग्रतनिश्र्चय
निश्चित
तिरस्कारतिरस्कृतधर्मधार्मिक
दयादयालुदर्शन
दार्शनिक
परलोकपारलौकिकचयन
चयनित
कुंतीकौंतेय
निंदानिंद्य/निंदनीय
समरसामरिकनगरनागरिक
पुरस्कार
पुरस्कृतशोभा
शोभित
पुरुषपौरुषेयअनुभव
अनुभवी
उदास उदासीचमक
चमकीला
पृथ्वी पार्थिवमाता
मातृक
प्रमाण
प्रामाणिकराष्ट्रराष्ट्रीय
बुद्धिबौद्धिकलोहा
लौह
भूगोलभौगोलिक
लाभलब्ध/लभ्य
मासमासिकवायुवायव्य/वायवीय
शरीर शारीरिकधन धनी
ईमानदार
ईमानदारीसुख सुखी
सजावटसजावटी
शीत
शीतल
आत्मा
आत्मीयपुण्य
पुण्यमय
सब्जी
सब्जीवाला
हरियाणाहरियाणवी
भय भयभीत
मानव
मानवीय
जहर


जहरीलाविवाह
वैवाहिक
पीडा पीडितसाहित्य साहित्यिक

सर्वनाम शब्दों से विशेषण शब्दों निर्माण

सर्वनाम विशेषणसर्वनाम विशेषण
जोजैसा
यह

ऐसा
मैं मुझसा
कौन
कैसा
हमहमसाआप आपसी
वह
वैसातुमतुमसा
क्रिया शब्दों से विशेषण शब्दों निर्माण
क्रिया विशेषणक्रियाविशेषण
उडना
उडाकूभूलना
भूलक्क्ड
टिकना
टिकाउसडनास​डियल
सजाना

सजावटीपीनापियक्कड
खानाखाउ
कटना

कटाई

मरना
मरियलमिलन

मिलनसार
बेचना बिकाउलड़ना

लड़ाकू
तैरनातैराकखेलना
खिलाड़ी
पढना
पढाकूअडनाअडियल
कमानाकमाउभागना
भगोडा
घटनाघटितलूटनालुटेरा
पठपठितरक्षारक्षक

उड़ना उड़ाकू
उड़ाकू
पत् पतित
अव्यय शब्दों से विशेषण शब्दों निर्माण
अव्यय विशेषणअव्यय विशेषण
पीछे
पिछलाउपरउपरी
बाहर
बाहरीआगेअगला
भीतरभीतरीनीचे निचला

विशेषण की तुलना या अवस्थायें  (Degree of Comparison)

विशेषण विशेष्य की विशेषता बताता है और यह विशेषता  गुण, परिणाम अथवा संख्या की दृष्टि से होती है। दो या दो सेअधिक व्यक्तियों, प्रणियों,वस्तुओं आदि में एक से गुण प्राय: कम होते है। तथा इन सभी  विशेष्यों के गुण-अवगुणों  की तुलना की जाती है तो उन्हें ‘तुलनाबोधक विशेषण’ कहते हैं

अन्य शब्दो में — विशेषण शब्द संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता प्रकट करने के साथ साथ ​कुछ स्थितियों में तुलना करने का कार्य भी करते है। तथा तुलना के द्वारा हम इस अंतर को समझाते है।
तुलना— वस्तुओं ,व्यक्तियों,के गुण दोष बतलाने या उनका आपस में मिलान करने को तुलना कहते है।
तुलना करने के विचार या दृष्टि से विशेषणों की तीन अवस्थाएॅ है।
  1. मूलावस्था (Positive Degree)
  2. उत्तरावस्था (Comparative Degree)
  3. उत्तमावस्था (Superlative Degree)
(i)मूलावस्था :- यह अवस्था पहली अवस्था होती है।  जिसमें  केवल विशेषणों का समान्य प्रयोग होता है। इस स्थिति में विशेषण तुलना नहीं करते है। अर्थात

जिस अवस्था में किसी  व्यक्ति या  वस्तु के गुण-दोष  को बताने के लिए  हम  जिन विशेषणों का  उपयोग करते है। वह  विशेषण की मूलावस्था कहलाती है

दूसरे शब्दों में– जिन  विशेषण शब्दों के द्वारा  केवल एक व्यक्ति या वस्तु की विशेषता का पता चलता है और किसी् दूसरे से तुलना करना सम्भव ना हो , उसे विशेषण की मूलावस्था कहते हैं।

इस अवस्था में विशेषण की किसी अन्य से विशेषण तुलना नहीं की जाती है। सीधे व्यक्त किया जाता है।
जैसे
  • यह बालक चंचल है।
  • यह आम बहुत मीठा है।
  • मीता घोष” योग्य” अध्यापिका है।
  • जीवनी “अज्ञेय” का नया उपन्यास है।
  • स्वर्गश्रम हरिद्वार का प्राचीन आश्रम है।
  • “नवभारत टाइम्स” दैनिक समाचार—पत्र है।
इसमें कोई तुलना नहीं होती, बल्कि सामान्य विशेषता बताई जाती है।
(ii)उत्तरावस्था :—-इसमें दो व्यक्तियों या पदार्थों की परस्पर तुलना की जाती है।
उत्तरावस्था में दो व्यक्तियों और प्रणियों आदि के गुण— दोषों की तुलना की जाती है। इसमें एक संज्ञा शब्दों को दूसरे संज्ञा शब्द से श्रेष्ठ या हीन दिखाया जाता है।अर्थात
अन्य शब्दों में कह सकते है कि—जब दो व्यक्तियों या वस्तुओं के बीच  के गुणों— दोषों की तुलना श्रेष्ठ या हीन के आधार पर की जाती है।  तब उसे विशेषण की उत्तरावस्था कहते हैं।
दूसरे शब्दों में- जिन विशेषण शब्दों में एक वस्तु की विशेषता को दूसरी वस्तु की विशेषता से अधिक  बताई जाती है,  तो वह विशेषण की उत्तरावस्था  होती है।
उत्तरावस्था में—  से, से कम, से अधिक,की अपेक्षा, से कहीं, आदि शब्द प्रयुक्त किए जाते है।
जैसे-
  • सीमा बहन से डरपोक है।
  • राजेश की अपेक्षा विकास कुजूस है।
  • मॉ से बढकर बेटी चालाक है।
  • अमृतसर की अपेक्षा हैदराबाद बडा शहर है।
  • गोपी राम से श्रेष्ठ वक्ता है।
उत्तरावस्था में केवल तत्सम शब्दों में ‘तर’ प्रत्यय लगाया जाता है। जैसे-
  • सुन्दर + तर >सुन्दरतर
  • महत् + तर >महत्तर
  • लघु + तर >लघुतर
  • अधिक + तर >अधिकतर
  • दीर्घ + तर > दीर्घतर
हिन्दी में उत्तरावस्था का बोध कराने के लिए ‘से’ और ‘में’ चिह्न का प्रयोग किया जाता है। जैसे-।
  • वह बालक गणेश से बडा है।
  • मेरा मकान तुम्हारे मकान से बडा है।
  • पंजाब में अधिकतम अन्न होता है।
विशेषण की उत्तरावस्था का बोध कराने के लिए ‘के अलावा’, की तुलना में’, ‘के मुकाबले’ आदि पदों का प्रयोग भी किया जाता है। जैसे-
  • दिल्ली के मुकाबले गोआ अधिक स्वच्छ है।
  • अंग्रेजी की तुलना में हिंदी सरल  है।
  • आपके अलावा वहाँ कोई उपस्थित नहीं था

(iii)उत्तमावस्था :– इसमें दो से अधिक व्यक्तियों या पदार्थों की परस्पर तुलना की जाती है।

यह विशेषण की सर्वोत्तम अवस्था है।इसमें (उत्तमावस्था) में अनेक वस्तुओं और प्रणियों आदि की तुलना की जाती है। इसमें किसी एक को कम श्रेष्ठ या सबसे कम दर्शाया जाता है।  तब वह अवस्था  विशेषण की उत्तमावस्था कहलाती है। अर्थात
अन्य शब्दों में जब दो या दो से  अधिक वस्तुओं और प्रणियों के बीच तुलना की जाती है और उनमें से एक को श्रेष्ठता  दी जाती है,उस अवस्था को  विशेषण की उत्तमावस्था कहते है।
दूसरे शब्दों में– जिन विशेषणों में किसी वस्तु की विशेषता को दूसरी सभी  वस्तुओं की विशेषता से अधिक गुणवान बताया जाए तथा  दूसरे को दोषी तो  वह विशेषण की उत्तमावस्था होती  है।
इसमें विशेषण द्वारा किसी वस्तु अथवा प्राणी को सबसे अधिक गुणशाली या दोषी बताया जाता है ,तथा  उनमें एक की दूसरी सब वस्तुओं या व्यक्तियों से न्युनता या अधिकता बतलाई जाती हैं ।
उत्तमावस्था में सर्वश्रेष्ठ,सबमें,सबसे बढकर,सर्वाधिक,सभी को आदि शब्द प्रयुक्त किए जाते है।
  • इन सब में से तुम सबसे सुन्दर हो।
  • हल्क सबसे ज्यादा बलवान है।
  • सभी महासागरों में प्रशांत महासागर विशालतम है
तत्सम शब्दों की उत्तमावस्था के लिए ‘तम’ प्रत्यय जोड़ा जाता है। जैसे-
  • सुन्दर + तम > सुन्दरतम
  • महत् + तम > महत्तम
  • लघु + तम > लघुतम
  • अधिक + तम > अधिकतम
  • श्रेष्ठ + तम > श्रेष्ठतम
‘श्रेष्ठ’, के पूर्व, ‘सर्व’ जोड़कर भी इसकी उत्तमावस्था दर्शायी जाती है।
जैसे
  • नीरज सर्वश्रेष्ठ लड़का है।
फारसी के ‘ईन’ प्रत्यय जोड़कर भी उत्तमावस्था दर्शायी जाती है।
जैसे
  • बगदाद बेहतरीन शहर है।
उपर्युक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि विशेषण की उत्तरावस्था तथा उत्तमावस्था बताने के लिए एक या अधिक से तुलना की जाती है।

तुलनात्मक अवस्थाओं के रूप

विशेषण से पहले  ‘अधिक’, ‘सबसे अधिक’ लगाकर, तुलनात्मक विशेषण शब्द बनाए जाते है।
मूलावस्थाउत्तरावस्था उत्तमावस्था
बुद्धिमानअधिक बुद्धिमान सबसे अधिक बुद्धिमान
मोटाअधिक मोटा सबसे अधिक मोटा
अच्छा अधिक
अच्छा सबसेअधिक अच्छा
चालाक अधिक चालाक सबसे अधिक चालाक
अच्छी अधिक अच्छी सबसे अच्छी
बलवान अधिक बलवान
सबसे अधिक बलवान
संस्कृत और हिंदी के साथ ‘तर’ और तम’ प्रत्यय लगाकर तुलनात्मक विशेषण शब्द बनाए जाते है।
मूलावस्थाउत्तरावस्था उत्तमावस्था
लघुलघुतरलघुतम
सुन्दरसुन्दरतरसुन्दरतम
कोमलकोमलतरकोमलतम
कठोरकठोरतरकठोरतम
तीव्रतीव्रतरतीव्रतम
उच्च
उच्चतर
उच्त्तम
प्रियप्रियतरप्रियतम
निम्रनिम्रतर
निम्रतम
निकृष्टनिकृष्टतर निकृष्टतम
महत्महत्तर
महत्तम
महानमहानतरमहानतम
न्यूनन्यूनतरन्यूनतम
श्रेष्ठश्रेष्ठतरश्रेष्ठतम
मूलावस्थाउत्तरावस्थाउत्तमावस्था
चतुर
चतुरतरचतुरतम
अधिकअधिकतर
अधिकतम
प्रियप्रियतरप्रियतम
मधुर

मधुरतरमधुरतम
तीव्र तीव्रतर तीव्रतम
वृहत्
वृहत्तर वृहत्तम
विशाल विशालतर
विशालतम
उत्कृष्ट उत्कृष्टर उत्कृटतम
सुंदर सुंदरतर सुंदरतम
गुरु
गुरुतर गुरुतम

विशेषण  पर प्रभाव(Effect of Adjective)

विशेषण एक विकारी शब्द है। अत: इसके रूप में विकार परिवर्तन आता है।
यह प्रभाव चार प्रकार का होता है।
  • लिंग का प्रभाव
  • वचन का प्रभाव
  • कारक का प्रभाव
  • विशेषण का विशेषण प्रभाव
लिंग का प्रभाव:—यदि मूल विशेषण अकारांत हो और स्त्रीलिंग हो तो अकारांत विशेषण ईकारांत हो जाता है।
जैसे
  • मीठा——— मीठी    —-(चीनी)
  • विषैला——— विशैली—-( गैस)
  • बुरा————— बुरी —-(स्त्री)
  • धीमा———— धीमी—–( लौ)
  • छोटा———— छोटी —-(लडकी)
  • अच्छा ————अच्छी—-( घडी)
वाक्य में प्रयोग
  • आम मीठा है।———————  इमरती ​​मीठी है।
  • मेरा स्वर धीमा है।——————उसकी चाल धीमी है।
  • सॉप विषैला होता है।—————यह दवा विषैली है।
  • छोटा घोडा आ रहा है।————छोटी बिल्ली जा रही है।
  • बुरा काम मत करो।—————बुरी बात मत कहो।
  • यह अच्छा घर  है।——————यह अच्छी आदत है।
ध्यान देने योग्य बातें
अकारांत को छोडकर अन्य विशेषण स्त्रीलिंग विशेष्य के साथ भी अपरिवर्तित रूप में रहते है
  • दयालु पुरूष —————दयालु स्त्री
  • श्रद्धालु नर ———————श्रद्धालु नारी
  • नमकीन बिस्कुट———— नमकीन लस्सी
  • जोधपुरी साफा —————जोधपुरी साडी
  • विदेशी युवक ———————विदेशी युवती
  • शरारती लडका————— शरारती लडकी
अनिश्चित परिणाम वाचक विशेषण पर भी लिंग का प्रभाव नहीं पडता । जैसे —
  • दो आम——————————  दो लीची
  • चार लडके————————  चार लडकियॉ
  • दो किलो सेब————————दो किलो चीनी
वचन का विशेषण पर प्रभाव
यदि मूल विशेषण अकारांत हो विशेष्य बहुवचन पुल्लिंग हो तो अकारांत विशेषण एंकारांत हो जाता है।  उदहारण
  • छोटा ——छोटे
  • भला——- भले
  • लंबा——- लंबे
  • मीठा—— मीठे
  • अच्छा ——अच्छी
  • नीला ——-नीले
  • विषैला ——विषैले
  • काला ——–काले
वाक्य में प्रयोग
  • यह फल मीठा है। ———— ये फल मीठे है
  • यह बच्चा छोटा है। ————ये बच्चे छोटे है।
  • यह सॉप विषैला है।     ये सॉप विषैले है।
  • यह व्यक्ति भलाा है ———— ये व्यक्ति भले है।
  • अच्छा घोडा लाओ————— अच्छे घोडे लाओ।
  • काला कोट पहनो——————काले कोट पहनो
  • लंबा आदमी सोता है। —— लंबे आदमी सोते है।
  • यह फूल नीला है। ————— ये फूल नीले है।
ध्यान देने योग्य
  • यदि विशेष्य बहुवचन स्त्रीलिंग हो तो अकारांत विशेषण ईकारांत में परिवर्तित होता है।
कारक का विशेषण पर प्रभाव
यदि विशेष्य परसर्ग सहित हो तो अकारांत विशेषण एकवचन होते हुए भी एंकारांत हो जाता है।
  • अच्छा बालक पुस्तक पढता है। —— (परसर्ग रहित रूप)
  • अच्छे बालक पुस्तक पढते है।——   (परसर्ग सहित रूप)
  • रवि ने लंबा सॉप देखा।————     (परसर्ग रहित रूप)
  • रवि ने लंबे सॉप देखे—————     (परसर्ग सहित रूप)
  • दुशमन ने तीखा बाण मारा ———   ( परसर्ग रहित रूप)
  • दुशमन ने तीखे बाण मारे———      (परसर्ग सहित रूप)
विशेषण का विशेषण प्रभाव
यदि किसी वाक्य में एक विशेष्य के एक से अधिक विशेषणों हों तो उनमें एकरूपता होती है। ये सभी विशेषण या तो पुल्लिंग मेें होते हैअथवा स्त्रीलिंग में
  • राकेश छहरा, लंबा,गोरा लडका है।——— गरिमा छहीर लंबी गोरी लडकी है।
  • शांशक बुद्धिमान गुणवान अच्छा लडका है।———— रीना बुद्धिमती गुणवती अच्छी लडकी है।
यदि एक विशेषण के साथ अनेक विशेष्य हो तो विशेषण निकटस्थ विशेष्य के अनुरूप लगता है।  जैसे
  • काला कोट और टोपी
  • अच्छे आदमी और औरतें
विशेषण पुनरूक्त में प्रयुक्त होते है।
  • ये लम्बें लम्बें वृक्ष अच्छे प्रतीत होते है।
  • नन्हेंनन्हें बालक नृत्य करते है।

विशेषणों  में आपस में अंतर(Difference  between in Adjective)

सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण में अंतर

सर्वनाम वे शब्द है। जो संज्ञा के स्थान पर प्रयंक्त किए जाते हैं और प्रकार्य करते है। जो संज्ञा शब्दों द्वारा किया जाता है। इसलिए  संज्ञा के स्थान पर सर्वनाम तथा सर्वनाम के स्थान पर संज्ञा शब्द आ सकते है।

जब सर्वनाम स्वंय संज्ञा शब्दों विशेषता बताने लगते हैं तब वे सर्वनाम नहीं बल्कि सार्वनामिक विशेषण कहे जाते है। सार्वनामिक विशेषणों के स्थान पर कोई अन्य विशेषण तो आ सकता है,पर संज्ञा शब्द नहीं आ सकता

,जैसे —

  • उसका मकान बन गया है’वाक्य में उसका  विशेषण का कार्य कर रहा है। इसके स्थान पर कोई अन्य विशेषण शब्द जैसे —नया, पुराना, बडा छोटा,तो आ सकता है।
पर कोई संज्ञा शब्द नहीं अत्: संज्ञा की विशेषता बताने के कारण यहॉ उसका सार्वनामिक विशेषण है।

निश्चयवाचक सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण में अंतर

इन दोनों में सुक्ष्म अंतर है। निश्चयवाचक सर्वनाम किसी व्यक्ति,प्राणि,वस्तु,घटना आदि की निश्चिता का बोध कराता है।
जबकि सार्वनामिक विशेषण से व्यक्ति,प्राणि,वस्तु,घटना आदि की विशेषता प्रकट होती है।
जैसे —
  •  क) 1 गीता की पुस्तक है।——— यह पुस्तक गीता की है।
  • ख)  2 वह रीना का घर है। ———  वह घर रीना का है।
वाक्य 1 और 2 में यह और वह  क्रमश:गीता की पुस्तक और शीला का घर की निश्चिता का बोध कराते है। इसलिए निश्चय सर्वनाम हैं

जबकि ख के अर्तंगत वाक्य 1और 2 में  यह पुस्तक और वह घर  में यह पुस्तक की और वह घर की विशेषता बता रहें है।इसलिए सार्वनामिक विशेषण है।

संख्यावाचक तथा परिणाम वाचक विशेषण में अंतर

संख्यावाचक विशेषण हमेशा किसी ​​िनश्चित या अनिश्चित सख्या की ओर सकेंत करते है। उनके विशेष्य जातिवाचक संज्ञा शब्द होते हैं और उनको गिना जा सकता है।
जैसे
  • दस लोग,एक चोर,कुछ कमरे, बहुत छात्र आदि।

जबकि परिणाम अपने विशेष्य पनश्चित व अनिश्चित मात्रा बताते है।तथा इनके विशेष्यों संज्ञाओं को गिना जा सकता है। क्योंकि ये द्रवयवाचक संज्ञा शब्द होते है।

जैसे —

  • पॉच किलो सब्जी,दो किलो आटा, दस किलो बादाम,बहुत सामान,थोडे चावल,जरा—सी चाय आदि।

विशेषणों का  रूप परिवर्तन( रूपान्तर)

विशेषण शब्द लिंग वचन और कारक की दृष्टि से बदल जाते है।
विशेषण शब्दलिंगवचन
काला

काली काले
खट्टा खट्टीखट्टे
कडवाकडवीकडवे
पतला पतलीपतले
बुराबुरी बुरे
ममेराममेरी ममेरे
टेढाटेढीटेढे
हरा
हरी हरे
मोटा मोटी मोटा
भला भलीभले
सीधासीधीसीधे
मीठामीठीमीठे
रसीला
रसीली
रसीले
नीचा नीची
नीचे
लंबालंबी लंबे
विशेषण शब्दों  का संज्ञा शब्दों के रूप में प्रयोग
  • कई बार विशेषण शब्द का संज्ञा शब्दों के रूप में प्रयोग  किया जाता है।
  • भलों से म़ित्रता रखनी चाहिए।
  • मूर्खों से दूर रहना ही समझदारी है।
  • प्यासों के लिए पानी का प्रबंध किया गया।
  • बूढों के प्रति सम्मान की भवना रखो।
  • रोगियों को कम्बल दिए।
  • नागरिकों पर अनेक उत्तरदायित्व हैं।
  • बेईमानों की देश में भरमार है।
  • अनपढों के कारण लोकतंत्र का मजाक बन गया है।
  • निर्धरता के प्रति सरकार का ही दायित्व है।
  • सैनिकों ने सीमाओं की रक्षा में प्राण त्याग दिए।
इन वाक्यों में आए _शब्द विशेषण है। इन वाक्यों में ये शब्द संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हुए है।

विशेषणों का रूपान्तर

विशेषण का अपना लिंग-वचन नहीं होता। वह प्रायः अपने विशेष्य के अनुसार अपने रूपों को परिवर्तित करता है। हिन्दी के सभी विशेषण दोनों लिंगों में समान रूप से बने रहते हैं; केवल आकारान्त विशेषण स्त्री० में ईकारान्त हो जाया करता है।
अपरिवर्तित रूप
(1) बिहारी लड़के भी कम प्रतिभावान् नहीं होते।
(2) वह अपने परिवार की भीतरी कलह से परेशान है।
(3) उसका पति बड़ा उड़ाऊ है।
परिवर्तित रूप
(1) अच्छा लड़का सर्वत्र आदर का पात्र होता है।
(2) अच्छी लड़की सर्वत्र आदर की पात्रा होती है।
(3) हमारे वेद में ज्ञान की बातें भरी-पड़ी हैं।
(4) विद्वान सर्वत्र पूजे जाते हैं।
(5) राक्षस मायावी होता था।
(6) राक्षसी मायाविनी होती थी।
जिन विशेषण शब्दों के अन्त में ‘इया’ रहता है, उनमें लिंग के कारण रूप-परिवर्तन नहीं होता।
जैसे-
  • मुखिया, दुखिया, बढ़िया, घटिया, छलिया।
  • दुखिया मर्दो की कमी नहीं है इस देश में।
  • दुखिया औरतों की भी कमी कहाँ है इस देश में।
उर्दू के उम्दा, ताजा, जरा, जिंदा आदि विशेषणों का रूप भी अपरिवर्तित रहता है।
जैसे-
  • आज की ताजा खबर सुनो।
  • पिताजी ताजा सब्जी लाये हैं।
सार्वनामिक विशेषणों के रूप भी विशेष्यों के अनुसार ही होते हैं।
जैसे-
  • जैसी करनी —–वैसी भरनी
  • यह लड़का——वह लड़की
  • ये लड़के——–वे लड़कियाँ
जो तद्भव विशेषण ‘आ’ नहीं रखते उन्हें ईकारान्त नहीं किया जाता है। स्त्री० एवं पुं० बहुवचन में भी उनका प्रयोग वैसा ही होता है। जैसे-
  • ढीठ लड़का कहीं भी कुछ बोल जाता है।
  • वहां के लड़के बहुत ही ढीठ हैं।
जब किसी विशेषण का जातिवाचक संज्ञा की तरह प्रयोग होता है तब स्त्री०- पुं० भेद बराबर स्पष्ट रहता है।
जैसे-
  • उस सुन्दरी ने पृथ्वीराज चौहान को ही वरण किया।
  • उन सुन्दरियों ने मंगलगीत प्रारंभ कर दिए।
परन्तु, जब विशेषण के रूप में इनका प्रयोग होता है तब स्त्रीत्व-सूचक ‘ई’ का लोप हो जाता है। जैसे-
  • उन सुन्दर बालिकाओं ने गीत गाए।
  • चंचल लहरें अठखेलियाँ कर रही है।
जिन विशेषणों के अंत में ‘वान्’ या ‘मान्’ होता है, उनके पुंल्लिंग दोनों वचनों में ‘वान्’ या ‘मान्’और स्त्रीलिंग दोनों वचनों में ‘वती’ या ‘मती’ होता है। जैसे
  • गुणवान लड़का ———-  गुणवान् लड़के
  • सत्यवती लड़की ———–सत्यवती लड़कियाँ
  • सत्यवान लडका  ———- सत्यवान लडके
  • बुद्धिमान् लड़का ———– बुद्धिमान् लड़के
  • बुद्धिमती लड़की ———– बुद्धिमती लड़कियाँ
  • दयावान लड़का  ————दयावान लड़के
  • दयामती लड़की  ———– दयामती लड़कियाँ

विशेषण का पद-परिचय

विशेषण के पद-परिचय में संज्ञा और सर्वनाम की तरह लिंग, वचन, कारक और विशेष्य बताना चाहिए।

जैसे —
काला — कुत्ता मर गया।
काला — विशेषण,गुणवाचक, रंग बोधक,पुलिंग एकवचन
विशेषय— कुत्ता

उदाहरण-

यह तुम्हें बापू के अमूल्य गुणों की थोड़ी-बहुत जानकारी अवश्य करायेगा।
इस वाक्य में अमूल्य औरथोड़ीबहुत विशेषण हैं। इसका पद-परिचय इस प्रकार होगा-

अमूल्य विशेषण, गुणवाचक, पुंलिंग, बहुवचन, अन्यपुरुष, सम्बन्धवाचक, ‘गुणों’ इसका विशेष्य।
थोड़ीबहुत विशेषण, अनिश्र्चित संख्यावाचक, स्त्रीलिंग, कर्मवाचक, ‘जानकारी’ इसका विशेष्य।